होम / बिजनेस / प्री-दिवाली धमाका: अंबानी की ₹13 लाख करोड़ की जियो और ट्रंप डील दलाल स्ट्रीट की ओर
प्री-दिवाली धमाका: अंबानी की ₹13 लाख करोड़ की जियो और ट्रंप डील दलाल स्ट्रीट की ओर
Jio के ₹13 लाख करोड़. 30 दिनों की समयसीमा में तेजी से आगे बढ़ रही ट्रंप ट्रेड डील. रिकॉर्ड FII शॉर्ट्स. अब साल के दो सबसे बड़े संभावित मार्केट ट्रिगर एक ही समय में दलाल स्ट्रीट की ओर बढ़ रहे हैं. शॉर्ट पोजीशन? 3.12 लाख इंडेक्स फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
पलक शाह
क्यों यह बाजार को बदल सकता है
बाजार नीचे है, विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है, मंदड़ियों ने शॉर्ट किया है और अब अंबानी आ रहे हैं.
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाला रिलायंस ग्रुप जियो (Jio) को दलाल स्ट्रीट पर ला रहा है और इसके साथ इतनी बड़ी संख्या आ रही है कि यह कॉरपोरेट इंडिया का नक्शा बदल सकती है. चर्चा में चल रहे प्राइस बैंड पर जियो की लिस्टिंग के समय वैल्यूएशन करीब ₹13 लाख करोड़ हो सकती है और कीमत में बढ़ोतरी बाजार पूंजीकरण के मामले में एक बड़ी छलांग हो सकती है, इस मामले से परिचित लोगों के मुताबिक. जियो को रिलायंस इंडस्ट्रीज में जोड़ दें तो एक ही परिवार के नियंत्रण वाला एक कारोबारी समूह ₹30 लाख करोड़ से अधिक की लिस्टेड मार्केट वैल्यू के साथ खड़ा हो सकता है. यह भारतीय शेयर बाजारों पर संपत्ति का ऐसा पहाड़ होगा, जो अंबानी परिवार को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा देगा. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, लिस्टिंग के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स का मार्केट कैप रिलायंस इंडस्ट्रीज से भी अधिक हो सकता है.
₹30 लाख करोड़, एक परिवार, एक समूह
इस मेगा IPO को दुनिया तक पहुंचाने वाले लोग कॉन्फ्रेंस रूम के दरवाजों के पीछे छिपे बैंकर नहीं हैं. आकाश, ईशा और अनंत अंबानी, भारत के सबसे शक्तिशाली कारोबारी साम्राज्य के तीन उत्तराधिकारी, खुद सिंगापुर से खाड़ी और फिर अमेरिका और लंदन तक यात्रा कर रहे हैं और दुनिया के सबसे बड़े निवेश फंड्स को जियो के बारे में बता रहे हैं.
वे यह ऐसे समय में कर रहे हैं जब पिछले नौ महीनों में भारत के शेयर बाजार को हर तरफ से दबाव का सामना करना पड़ा है. इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब ₹2.4 लाख करोड़ निकाले हैं, जो पूरे 2025 में उनकी कुल बिकवाली से कहीं अधिक है. रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 96 के स्तर पर है. विदेशी फंड लगातार 330 से अधिक कारोबारी सत्रों से Nifty फ्यूचर्स में नेट शॉर्ट हैं, जो रिकॉर्ड में सबसे लंबी ऐसी अवधि है. मंदड़ियों ने अपनी पोजीशन बनाई है, विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है और बाजार गिरा है. अब भारत का सबसे बड़ा IPO इसके बीच में सीधे प्रवेश कर रहा है.
और Jio सिर्फ बम नंबर 1 है.
बम नंबर 2 वॉशिंगटन में है.
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल इस सप्ताह 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका जा रहे हैं और उनके सिर पर एक समयसीमा चल रही है. 18 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर किए, जो उन्हें रूस से तेल खरीदने वाले सबसे बड़े खरीदारों, जिसमें भारत भी शामिल है, पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की शक्ति देता है. 30 दिन की समयसीमा 18 अक्टूबर को खत्म होने के बाद अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को टैरिफ पर फैसला करना होगा. इस समयसीमा ने धीमी गति से चल रही बातचीत को एक दौड़ में बदल दिया है और बातचीत से परिचित लोगों के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बातचीत शुरू होने के बाद किसी भी समय की तुलना में अब अंतिम चरण के करीब है.
