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होर्मुज संकट से तेल सप्लाई प्रभावित, बाजार खुलते ही कच्चा तेल 104 डॉलर के पार

दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार में हलचल मचा दी है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है. सोमवार को बाजार खुलते ही क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिससे भारत समेत दुनिया भर में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ गया है और तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर दिख सकता है.

1 अरब बैरल कच्चा तेल संकट की भेंट

सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में करीब 1 अरब बैरल कच्चा तेल ईरान संकट की वजह से प्रभावित हुआ है. उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सामान्य हो जाए, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर होने में लंबा समय लग सकता है.

केप्लर (Kpler) के शिपिंग डेटा के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में केवल दो तेल टैंकर ही होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल पाए. बताया जा रहा है कि ईरानी हमलों से बचने के लिए कई जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम तक बंद कर दिए.

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में गिना जाता है. दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही रुकने का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है. मौजूदा हालात में यही देखने को मिल रहा है.

कच्चे तेल की कीमत में जोरदार उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.32 प्रतिशत बढ़कर 104.7 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. वहीं यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 3.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 99 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया. शुक्रवार को भी तेल की कीमतों में मजबूती देखी गई थी और नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भी तेजी के साथ हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में फिलहाल सबसे बड़ा डर सप्लाई संकट को लेकर है.

अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा तैयार किए गए शांति प्रस्ताव को ईरान ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के जवाब को खारिज कर दिया. इससे पिछले 10 हफ्तों से जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताह चीन यात्रा पर जा रहे हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच ईरान संकट और तेल सप्लाई को लेकर अहम चर्चा हो सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का ईरान पर प्रभाव होने के कारण यह बैठक वैश्विक बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है.

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर?

फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. सरकार के मुताबिक, मौजूदा हालात में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

सरकार ने यह भी कहा है कि भारत में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि कई देशों में पेट्रोल, डीजल और LPG के दाम काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुके हैं.

आने वाले दिनों में क्या बढ़ सकती है महंगाई?

जानकारों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर परिवहन लागत और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में हर बड़ी तेजी सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के बजट को प्रभावित करती है. फिलहाल बाजार की नजर अमेरिका, ईरान और चीन के बीच होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी हुई है.
 


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