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SEBI प्रमुख की दौड़: माधबी पुरी बुच का बढ़ेगा कार्यकाल या फिर मिलेगा नया चेहरा?
माधबी बुच को अपने कार्यकाल बढ़ने की उम्मीद है, अफसरों की बात करें तो तुहिन कांता पांडे, पंकज जैन, विवेक कुमार देवांगन और अजय सेठ दौड़ में हो सकते हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
पलक शाह
शक्तिकांत दास, जो हाल ही में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव बने हैं, आज कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन से मिलेंगे. बातचीत का विषय नया सेबी प्रमुख नियुक्त करना या मौजूदा चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को कुछ महीनों का विस्तार देना होगा. BW बिज़नेसवर्ल्ड को इस मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी. बुच पिछले हफ्ते नई दिल्ली में थीं और अपनी कार्यकाल समाप्त होने से पहले (28 फरवरी) कुछ महत्वपूर्ण लोगों से मिलीं. सूत्रों के अनुसार, सेबी प्रमुख के इस प्रतिष्ठित पद के लिए जोरदार कोशिशें हो रही हैं.
माधबी पुरी बुच, जिन्हें अपने कार्यकाल में छोटे विस्तार की काफी उम्मीद है, उनके अलावा भारत के वर्तमान वित्त सचिव तुहिन कांता पांडे सेबी प्रमुख पद के सबसे बड़े दावेदार हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठता के हिसाब से पांडे कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन के बाद भारत के सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं. अगस्त 2024 में जब सोमनाथन को कैबिनेट सचिव बनाया गया था, तब उनकी जगह पांडे को वित्त सचिव बनाया गया था.
अन्य अफसरों में, जो सेबी प्रमुख की दौड़ में हैं, उनमें आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव अजय सेठ, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव पंकज जैन, आरईसी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक कुमार देवांगन शामिल हैं. इसके अलावा, सेबी के सभी मौजूदा पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया, कमलेश वार्ष्णेय, अनंत नारायण और अमरजीत सिंह भी इस रेस में हैं.
सूत्रों के अनुसार, पूर्व सेबी पूर्णकालिक सदस्य (WTM) एस.के. महांती का नाम भी चर्चा में है, क्योंकि वे तीन साल के कार्यकाल के लिए योग्य हैं और पीएमओ अधिकारियों के करीबी माने जाते थे. हालांकि, तुहिन कांता पांडे इस दौड़ में सबसे आगे हैं. ओडिशा कैडर के अधिकारी पांडे, कैबिनेट सचिव सोमनाथन के बाद सबसे वरिष्ठ हैं और इस समय नॉर्थ ब्लॉक में चार महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व कर रहे हैं.
(लेखक- पलक शाह, "द मार्केट माफिया - क्रॉनिकल ऑफ इंडिया’s हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" किताब के लेखक हैं. पलक शाह पिछले दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसे प्रमुख पिंक पेपरों में काम किया है. वह 19 साल की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग से जुड़े थे, लेकिन कुछ सालों में इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि अपराध की संरचना बदल चुकी थी और वह संगठित गिरोह, जैसा कि मुंबई ने 80 के दशक में देखा था, अब अस्तित्व में नहीं थे. 'व्हाइट मनी' अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को समझने के उनके जुनून ने पलक को वित्त और नियामकों की दुनिया में पहुंचा दिया.)
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