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भारत में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर को बढ़ावा, 220 MWe प्रोजेक्ट के लिए जल्द टेंडर आमंत्रित होंगे

यह कदम दर्शाता है कि भारत अब ऐसी परमाणु तकनीकों पर फोकस कर रहा है जिन्हें आसानी से विभिन्न स्थानों पर स्थापित और दोहराया जा सके.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. सरकार अगले 3 से 6 महीनों में 220 मेगावाट क्षमता वाले भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) के लिए बोली आमंत्रित करने की तैयारी में है. यह पहल देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.

स्केलेबल न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी पर जोर

यह कदम दर्शाता है कि भारत अब ऐसी परमाणु तकनीकों पर फोकस कर रहा है जिन्हें आसानी से विभिन्न स्थानों पर स्थापित और दोहराया जा सके. स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) का उपयोग तेजी से तैनाती और लचीले विस्तार के लिए किया जा सकता है.

पायलट प्रोजेक्ट बनेगा BSMR-200

प्रस्तावित 220 MWe रिएक्टर एक मानकीकृत डिजाइन पर आधारित होगा, जिससे इसे कम समय में तैयार किया जा सकेगा. अधिकारियों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट एक पायलट के रूप में काम करेगा और भविष्य में देशभर में ऐसे कई रिएक्टर स्थापित करने का रास्ता खोलेगा.

लागत और निर्माण अवधि

BSMR-200 परियोजना को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है. इसकी अनुमानित लागत करीब 5,960 करोड़ रुपये है, जबकि प्रति मेगावाट लागत लगभग 30 करोड़ रुपये तय की गई है. सभी मंजूरियों के बाद इसके निर्माण में 60 से 72 महीने लगने की उम्मीद है.

विदेशी कंपनियों को भी मौका

सरकार इस परियोजना के लिए विदेशी कंपनियों को भी बोली प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति देगी. हालांकि, उन्हें भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी करनी होगी. यह मॉडल वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञता और स्थानीय क्रियान्वयन के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है.

नीतिगत बदलाव और निवेश

यह पहल हालिया नीतिगत बदलावों के बाद सामने आई है, जिनमें SHANTI अधिनियम जैसे प्रावधान शामिल हैं, जिन्होंने परमाणु क्षेत्र में निजी और विदेशी निवेश के रास्ते खोले हैं. साथ ही, सरकार के न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के तहत SMR के विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं और आने वाले वर्षों में कई यूनिट्स स्थापित करने की योजना है.

स्वच्छ और भरोसेमंद ऊर्जा की ओर कदम

बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच भारत कम-कार्बन और निरंतर (बेसलोड) बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है. SMR जैसी तकनीकें इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकती हैं, जिससे देश अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को तेजी से हासिल कर सकेगा.


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