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जियो पॉलिटिक्स से कैसे प्रभावित हुईं मैन्युफैक्चरिंग रणनीतियां? BW इवेंट में मिला जवाब 

BW बिजनेस वर्ल्ड द्वारा आयोजित इवेंट में अलग-अलग सेक्टर्स की दिग्गज हस्तियां अपने विचार साझा कर रही हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Businessworld की तरफ से दिल्ली में Supply Chain Competitiveness Sumit & Awards 2023 का आयोजन किया जा रहा है. अलग-अलग सेक्टर्स के मार्केट लीडर इस आयोजन में शिरकत कर रहे हैं. साथ ही वह 'सप्लाई चेन' को लेकर अपने विचार भी व्यक्त कर रहे हैं. इस दौरान 'How geopolitics & innovation are reshaping enterprise manufacturing strategies' विषय पर हुए पैनल डिस्कशन में IESA Semiconductor Manufacturing Supply Chain CIG के VP & Country Head - GlobalFoundries & Chair Jitendra Chaddah, Gentari India के सीईओ Navjit Gill, Bausch & Lomb India के Managing Director - India & SAARC Sanjay Bhutani और Chairman & Director General, MTaI;, Managing Director, Vygon India Pavan Choudary ने भाग लिया. वहीं, सेशन की भूमिका में BCG के Senior Partner & MD and Lead – Global Operations Practice Ravi Srivastava मौजूद रहे.

ऐसे प्रभावित हुई सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री
डिस्कशन की शुरुआत करते हुए रवि श्रीवास्तव ने सप्लाई चेन को प्रभावित करने वाले 3 मेगा ट्रेंड्स के बारे में बताया, जिनमें कोरोना, प्राकृतिक आपदा आदि के चलते होने वाला व्यवधान, कार्बन इम्पैक्ट और जियो पॉलिटिक्स शामिल हैं. उन्होंने Jitendra Chaddah से पूछा कि जियो पॉलिटिक्स से सप्लाई चेन कैसे प्रभावित होती है? इस पर Jitendra Chaddah ने सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद ये इंडस्ट्री एकदम से चर्चा में आ गई थी. सेमीकंडक्टर की किल्लत के चलते कारों का वोटिंग पीरियड बढ़ गया था, मेडिकल डिवाइस की सप्लाई भी समय पर नहीं हो पा रही थी. इसने पूरी दुनिया का ध्यान सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की और खींचा. उन्होंने आगे कहा - सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री का हमारे जीवन में आज अहम् रोल हो गया है. एक साल में इस इंडस्ट्री की ग्रोथ डबल होने की संभावना है. इस इंडस्ट्री का सबसे जटिल भाग सप्लाई चेन है. हमें सुनिश्चित करना होगा कि टेक्नोलॉजी एडवांसमेंट सही समय पर हो, सप्लाई चेन डिमांड पूरी कर पाएं और हम कोरोना के बाद वाली स्थति में फिर न पहुंचें. आज सप्लाई और कुछ इनोवेशन बेहद जरूरी है. क्योंकि आज जहां हम हैं, वहां एक चिप को ग्राहक तक पहुंचने के लिए कई देश और कम से कम 50 हजार किमी की यात्रा करनी पड़ती है, तो इस तरह की जटिलता का सामना हमें करना पड़ता है. 

मेडिकल इंडस्ट्री के लिए बढ़े अवसर 
जियो पॉलिटिक्स के मेडिकल टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री पर प्रभाव से जुड़े सवाल पर Pavan Choudary ने कहा - मेडिकल इंडस्ट्री में अब हमारे पास काफी अवसर हैं. क्योंकि ग्लोबल कंपनियां चीन +1 की नीति पर तेजी से काम कर रही हैं. +1 ट्रैफिक एशियाई देशों में आ रहा है और ये तेजी से भारत की तरफ भी मुड़ सकता है. आज मेडिकल टेक्नोलॉजी डिफेन्स स्पेस में भी प्रवेश कर गई है. आप आज किसी की डिवाइस या मशीन में कोई बग डाल सकते हैं. और वो डिवाइस हजारों लोगों के दिल में हो सकती है, जिसे साइबर अटैक से एक्टिव किया जा सकता है. यानी बिना गोली दागे भी किसी को नुकसान पहुंचाया जा सकता है. इसलिए प्रोडक्ट कहां सोर्स हो रहा है, ये बहुत मायने रखता है. हमारे प्रधानमंत्री मेडिकल इंडस्ट्री में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि ये कीस्टोन है, लिंचबिट है, ये केवल कल की सेहत ही निर्धारित नहीं करती, बल्कि ये एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर करीब से नजर रखने की जरूरी है, ताकि गलत मंशा वाले हमें प्रभावित न कर सकें.        

पुरानी तकनीकों को रिफाइन करना होगा
Navjit Gill ने अपनी कंपनी के बारे में बताते कहा कि कई ऐसी दशकों पुरानी तकनीक हैं, जिन्हें सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो आप बेहतरीन स्टोरेज समाधान हासिल कर सकते हैं. उन्होंने पंप स्टोरेज हाइड्रो प्रोजेक्ट का जिक्र करते हुए कहा कि ये 100 साल पुरानी तकनीक है, लेकिन इसे भुला दिया गया है. यदि इसे सही तरह से अमल में लाया जाता है, तो ये प्रोजेक्ट 99 साल तक चल सकता है. सप्लाई चेन की चुनौतियों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इनसे विभिन्न एप्लीकेशन के इस्तेमाल से निपटा जा सकता है, जिसमें इनोवेशन, सही जगह पर सप्लाई चेन मैन्युफैक्चरिंग और इसके साथ ही अपनी लोकेशन प्राकृतिक लाभ को पहचानना और कुछ पुरानी तकनीकों को रिफाइन करना शामिल हैं.  

रूस-यूक्रेन युद्ध ने ऐसे डाला असर
आपने सप्लाई चेन नेटवर्क में पिछले कुछ सालों में कितना बदलाव देखा है? इस साल के जवाब में संजय भूटानी ने कहा कि हमारा 70 बिजनेस कॉन्टेक्ट लेंस का है, इसके अलावा स्किन टाइटनिंग जैसे प्रोडक्ट भी बनाते हैं. हमारे ग्लोबल प्लांट हैं. किसी भी कंपनी के लिए हर जगह प्लांट लगाना संभव नहीं होता. कोरोना के दौरान हमने सप्लाई में व्यवधान का अनुभव किया, क्योंकि कोई शिपमेंट मूवमेंट नहीं था. मेडिकल डिवाइस में यदि कोई एक भी कॉम्पोनेन्ट न हो, तो पूरी मशीन काम नहीं करती. इस समस्या को देखते हुए हमने कुछ कदम उठाए, जिसमें विकल्प के तौर पर स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ विनिर्माता और आपूर्तिकर्ता तलाशे गए. उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे कुछ कॉम्पोनेन्ट यूक्रेन से आते हैं, जिनकी आपूर्ति युद्ध के चलते प्रभावित हुई. इसे ध्यान में रखते हुए हमने स्थिति सामान्य होने पर ज्यादा स्टॉक मांगना शुरू कर दिया. ऐसी स्थिति में स्टोरेज कॉस्ट बढ़ती है, इन्वेंटरी मैनेजमेंट बढ़ता है और कभी कभी आप इस बढ़ी लागत का बोझ ग्राहक पर डालते हैं. इसलिए हम स्थानीय स्तर पर संभावनाएं तलाश रहे हैं. 


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