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Facility Management: 'सही जगह पर सही व्यक्ति हो, तो कोई नहीं रोक सकता ग्रोथ'

BW Businessworld द्वारा आयोजित किए जा रहे इवेंट में BVG इंडिया की ग्रुप प्रेसिडेंट रूपल शाह ने अपने विचार व्यक्त किए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Businessworld द्वारा Facility Management इवेंट आयोजित किया जा रहा है. इस इवेंट में इंडस्ट्री के दिग्गज शिरकत कर रहे हैं और अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं. इस दौरान, Keynote में BVG इंडिया की ग्रुप प्रेसिडेंट रूपल शाह ने 'Prioritizing People over Place' पर अपनी बात रखी. इसकी शुरुआत उन्होंने इंडस्ट्री में महिलाओं की भागीदारी का जिक्र करते हुए की. उन्होंने कहा कि हमारी इंडस्ट्री में फ्रंट रन में महिलाओं का जगह बनाना आसान नहीं है. लेकिन BVG इंडिया में ये रेशियो अपेक्षाकृत ठीक है. 

HEEWI का जिक्र करना नहीं भूलती
BVG इंडिया की ग्रुप प्रेसिडेंट रूपल शाह ने कहा कि हमारी वर्कफोर्स में 6% कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी ये पहली जॉब है. इसमें से 4% सिंगल मदर हैं, हमें इस आंकड़े को 10% तक लेकर जाना है. मैं मानती हूं कि ये आंकड़े उतने बेहतर नहीं हैं, लेकिन हम इन्हें बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. 
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए शाह  ने कहा - मैं अपनी हर मीटिंग में HEEWI का जिक्र करना नहीं भूलती. H का मतलब है गुड हेल्थ, E का मतलब एजुकेशन एवं ट्रेनिंग, दूसरे E का मतलब जेंडर इक्वलिटी, W का मतलब डिसेंट वर्कप्लेस, I का मतलब असमानता (Gender Inequality) को कम करना. हम अपने निर्णयों में भी इसका ख्याल रखते हैं.

इन बातों को समझना जरूरी
Gender inequality की बात करते हुए शाह ने कहा कि इससे पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि टैलेंट डेमोग्राफी में क्या हो रहा है और कैसे ग्लोबल लेवल पर माइग्रेशन डिमांड और सप्लाई के लिए जरूरी बन गया है और कैसे ये देश के स्तर पर असर डाल रहा है. उन्होंने कहा कि दुनिया की आबादी का 2.3 प्रतिशत अपने देश से बाहर किसी दूसरे देश में रहता है. ऐसा कई कारणों से होता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था असंतुलन, डाइवर्जन डेमोग्राफिक ट्रेंड, क्लाइमेट चेंज आदि. 2020 में G20 समिट से पहले यह पाया गया था कि G20 देशों की 3 टॉप डेस्टिनेशन, USA, सऊदी अरब और जर्मनी में सबसे ज्यादा माइग्रेशन हो रहा था, और जिन देशों से माइग्रेशन हो रहा था उसमें इंडिया, मेक्सिको और रूस सबसे आगे थे. लेकिन समय के साथ इसमें बदलाव आया है.

बेहद चिंताजनक है ये आंकड़े
एशियाई देशों की बात करे, तो भारत अभी भी टॉप पर है, इसके बाद चीन, इजिप्ट और फिलीपींस का नंबर आता है. ये आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. हमने आंतरिक माइग्रेशन देखा है, जैसे एक राज्य से दूसरे राज्य में. उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड आदि के लोग दिल्ली, महाराष्ट्र आदि राज्यों का रुख करते हैं. उन्होंने कहा कि इंटरनल के साथ-साथ इंटरनेशनल माइग्रेशन बहुत से 'पुल और पुश फैक्टर' पर निर्भर करते हैं जिन्हें समझना जरूरी है. उदाहरण के तौर पर, पर्याप्त अवसर न मिलना, अच्छे कॉलेज आदि न होना, आरक्षण आदि. यदि मुझे पर्याप्त अवसर नहीं मिलेंगे, तो मैं किसी दूसरी जगह का रुख करूंगी. भारत पर इस समय सबकी नजरें हैं, क्योंकि हमारे यहां सबसे ज्यादा यंग और स्किल्ड आबादी है. कल्चरल अनुकूलता है और हम लैंग्वेज बैरियर को भी जल्दी पार कर लेते हैं. माइग्रेशन के आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इसलिए टैलेंट मैपिंग, पीपल मैनेजमेंट, Talent Acquisition बेहद जरूरी है. शाह ने यह भी कहा कि यदि सही जगह पर सही व्यक्ति को प्लेस किया जाता है, तो आपको ग्रो करने से कोई नहीं रोक सकता.


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