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रुपये को संभालने के लिए RBI की बड़ी रणनीति: तेल कंपनियों पर कसी लगाम, डॉलर खरीद पर नया सिस्टम लागू

RBI का यह कदम अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बीच रुपये को स्थिर करने की एक रणनीतिक कोशिश माना जा रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

ईरान तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारतीय रुपये पर बने दबाव को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों को खुले बाजार से सीधे डॉलर खरीदने पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. अब इन कंपनियों को विदेशी मुद्रा जरूरतों के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की विशेष क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल करना होगा.

तेजी से कमजोर होते रुपये पर RBI की नजर

हाल के महीनों में वैश्विक तनाव और विदेशी पूंजी की निकासी के चलते रुपये में भारी दबाव देखा गया है. स्थिति ऐसी बनी कि मार्च के अंतिम सप्ताह में डॉलर के मुकाबले रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर 95 के करीब पहुंच गया था. लगातार बढ़ते तेल आयात बिल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने इस गिरावट को और तेज कर दिया. इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए RBI ने अब उन आपातकालीन उपायों को दोबारा सक्रिय किया है, जिन्हें पहले वैश्विक संकट के दौरान भी इस्तेमाल किया गया था.

तेल कंपनियों की डॉलर खरीद पर नई व्यवस्था

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI ने देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) से कहा है कि वे अब सीधे स्पॉट मार्केट से डॉलर की खरीदारी न करें. ये कंपनियां भारत की बड़ी तेल आयातक इकाइयां हैं और विदेशी मुद्रा बाजार में सबसे बड़े डॉलर खरीदारों में शामिल हैं. उनकी सीधी खरीदारी से रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है.

SBI के जरिए मिलेगा विदेशी मुद्रा का रास्ता

नई व्यवस्था के तहत तेल कंपनियों को अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के माध्यम से विशेष क्रेडिट लाइन का उपयोग करना होगा. SBI पहले से ही बड़े सरकारी और व्यापारिक लेन-देन को संभालता रहा है. इस प्रणाली के जरिए डॉलर की मांग को नियंत्रित चैनल में लाया जाएगा, जिससे खुले बाजार में अचानक मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव नहीं बनेगा.

बाजार में अस्थिरता कम करने की कोशिश

RBI ने केवल तेल कंपनियों की खरीद पर ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी और अस्थिरता बढ़ाने वाली गतिविधियों पर भी सख्ती बढ़ाई है. बैंकों को कॉरपोरेट्स के साथ कुछ प्रकार के फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट करने से भी रोका गया है, ताकि अनावश्यक उतार-चढ़ाव को सीमित किया जा सके. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने जरूरत पड़ने पर अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की बिक्री भी की है, ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे.

रुपये में दिखने लगे शुरुआती सुधार के संकेत

इन कदमों का असर अब बाजार में दिखने लगा है. विदेशी मुद्रा ट्रेडर्स के अनुसार, तेल कंपनियों की स्पॉट डॉलर खरीदारी में हाल के दिनों में कमी आई है, जिससे दबाव घटा है. रुपया अपने निचले स्तर से करीब 2% मजबूत होकर रिकवरी की ओर बढ़ा है और हाल ही में यह लगभग 93.20 प्रति डॉलर के स्तर पर दर्ज किया गया.

 


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