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BW B-School Summit: एक्सपर्ट्स से समझें भविष्य के लीडर्स की रेसिपी!

आज बच्चों को ऐसी क्या शिक्षा दी जाए, किस तरह पालन पोषण किया जाए ताकि भविष्य में उन्हें बदलाव करने की क्षमता प्राप्त हो सके.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

कारोबार करने या फिर किसी कंपनी के लिए एक कारोबार को खड़ा करने और उसे विकसित करने के लिए जिस शिक्षा की आवश्यकता होती है वह B-स्कूल या बिजनेस स्कूलों के द्वारा प्रदान करवाया जाता है. ऐसे ही जाने-माने B-स्कूलों को सम्मानित करने के लिए आज BW बिजनेसवर्ल्ड के द्वारा देश की राजधानी दिल्ली में BW बिजनेस स्कूल समिट एवं अवॉर्ड्स का आयोजन किया गया था और इसी कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर भी चर्चा की गई कि भविष्य के प्रमुख लीडर्स कैसे तैयार किए जाते हैं?

ग्लोबल, समायोजन और जिम्मेदारी
बिजनेस स्कूलों के द्वारा तैयार किये जाने वाले ये लीडर्स ही होते हैं जो आगे चलकर किसी कंपनी या संस्था के लिए महत्त्वपूर्ण फैसले लेते हैं या फिर उनमें प्रमुख बदलावों के लिए जिम्मेदार होते हैं. इसीलिए यह जान लेना जरूरी है कि आज बच्चों को ऐसी क्या शिक्षा दी जाए, उनका किस तरह पालन पोषण किया जाए ताकि भविष्य में उन्हें प्रमुख बदलाव करने की क्षमता प्राप्त हो सके. इस विषय पर अपनी राय रखते हुए IILM यूनिवर्सिटी की वाईस चांसलर डॉक्टर सुजाता शाही कहती हैं कि IILM में बच्चों को लीडर्स बनाने की शुरुआत इन 3 शब्दों से की जाती है- ग्लोबल, समायोजन और जिम्मेदारी. वह कहती हैं कि एक बच्चे का परिप्रेक्ष्य ग्लोबल होना चाहिए, उसके काम करने का तरीका समायोजन से पूर्ण होना चाहिए और जिम्मेदारी उसके व्यवहार में होनी चाहिए. 

सिर्फ नौकरी नहीं ये भी है जरूरी
इसके साथ ही डॉक्टर सुजाता शाही कहती हैं कि बिजनेस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को सिर्फ नौकरी पाने के लिए ट्रेनिंग नहीं देनी चाहिए बल्कि उन्हें भविष्य में होने वाले बदलावों के लिए तैयार करना जरूरी है. भविष्य के लिए उन्हें तैयार करने के नजरिये से सबसे प्रमुख कारक है गंभीर रूप से सोचना और किसी भी समस्या को हल करने की क्षमता होना. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि वातावरण लगातार काफी तेज गति से बदल रहा है और इसीलिए बच्चों में ग्रहण करने की क्षमता और लचीलापन बेहद जरूरी है. इसके साथ ही डॉक्टर सुजाता कहती हैं कि बच्चे भविष्य में बदलाव कर सकें और उनमें बदलाव करने की क्षमता हो तो इसके लिए उन्हें अनुभव से भरी ट्रेनिंग देना भी जरूरी है, क्योंकि बदलाव करने की क्षमता यहीं से पैदा होती है.
 

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