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रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 70% भारतीय काम असंतुष्ट, मिलेनियल्स भी नौकरी छोड़ने के इच्छुक
उद्योगों की हैप्पीनेस की रैंकिंग में, फिनटेक सेक्टर सबसे खुशहाल उद्योग के रूप में उभरा है, जबकि रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे कम खुशहाल माना गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के करीब 70 प्रतिशत कर्मचारी अपनी नौकरी से खुश नहीं हैं. साथ ही, 54 प्रतिशत कर्मचारी अपनी कंपनी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं. यह चिंताजनक आंकड़े दिखाते हैं कि बहुत से कर्मचारी, जो काम में सपोर्ट या संतोष महसूस नहीं कर रहे, नौकरी छोड़ सकते हैं.
रिपोर्ट का नाम है "Happiness at Work - How Happy is India's Workforce? - 2024" और इसे "The Happiest Places to Work" ने "Happiness Research Academy" के साथ मिलकर जारी किया है. यह रिपोर्ट पूरे भारत में किए गए एक बड़े रिसर्च का नतीजा है, जिसमें विभिन्न लिंग, उम्र, स्थान और उद्योगों के शहरी कर्मचारियों की खुशी के पैटर्न का अध्ययन किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, एक ही उम्र के लोग बहुत अलग-अलग स्तर की खुशी महसूस कर रहे हैं, जो दिखाता है कि उम्र के अलावा और भी कई कारक नौकरी में खुशी को प्रभावित करते हैं. इसे "एक ही उम्र समूह में खुशी के स्तर में बड़े अंतर" के तहत बताया गया है. लिंग और क्षेत्रीय आधार पर भी खुशी के अंतर पर रिपोर्ट में प्रकाश डाला गया है. पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में महिलाएं अधिक खुश हैं, जबकि उत्तर क्षेत्र में पुरुषों की खुशी महिलाओं से अधिक है. उद्योगों के मामले में, फिनटेक (Fintech) सेक्टर को सबसे खुश उद्योग माना गया है, जबकि रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे कम खुश बताया गया है.
हैप्पी प्लेस
जब कर्मचारियों को एक सहायक माहौल में अपने व्यक्तिगत रुचियों को आगे बढ़ाने का मौका मिलता है, तो उनके नौकरी छोड़ने की संभावना 60 प्रतिशत कम हो जाती है. मिलेनियल्स (1981-1996 के बीच जन्मे लोग) के नौकरी बदलने का खतरा ज्यादा है, क्योंकि उनमें से 59 प्रतिशत नौकरी बदलने पर विचार कर रहे हैं।
मेथडोलॉजी (पद्धति)
"हैप्पीनेस एट वर्क" रिपोर्ट 18 उद्योग क्षेत्रों के 2,000 लोगों से प्राप्त वैज्ञानिक और ठोस आंकड़ों पर आधारित है. हैप्पीनेस रिसर्च अकादमी द्वारा तैयार किए गए विशेष शोध उपकरणों ने इन आंकड़ों का सटीक और विस्तृत विश्लेषण करने में मदद की, जिससे पूरे भारत के शहरी कार्यबल की खुशी का विस्तृत नक्शा तैयार किया गया।
नम्रता टाटा, हैप्पीस्ट प्लेसेस टू वर्क की निदेशक, ने इस रिपोर्ट के बारे में कहा कि यह रिपोर्ट भारत में कार्यस्थल पर खुशी की मौजूदा स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है. विभिन्न समूहों और क्षेत्रों में खुशी के स्तर में बड़े अंतर यह बताते हैं कि संगठनों को कर्मचारियों की भलाई को प्राथमिकता देनी चाहिए.
हैप्पीनेस रिसर्च अकादमी इस रिपोर्ट को हर साल प्रकाशित करने की योजना बना रही है. हर नई रिपोर्ट के साथ, अकादमी का लक्ष्य ऐसे रुझानों को उजागर करना है जो भारत में सबूत आधारित प्रबंधन (एविडेंस-बेस्ड मैनेजमेंट) के लिए महत्वपूर्ण होंगे.
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