बातचीत में सीधे तौर पर शामिल लोगों के मुताबिक, व्यापक समझौता प्रभावी रूप से हो चुका है और दोनों पक्ष अब अंतिम रूप दे रहे हैं. भारत और अमेरिका सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर एकमत हैं: भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों, टेक्सटाइल में बांग्लादेश और मैन्युफैक्चरिंग में चीन तथा वियतनाम की तुलना में बेहतर प्रतिस्पर्धी टैरिफ दर मिलेगी. वॉशिंगटन ने नई दिल्ली की इस प्रमुख मांग पर भी सहमति जताई है कि समझौता टिकाऊ होना चाहिए. आसान शब्दों में, समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इसकी शर्तों में बार-बार बदलाव नहीं होना चाहिए, ताकि भारतीय निर्यातकों को व्हाइट हाउस की हर नई टैरिफ घोषणा के साथ अनिश्चितता का सामना न करना पड़े.
अगर समझौता होता है, तो यह ऐसे बाजार में नहीं आएगा जो जश्न मना रहा हो. यह ऐसे बाजार में आएगा जो अच्छी खबर के लिए बेताब है और यही आने वाले हफ्तों को असाधारण बनाता है. यह एक ट्रिगर नहीं है और न ही बाजार से जुड़ी सामान्य खबरों के दो हिस्से हैं. यह लगभग एक साथ अंबानी और ट्रंप का ऐसे बाजार में आना है, जहां शॉर्ट पोजीशन बहुत ज्यादा है. जियो वैश्विक निवेशकों को फिर से बाजार में ला सकता है. एक व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए टैरिफ की कहानी को बदल सकता है. और शॉर्ट सेलर्स पहले से उसी जगह बैठे हैं, जहां उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है.
बाजार किसी अफवाह को नजरअंदाज कर सकता है. वह ₹13 लाख करोड़ के IPO को नजरअंदाज नहीं कर सकता. वह अमेरिकी व्यापार समझौते को नजरअंदाज नहीं कर सकता. और निश्चित तौर पर दोनों के एक साथ आने को नजरअंदाज नहीं कर सकता. Nifty का प्राइस-टू-बुक 2.75 है, जो 2020 के बाद सबसे निचला स्तर है. प्राइस-टू-अर्निंग्स 19.26 पर निचले स्तर के करीब है.
दोनों प्रक्रियाओं के करीब लोगों का मानना है कि यह संयोजन बाजार की धारणा में वर्षों में देखी गई सबसे बड़ी रिकवरी को जन्म दे सकता है. बाजार ने 2026 में भारत से दूरी बनाई है. अब भारत के पास पैसे को वापस बुलाने के दो बड़े कारण हैं और दोनों दिवाली के दीये जलने से पहले आने वाले हैं.
अंबानी बम
जियो का रोडशो पहले ही शुरू हो चुका है और जिस पैमाने पर इसे पेश किया जा रहा है, उसे समझना भी मुश्किल है. जियो प्लेटफॉर्म्स को 28 अगस्त को SEBI की मंजूरी मिल गई थी, जिसमें 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की अनुमति है और बैंकरों को उम्मीद है कि इससे करीब ₹37,800 करोड़ जुटाए जाएंगे. इससे 2024 में Hyundai Motor India द्वारा बनाए गए करीब ₹27,870 करोड़ के रिकॉर्ड को तोड़ा जा सकेगा और यह NSE की ओर से तैयार किए जा रहे ₹31,000 करोड़ के इश्यू से भी बड़ा होगा. प्राप्त राशि में से करीब ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए किया जाएगा.
योजना से परिचित लोगों का हवाला देते हुए आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस प्राइस बैंड पर चर्चा हो रही है वह करीब ₹1,350 से ₹1,450 प्रति शेयर है. इससे जियो का पोस्ट-इश्यू वैल्यूएशन बैंड के निचले स्तर पर करीब ₹12.4 लाख करोड़ और ऊपरी स्तर पर ₹13.4 लाख करोड़ हो जाता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू करीब ₹17.3 लाख करोड़ है, जिसका मतलब है कि जियो अपने पैरेंट की करीब तीन-चौथाई वैल्यू के साथ ही एक्सचेंज पर आ जाएगा.
बच्चा पैरेंट से बड़ा हो सकता है
और जियो बाजार में सिर्फ एक और टेलीकॉम स्टॉक के रूप में नहीं आ रहा है. यह दुनिया का एकमात्र ऑपरेटर है जिसके पास अपनी एंड-टू-एंड 5G टेक्नोलॉजी स्टैक है, जिसे 6,817 पेटेंट आवेदनों का समर्थन प्राप्त है. इसके 524 मिलियन ग्राहक हैं, जिनमें से 268 मिलियन 5G पर हैं. चीन के बाहर किसी एक देश में यह सबसे बड़ा 5G बेस है. यह JioAICloud चलाता है, रिलायंस जामनगर में गीगावाट स्तर के AI डेटा सेंटर बना रहा है और जियो भारत के लिए एक सॉवरेन लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन की संभावना का आकलन कर रहा है. FY26 में इसने ₹1,49,759 करोड़ के राजस्व पर ₹30,053 करोड़ का मुनाफा कमाया, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन 50 फीसदी से अधिक रहा. इसलिए बाजार जियो की जो कीमत तय करेगा, वह सिर्फ IPO की कीमत नहीं होगी. यह इस बात पर दुनिया का फैसला होगा कि अंबानी के डिजिटल साम्राज्य की कीमत कितनी है.
