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डिजिटल इंडिया के बीच भी कैश का जलवा बरकरार: FY26 में चलन में मुद्रा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 की नोटबंदी के बाद भी नकदी का चलन लगातार बढ़ा है. हालांकि 2,000 रुपये के नोट को 2023 में वापस लेने का फैसला किया गया था, लेकिन अब तक उसके 98% से ज्यादा नोट बैंकिंग सिस्टम में लौट चुके हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

देश में डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन नकदी की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2025-26 में चलन में मौजूद मुद्रा में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो यह दिखाती है कि डिजिटल क्रांति के बावजूद कैश की अहमियत कम नहीं हुई है.

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के अंत तक देश में चलन में मौजूद नकदी 11.9% बढ़कर 41.68 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. यह बढ़ोतरी कोविड-19 महामारी के बाद सबसे तेज मानी जा रही है. सिर्फ FY26 में ही चलन में मुद्रा 4.44 लाख करोड़ रुपये बढ़ी, जो नोटबंदी के बाद 2017-18 के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है.

डिजिटल पेमेंट के बावजूद क्यों बढ़ रहा कैश

भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष के अनुसार, डिजिटल भुगतान ने लेनदेन का तरीका जरूर बदला है, लेकिन लोगों की बचत और सुरक्षा की सोच अभी भी नकदी पर आधारित है. उनका कहना है कि नकदी में बढ़ोतरी ‘एहतियाती मांग’ और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को दर्शाती है

UPI में भी जबरदस्त उछाल

एक तरफ नकदी बढ़ रही है, वहीं डिजिटल पेमेंट में भी रिकॉर्ड तेजी जारी है. FY26 में UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू 21% बढ़कर 314.23 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि ट्रांजैक्शन की संख्या 30% बढ़कर 241.6 अरब तक पहुंच गई. यानी साफ है कि देश में कैश और डिजिटल दोनों समानांतर रूप से मजबूत हो रहे हैं.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार नकदी की मांग बढ़ने की बड़ी वजह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार है. IDFC First Bank की मुख्य अर्थशास्त्री Gaura Sen Gupta का कहना है कि लगातार अच्छे मॉनसून और बढ़ती ग्रामीण आय ने नकदी के उपयोग को बढ़ाया है. ग्रामीण इलाकों में अभी भी कैश लेनदेन का प्रमुख माध्यम बना हुआ है.

नोटबंदी के बाद भी कैश का दबदबा कायम

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 की नोटबंदी के बाद भी नकदी का चलन लगातार बढ़ा है. हालांकि 2,000 रुपये के नोट को 2023 में वापस लेने का फैसला किया गया था, लेकिन अब तक उसके 98% से ज्यादा नोट बैंकिंग सिस्टम में लौट चुके हैं.

क्यों बढ़ी नकदी की मांग

विशेषज्ञों के मुताबिक कई कारणों से नकदी की मांग बढ़ी है:

1. शादी और फेस्टिव सीजन में खर्च
2. ग्रामीण आय में सुधार
3. टैक्स और जीएसटी से जुड़ी चिंताएं
4. एहतियात के तौर पर कैश रखने की आदत

हालांकि GDP के अनुपात में नकदी का स्तर थोड़ा घटा है, लेकिन कुल मात्रा में तेजी यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था में कैश अभी भी अहम भूमिका निभा रहा है. डिजिटल और कैश, दोनों का संतुलन ही फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर पेश करता है.
 


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