होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / महंगाई है, बेरोजगारी है, तो उसके कुछ कारण भी हैं, उन पर गौर करे विपक्ष

महंगाई है, बेरोजगारी है, तो उसके कुछ कारण भी हैं, उन पर गौर करे विपक्ष

दूसरा मुद्दा मंहगाई है, जो विपक्ष जोर-शोर से उठाता है. यहां ये समझना होगा कि जब इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा होगा, जीडीपी बढ़ेगी तो मुद्रास्फीति यानी महंगाई भी बढ़ेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

  • पूरन डावर, चिंतक एवं विश्लेषक

विपक्ष बार-बार बेरोजगारी और महंगाई पर प्रश्न क्यों करता है, क्योंकि वह जानता है कि जब बेरोजगारी के पेड़ लगाये हैं, तो फल भी बेरोजगारी का ही उगेगा. जिनके हाथ में काम का पारंपरिक हुनर था, उनसे हुनर छीन कर मात्र डिग्री और आरक्षण का झुनझुना दे दिया गया है. नए पेड़ अगर हाईब्रिड तरीके से भी लगाएं, तब भी फल आने में लंबा समय लग जाएगा. लेकिन हाईब्रिड वृक्षों पर फल आना तेजी से शुरू हो गए हैं. इन्फ्रा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में से रोजगार उत्पन्न हो रहे हैं. कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां तकनीक भी रोजगार छीनेगी. इसके अलावा, ऑनलाइन व्यवस्था पर जोर दिए जाने के चलते जहां पारदर्शिता बढ़ेगी, आसानी होगी लेकिन रोजगार घटेंगे. 

इस सेक्टर से आएंगे रोजगार 
रोजगार स्वरोजगारों से आ सकते हैं, मेक इन इंडिया से आ सकते हैं, उन पर बड़े प्रयास हो रहे हैं, आज 500 से अधिक कंपनियां प्रतिदिन रजिस्टर हो रही हैं. बड़ी संख्या में नए स्टार्टअप खड़े हो रहे हैं. हर 10 दिन में एक यूनिकॉर्न कंपनी खड़ी हो रही है. विदेशी निवेश बढ़ रहा है. आज देश ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, यहां तक कि डिफेन्स उपकरण हथियार भी निर्यात कर रहा है. एक ओर कंज्यूमर गुड्स का आयात घट रहा है. दूसरी ओर कैपिटल गुड्स का आयात बढ़ रहा है. कुल मिलाकर बैलेंस ऑफ ट्रेड का बड़ा अंतर दिखाई नहीं दे रहा. कैपिटल गुड्स का आयात निश्चित रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ी छलांग है और यही रोजगार ला सकता है.

बढ़ रहा है भारत का मान 
कृषि क्षेत्र में सुधार सहायता, तकनीक के प्रयोग आम खेती को व्यवस्थित खेती में बदलने के प्रयास खेती की दशा और दिशा बदल सकते हैं. लेकिन कृषि क्षेत्र में अंतर सबसे धीमा है. विडंबना यह है किसानों के बेटे पढ़-लिख कर खेती को बेहतर बनाने की बजाए डिग्री लेकर नौकरी की तरफ भाग रहे हैं और बेरोजगारों की लाइन में लग रहे हैं. दूसरा मुद्दा आम आदमी के लिए मंहगाई का होता है, जो विपक्ष जोर-शोर से उठाता है. यहां ये समझना होगा कि जब इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा होगा, जीडीपी बढ़ेगी तो मुद्रास्फीति यानी महंगाई भी बढ़ेगी. अच्छी बात ये है कि भारत दुनिया की तमाम अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर स्थिति में है. वैश्विक मंच पर भारत की छवि में निखार आ रहा है. स्पेस और न्यूक्लियर में भी हमारा दबदबा बढ़ रहा है.  


टैग्स
सम्बंधित खबरें

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

4 hours ago

3C फ्रेमवर्क से बंगाल की आर्थिक पुनर्बहाली को मिलेगी नई दिशा

बंगाल की चुनौती संसाधनों की कमी नहीं है. वास्तविक समस्या यह है कि राज्य अपनी मौजूदा संपत्तियों को एक प्रभावी आर्थिक रणनीति में बदलने में विफल रहा है.

10 hours ago

भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

5 days ago

ईरान को ‘अनफ्रीज’ करना: असली चुनौती अब शुरू होगी

सिद्धार्थ अरोड़ा लिखते हैं, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार 60 दिनों की अवधि में लगभग 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह पैसा जब ईरान पहुंचेगा, तब उसका क्या होगा?'

6 days ago

2026 की तीसरी तिमाही का ज्योतिष: एआई, संघर्ष और वैश्विक परिवर्तन

ज्योतिषाचार्य विक्रम चन्दीरमानी लिखते हैं कि 2026 के पहले छह महीनों के दौरान इनमें से कई विषय पहले ही उभरने लगे हैं. प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएँ लगातार अधिक स्पष्ट होती जा रही हैं. यह चिंता केवल AI से जुड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की कुछ सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों, जैसे स्पेसएक्स, के उच्च मूल्यांकन को लेकर भी देखी जा रही है.

1 week ago


बड़ी खबरें

₹860 करोड़ का कोहिनूर सौदा, राज ठाकरे की चुप्पी

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.

3 hours ago

मिडिल ईस्ट प्रैक्टिस के लिए प्राइमस पार्टनर्स ने मोहन दोईफोडे को बनाया MD

पूर्व डेलॉइट कंसल्टिंग लीडर GCC क्षेत्र में कंपनी के विस्तार और क्लाइंट संबंधों को देंगे नई दिशा

3 hours ago

GDP से आगे: क्यों भारत की प्रगति का पैमाना सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि खुशहाली और जीवन गुणवत्ता भी होना चाहिए

पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव और लेखक आलोक रंजन का मानना है कि भारत की विकास यात्रा को केवल आर्थिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनके अनुसार, खुशहाली, जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास को भी प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना बनाया जाना चाहिए.

8 hours ago

Truhome Finance को 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी

कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

4 hours ago

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

4 hours ago