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पेट्रोल में 20% से ज्यादा एथनॉल नहीं मिलाएगी सरकार, हरदीप सिंह पुरी ने बताई वजह
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 ईंधन से वाहनों के इंजन को नुकसान पहुंचने के दावों को गलत जानकारी बताते हुए कहा कि इस योजना से सरकार को ₹1.60 लाख करोड़ की बचत हुई है, जिसमें से ₹1.40 लाख करोड़ किसानों को मिले हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 hours ago
पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की नीति को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि सरकार की फिलहाल एथनॉल मिश्रण को 20% से अधिक बढ़ाने की कोई योजना नहीं है. मंगलवार को दक्षिण गोवा में ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया. मंत्री ने कहा कि जैव ईंधन और E20 से जुड़ी गलत जानकारी फैलाई जा रही है.
E20 पेट्रोल पर क्या बोले हरदीप सिंह पुरी?
E20 पेट्रोल में 20% एथनॉल और 80% पेट्रोल होता है. पुरी ने कहा कि एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य 20% था और फिलहाल इससे आगे बढ़ाने की सरकार की कोई इच्छा नहीं है. उन्होंने E20 ईंधन के खिलाफ किए जा रहे दावों को एक मनगढ़ंत कहानी बताया.
मंत्री ने सोशल मीडिया पर किए गए उन दावों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया था कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहन बंद पड़ रहे हैं और उनमें खराबी आ रही है. उनके मुताबिक, अगर ईंधन से बड़े पैमाने पर इंजन को नुकसान हो रहा होता, तो सड़कों पर इसका असर साफ दिखाई देता. उन्होंने कहा कि हर दिन करीब छह करोड़ वाहन ईंधन भरवाने के लिए पेट्रोल पंपों पर पहुंचते हैं.
E20 से सरकार को ₹1.60 लाख करोड़ की बचत का दावा
सरकार पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को बढ़ावा देकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना चाहती है. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा खर्च होती है और चालू खाते पर दबाव पड़ता है.
हरदीप सिंह पुरी ने दावा किया कि E20 पेट्रोल की शुरुआत से केंद्र सरकार को ₹1.60 लाख करोड़ की बचत हुई है. इसमें से ₹1.40 लाख करोड़ किसानों को दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि एथनॉल उत्पादन ने किसानों को खाद्यान्न उत्पादक के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन से जुड़ने का अवसर भी दिया है.
पुराने वाहनों में आ सकती है परेशानी
E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों में समस्याएं आने की शिकायतों पर पुरी ने कहा कि यह ईंधन इसके अनुरूप तैयार किए गए वाहनों के लिए है. उन्होंने 2003 से पहले बने पुराने वाहनों में कुछ समस्याएं होने की बात कही.
मंत्री ने यह भी कहा कि मिश्रित ईंधन के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों से जुड़ी समस्या सामने आई थी, क्योंकि इनका इस्तेमाल अन्य चीजों के परिवहन के लिए भी किया जाता था. इंजन को नुकसान पहुंचने के दावे पर उन्होंने संबंधित वाहन निर्माता की ओर से कानूनी कार्रवाई किए जाने का भी जिक्र किया.
हालांकि, E20 को लेकर वाहन चालकों की शिकायतों और इंजन पर इसके संभावित प्रभावों का आकलन वाहन की तकनीक, निर्माण वर्ष और निर्माता के निर्देशों के आधार पर किया जाना जरूरी है.
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी मिली अनुमति
इस बीच, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किए हैं. इसके तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनुमति दी गई है. ये वाहन अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलने के लिए तैयार किए जाते हैं.
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन E85 यानी 85% एथनॉल और 15% पेट्रोल वाले ईंधन के साथ-साथ E100 जैसे लगभग शुद्ध एथनॉल वाले ईंधन पर भी चल सकते हैं. हालांकि, ऐसे ईंधन का इस्तेमाल केवल संबंधित ईंधन के अनुकूल तैयार किए गए वाहनों में ही किया जा सकता है.
‘अनुसंधान से व्यवसायीकरण तक ऊर्जा नवाचार को गति देना’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का आयोजन केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय कर रहा है. इस दौरान एथनॉल मिश्रण, ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ईंधन से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे.
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