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कच्चा तेल महंगा रहा तो बढ़ेगा वैश्विक आर्थिक संकट, महंगाई का दबाव खाद्य वस्तुओं तक पहुंचेगा: IMF
आईएमएफ प्रमुख ने केंद्रीय बैंकों को सलाह दी कि ब्याज दरों में जल्दबाजी में बदलाव करने से बचें और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में फंस सकती है. उन्होंने कहा कि इसका असर केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई बढ़कर सीधे खाद्य वस्तुओं तक पहुंच सकती है, जिससे गरीब और तेल-आयात पर निर्भर देशों पर सबसे अधिक दबाव पड़ेगा.
मध्य पूर्व संकट और तेल कीमतों में उछाल
आईएमएफ प्रमुख ने बताया कि हालिया भू-राजनीतिक तनाव के चलते ऊर्जा बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर किसी भी तरह की बाधा वैश्विक तेल और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है. इस स्थिति ने पहले ही तेल और ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बन रहा है.
महंगाई का असर अब खाने-पीने तक पहुंचने का खतरा
क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने चेतावनी दी कि यदि खाद और ईंधन की सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ेगा. इसका मतलब है कि महंगाई केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं. उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कम आय वाले देशों में लोग अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं, इसलिए वहां स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है.
केंद्रीय बैंकों को सतर्क रहने की सलाह
आईएमएफ प्रमुख ने केंद्रीय बैंकों को सलाह दी कि ब्याज दरों में जल्दबाजी में बदलाव करने से बचें और परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लें. उन्होंने कहा कि जिन देशों में महंगाई नियंत्रण में है, वहां “वेट एंड वॉच” की नीति अपनाई जा सकती है. हालांकि, जहां केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता कमजोर है, वहां सख्त मौद्रिक कदम जरूरी हो सकते हैं.
वित्तीय सहायता के लिए तैयार आईएमएफ
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने संकेत दिया है कि अगर वैश्विक स्थिति और बिगड़ती है, तो सदस्य देशों को वित्तीय सहायता दी जा सकती है. फिलहाल संस्था के 39 सहायता कार्यक्रम पहले से चल रहे हैं और आने वाले समय में अतिरिक्त देशों को मदद की जरूरत पड़ सकती है. अनुमान के अनुसार, 20 से 50 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त वित्तीय मांग सामने आ सकती है.
सरकारों के लिए चेतावनी
आईएमएफ ने सरकारों को भी आगाह किया है कि राहत नीतियां सोच-समझकर लागू की जाएं. संस्था ने कहा कि बिना लक्ष्य वाली नीतियां, जैसे निर्यात प्रतिबंध या व्यापक टैक्स कटौती, अल्पकालिक राहत तो दे सकती हैं लेकिन लंबे समय में महंगाई की समस्या को और बढ़ा सकती हैं.
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