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BW Auto: एकसुर में बोले दिग्गज, AI की मदद से ऑटो इंडस्ट्री को बनाया जा सकता है और बेहतर 

BW Auto इवेंट में शामिल हस्तियों ने बताया कि कैसे AI ऑटो इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Businessworld द्वारा दिल्ली में BW Auto NEW GEN OF TRAILBLAZERS इवेंट आयोजित किया गया. इस दौरान Navigating the Road Ahead: Opportunities & Trends in the Indian Automotive Sector विषय पर पैनल डिस्कशन हुआ, जिसमें Automotive Skills Development Council (ASDC) के सीईओ Arindam Lahiri, IBM में Automotive Industry के बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर Sankalp Sinha, Mahindra & Mahindra में Product & Strategy – Electric SUVs की प्रमुख Reeti Nageshri और Netradyne Technology के सीनियर डायरेक्टर Amit S Kumar ने भाग लिया. सेशन चेयर की भूमिका Kwik Fix Auto के सीईओ एवं को-फाउंडर Ravi Chandarana ने निभाई. 

तेजी से बदल रही है टेक्नोलॉजी
पैनल डिस्कशन की शुरुआत Ravi Chandarana ने पूछा कि जब हम भारतीय बाजार में अवसर देखते हैं, तो क्या हमारे पास इतना कौशल है कि लेबर या टेक्नोलॉजी के संबंध में आने वाले गैप को भर सकें? इसके जवाब में Arindam Lahiri ने कहा कि टेक्नोलॉजी आजकल बहुत तेजी से बदल रही है और इस बदलाव से मेल खाने के लिए ट्रेनिंग के मोर्चे पर काफी संघर्ष करना पड़ता है. साथ ही यह भी कि वे कौनसे ट्रेंड हैं जिनके लिए अतिरिक्त कार्यबल की जरूरत होगी. उदाहरण के तौर पर 2019 में जब मैं इस कंपनी का हिस्सा बना. उस समय फोकस एक ही पॉइंट पर होता था - EV के लिए कार्यबल प्रदान करना. उस समय एडॉप्शन बहुत कम था. हम विचार-विमर्श कर रहे थे कि इस तरह के प्रोग्राम की पेशकश करनी चाहिए या नहीं, लेकिन हमने शुरू किया. फिर कोरोना आ गया, इस तरह के हालात में ट्रेनिंग सबसे ज्यादा प्रभावित होती है. लेकिन कोरोना के बाद हमने EV व्हीकल के एडॉप्शन में तेजी देखी. हमने यह भी पाया कि इस बदलाव के लिए स्किल्ड मैनपावर की भी जरूरत है. चूंकि हम पहले से ही तैयार थे, हमने 10 अलग अलग कोर्स पेश किए. उन्होंने आगे कहा कि जब बात ट्रेनिंग की आती है, खासकर नई टेक्नोलॉजी की, तो इन्फ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ी चुनौती आती है. हमारे सामने ये चुनौती थी कि विभिन्न ट्रेनिंग सेंटर में इन्फ्रास्ट्रक्चर कैसे उपलब्ध कराया जाए, और दूसरी कि सही क्वालिटी वाले ट्रेनर कहां से लाएं, जो वर्कफ़ोर्स को स्किल्ड बना सकें. इसीलिए इंडस्ट्री और एकेडेमिया को मिलकर काम करना चाहिए. आज के समय में सबसे बड़ी समस्या ये है कि इन दोनों के बीच नजदीकी ज्यादा नहीं है. 

डेटा आज के युग में डिजिटल गोल्ड
ऑटोमोटिव को AI से कनेक्ट करने के संदर्भ में क्या अवसर हैं? इस सवाल के जवाब में Sankalp Sinha ने कहा कि टेक्नोलॉजी की खूबसूरती टर्म्स की सरलता में होती है, भले ही वह कठिन क्यों न लगें. जब डेटा की अनियंत्रित मात्रा, चाहे को स्ट्रक्चर्ड हो या अनस्ट्रक्चर्ड, बहुत अधिक वेलोसिटी पर आती है, तो इसे बिग डेटा कहा जाता है. मुझे लगता है कि डेटा आज के युग में डिजिटल गोल्ड है. आज के युग में एक टिपिकल कनेक्टेड व्हीकल 25 टेरा बाइट डेटा प्रतिदिन जनरेट करता है. संगठन इस डेटा को इन्टरनेट ऑफ थिंग्स के माध्यम से टैप करते हैं. जहां सेंसर, डिवाइस आदि सोर्स के माध्यम से डेटा पुल किया जाता हा. डेटा क्लाउड में स्टोर होता है. जहां उसका विश्लेषण होता है. 

इंडस्ट्री में AI निभाएगी बड़ी भूमिका 
महिंद्रा की पहचान अपनी SUV के लिए है अब वो EV पर फोकस कर रही है. आपको क्या लगता है कि महिन्द्रा कहां जा रही है और EV इंडस्ट्री में कितने अवसर हैं? इस सवाल के जवाब में Reeti Nageshri ने कहा कि महिंद्रा में हम हमेशा इनोवेशन की कोशिश करते हैं. इसलिए ये भी एक कारण है कि हम अधिक देर तक शांत नहीं रह सकते. कम कुछ न कुछ नया और इनोवेटिव करते रहते हैं. हम ग्लोबल अवेयर हैं, पर्यावरण का ख्याल भी रखते हैं. उन्होंने आगे कहा कि ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में AI बड़ी भूमिका निभाएगी. इसकी मदद से अब कार भी हमारी तरह विकसित हो रही हैं. सभी OEM को साथ आना चाहिए, प्लेटफॉर्म साझा करना चाहिए? के सवाल पर Reeti ने कहा कि निश्चित ही यह बहुत अच्छा रहेगा, पूरी इंडस्ट्री को इसका फायदा मिलेगा. 

टेक्नोलॉजी से रोक सकते हैं हादसे
वहीं, Amit S Kumar ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां काफी सड़क हादसे होते हैं. हर दिन 800 जानें जाती हैं. एक स्टडी बताती है कि इन हादसों की 90% वजह है मानवीय भूल या मानव त्रुटी. इसका मतलब है कि यदि मनुष्य अलर्ट रहे और उस त्रुटी से बचे, तो हादसों को टाला जा सकता है. AI भारत जैसे देशों में एक बड़ी भूमिका निभा रही है, जहां ड्राइवरों का कौशल बेहद विविध है. हमारे अधिकांश ड्राइवर ग्लोबल ड्राइवर स्टैण्डर्ड से काफी नीचे हैं. पुलिसबल भी इतनी पर्याप्त संख्या में नहीं है कि नियमों का सख्ती से पालन करवाया जा सके. तो अब आप इन ड्राइवरों को कैसे शिक्षित कर सकते हैं और ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं? इस मामले में टेक्नोलॉजी बड़ी भूमिका निभा सकती है. AI की मदद से व्हीकल के बाहर के ईको सिस्टम और अंदर के ईको-सिस्टम पर नजर रखी जा सकती है. जैसे कि ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात तो नहीं हो रही है, ड्राइवर थका हुआ तो नहीं है आदि. टेक्नोलॉजी की मदद से समय पर ड्राइवर को अलर्ट किया जा सकता है. 


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