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SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट और निवेश सलाहकारों के लिए नियमों को आसान बनाया, जानें पूरा मामला

शेयर बाजार रेग्युलेटर Securities and Exchange Board of India ने नया सर्कुलर जारी किया है. नियमों में बड़ा बदलाव भी किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारतीय शेयर बाजार के रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने निवेश सलाहकारों (Investment Advisors - IAs) और रिसर्च एनालिस्ट्स (Research Analysts - RAs) के लिए नियमों में राहत दी है. शेयर बाजार रेग्युलेटर SEBI-Securities and Exchange Board of India ने इसको लेकर नया सर्कुलर भी जारी कर दिया है. आइए आपको विस्तार से बताते हैं...

क्या है मामला?

सर्कुलर के मुताबिक निवेश सलाहकारों (Investment Advisors - IAs) और रिसर्च एनालिस्ट्स (Research Analysts - RAs) को सीधे राहत दी गई है. अब वे अपने मौजूदा ग्राहकों को ‘Most Important Terms and Conditions (MITC)’ की जानकारी ईमेल या किसी अन्य डिजिटल माध्यम से भेज सकते हैं, जिसे रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखा जा सकता है.

SEBI ने यह बदलाव आरए और आईए की "Ease of Doing Business" की चिंताओं को दूर करने के लिए किया है. पहले ग्राहकों से MITC को फिजिकल या डिजिटल सिग्नेचर के जरिए कन्फर्म कराना अनिवार्य था, जिससे कई समस्याएं हो रही थीं. अब SEBI ने इस नियम में राहत देते हुए ईमेल या अन्य डिजिटल माध्यमों से MITC भेजने की अनुमति दी है.

क्या है SEBI का नया नियम? 

मौजूदा ग्राहकों के लिए नियम (Existing Clients)- अब निवेश सलाहकार (IA) और रिसर्च एनालिस्ट (RA) अपने मौजूदा ग्राहकों को MITC की जानकारी केवल ईमेल या किसी अन्य सुरक्षित डिजिटल माध्यम से भेज सकते हैं. MITC की जानकारी 30 जून 2025 तक सभी मौजूदा ग्राहकों को भेजनी होगी. अब फिजिकल या डिजिटल सिग्नेचर की आवश्यकता नहीं होगी. नए ग्राहकों के लिए नियम (New Clients)- नए ग्राहकों के लिए MITC को "Terms & Conditions" में शामिल किया जाएगा. पूरी शर्तों और नियमों (T&C) को ग्राहक को डिस्क्लोज करना होगा और उनसे लिखित सहमति (Signature या E-Sign) लेनी होगी.

निवेश सलाहकारों और रिसर्च एनालिस्ट्स के लिए शुल्क पर नया नियम

एडवांस फीस की समयसीमा (Advance Fee Collection Limit). SEBI ने निवेश सलाहकारों (IA) और रिसर्च एनालिस्ट्स (RA) के लिए यह नियम तय किया है:-RA (रिसर्च एनालिस्ट) एडवांस फीस सिर्फ 3 महीने तक ले सकते हैं. IA (इंवेस्टमेंट एडवाइजर) एडवांस फीस 6 महीने तक ले सकते हैं. हालांकि, SEBI ने इस सीमा को 1 साल तक बढ़ाने के लिए एक परामर्श पत्र (Consultation Paper) जारी किया है, क्योंकि IAs और RAs ने इस नियम का विरोध किया है.

SEBI के नए नियमों का विश्लेषण (Impact Analysis)- निवेश सलाहकारों (IA) और रिसर्च एनालिस्ट्स (RA) के लिए राहत है. अब उन्हें MITC के लिए हर ग्राहक से सिग्नेचर लेने की ज़रूरत नहीं होगी, जिससे उनकी प्रशासनिक प्रक्रिया आसान हो जाएगी. डिजिटल माध्यमों के जरिए ग्राहकों को तेज़ी से जानकारी भेजना आसान होगा. ग्राहकों और सलाहकारों के बीच अधिक पारदर्शिता (Transparency) बनी रहेगी.

शेयर बाजार पर क्या असर होगा?

SEBI के इस फैसले से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि अब सभी महत्वपूर्ण नियम स्पष्ट रूप से साझा किए जाएंगे. IA और RA के कामकाज में सुधार होगा, जिससे वे अधिक फोकस के साथ अपने ग्राहकों को सेवाएं दे पाएंगे. अगर SEBI एडवांस फीस की समय सीमा 1 साल तक बढ़ाने का फैसला लेता है, तो यह निवेश सलाहकारों के लिए एक बड़ी राहत होगी. SEBI ने 30 जून 2025 तक मौजूदा ग्राहकों को MITC भेजने की समयसीमा तय की है. एडवांस फीस की सीमा को बढ़ाने को लेकर चर्चा जारी है और SEBI इस पर अंतिम निर्णय जल्द ले सकता है. अगर SEBI का परामर्श पत्र (Consultation Paper) स्वीकार कर लिया जाता है, तो IA और RA के लिए फीस संग्रह की अधिकतम सीमा 3-6 महीने से बढ़ाकर 1 साल की जा सकती है.
 


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