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WTO में गरमाया स्टील टैरिफ विवाद, भारत और अमेरिका में छिड़ गई नई बहस

भारत और अमेरिका के बीच स्टील और एलुमिनियम टैरिफ को लेकर WTO में शुरू हुआ यह विवाद वैश्विक व्यापार नियमों और सुरक्षा की परिभाषा को नए सिरे से चुनौती दे रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 11 months ago

स्टील और एलुमिनियम टैरिफ को लेकर भारत और अमेरिका के बीच WTO में व्यापारिक तनाव तेज हो गया है. भारत ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जो टैरिफ लगाए हैं, वे असल में सेफगार्ड मेजर्स की तरह काम कर रहे हैं और WTO नियमों का उल्लंघन करते हैं. इसके जवाब में अमेरिका ने कहा है कि टैरिफ सेक्शन 232 के तहत लगाए गए हैं और ये GATT के सुरक्षा प्रावधानों के तहत वैध हैं. अब यह विवाद WTO में व्यापार बनाम सुरक्षा की बहस का केंद्र बन गया है. 

भारत का आरोप

भारत ने 11 अप्रैल को WTO में औपचारिक रूप से अमेरिका से विचार-विमर्श की मांग की. भारत का तर्क है कि भले ही अमेरिका इन टैरिफ को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर लगाए, लेकिन वास्तव में इनका प्रभाव सेफगार्ड मेजर्स जैसा ही है. भारत का कहना है कि WTO के नियमों के अनुसार, इस प्रकार के टैरिफ से पहले संबंधित सेफगार्ड कमेटी को जानकारी देना और सदस्यों को बातचीत का अवसर देना आवश्यक होता है. भारत ने आरोप लगाया कि अमेरिका इस प्रक्रिया में विफल रहा.

'सेक्योरिटी क्लॉज' के तहत टैरिफ

अमेरिका ने WTO में अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसने “सेक्शन 232” के तहत स्टील और एलुमिनियम पर टैरिफ लगाया है. यह सेक्शन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है. इसके तहत GATT 1944 (जनरल एग्रीमेंट ऑन टैरिफ्स एंड ट्रेड) के Security Exemption Clause का हवाला दिया गया, जिसमें सदस्य देशों को राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत आयात पर नियंत्रण या शुल्क लगाने की छूट दी जाती है.

छिड़ गई नई बहस

भारत का कहना है कि टैरिफ चाहे जिस भी श्रेणी में रखे जाएं, WTO के नियमों के अनुसार, पारदर्शिता और पूर्व जानकारी देना अनिवार्य है. इस विवाद ने WTO की सेफगार्ड मैकेनिज्म और सिक्योरिटी एग्जेम्प्शन जैसे प्रावधानों की सीमाओं और व्याख्या को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है.

क्या है सेक्शन 232?

अमेरिका का सेक्शन 232 एक कानून है, जिसके तहत सरकार यह तय कर सकती है कि किसी उत्पाद का आयात उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है या नहीं. 2018 में इसी कानून के तहत अमेरिका ने भारत समेत कई देशों से आने वाले स्टील और एलुमिनियम उत्पादों पर उच्च शुल्क लगाया था.

 


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