इस बार अंबानी के बच्चे निवेशकों के सामने खड़े हैं. जून की AGM में मुकेश अंबानी ने आकाश, ईशा और अनंत को IPO प्रक्रिया के केंद्र में रखा और घटनाक्रम से जुड़े लोगों के मुताबिक, मुकेश अंबानी और उनके लंबे समय से सहयोगी मनोज मोदी अब पीछे से पूरी प्रक्रिया को संभाल रहे हैं. खाड़ी क्षेत्र में सूत्रों के मुताबिक, इन भाई-बहनों ने अबू धाबी के Mubadala और सऊदी अरब के Public Investment Fund सहित क्षेत्र के बड़े निवेशकों से मुलाकात की है. दोनों ने 2020 में जियो की ऐतिहासिक फंडरेजिंग के दौरान इसमें निवेश किया था और दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन फंड्स ने इसमें मजबूत रुचि दिखाई है. Meta और Google से लेकर KKR, Silver Lake, Mubadala और PIF तक जियो के किसी भी प्रमुख निवेशक ने IPO में एक भी शेयर नहीं बेचने का फैसला किया है.
लिस्टिंग 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली के आसपास होने की उम्मीद है और एंकर बुक के कुछ ही हफ्तों में खुलने की संभावना है. ऐसे में अक्टूबर रिलायंस का महीना बनता नजर आ रहा है. दलाल स्ट्रीट के पुराने जानकार जानते हैं कि इसका क्या मतलब है: जब रिलायंस चलता है तो बाजार चलता है. विदेशी फंड जिन्होंने इस साल भारत से डॉलर निकाले हैं, उन्हें जियो में बोली लगाने के लिए पैसा वापस लाना होगा और यही वह फ्लो है जिसका कमजोर रुपया इंतजार कर रहा है.
एक IPO, एक उत्तराधिकार, एक ग्लोबल रोडशो, लिक्विडिटी का एक बड़ा नया स्रोत, सब एक साथ
ट्रंप बम: 30 दिनों की घड़ी
दूसरा बम वॉशिंगटन में तैयार हो रहा है और टाइमर सभी को दिखाई दे रहा है. 18 सितंबर को ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित Sanctioning Russia and Iran Act व्हाइट हाउस को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े खरीदारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का हथियार देता है और भारत सीधे इसकी जद में है. 18 अक्टूबर की समयसीमा वह तारीख है जब अमेरिका को इस शक्ति के इस्तेमाल पर फैसला करना होगा और दोनों पक्ष चाहते हैं कि इस तलवार के गिरने से पहले समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएं.
यही वजह है कि गोयल की यात्रा इतनी महत्वपूर्ण है. वह 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को मिलवॉकी में G20 Trade Ministerial में शामिल होंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. सरकार के अपने बयान के मुताबिक, लक्ष्य अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देना है. पिछले सप्ताह गोयल ने समझौते को लगभग पूरा बताया था और एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इसे 90 फीसदी से अधिक पूरा बताया. सीधे तौर पर शामिल लोगों के मुताबिक, दोनों पक्ष एकमत हैं और अमेरिकी पक्ष के साथ बैठकें अच्छी रही हैं. गोयल G20 बैठक के दौरान संवेदनशील वीजा मुद्दे को भी उठा सकते हैं, जबकि भारत वॉशिंगटन से इस बात की प्रतिबद्धता मांग रहा है कि समझौता कायम रहेगा और बाद में इसे वापस नहीं लिया जाएगा.
सूत्रों से सामने आने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि भारत को अपने प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर पसंदीदा टैरिफ दर मिलेगी: टेक्सटाइल में बांग्लादेश और मैन्युफैक्चरिंग में चीन तथा वियतनाम से बेहतर, 24 जुलाई से लागू Section 301 शुल्क के तहत भारत पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क है, जो बांग्लादेश के बराबर है. बांग्लादेश को टेक्सटाइल कोटा में राहत भी मिलती है, जबकि वियतनाम और चीन पर 12.5 फीसदी शुल्क है और चीन पर इसके अलावा पुराने Section 301 शुल्क भी लागू हैं. अगर समझौते के बाद भारत इन तीनों से नीचे आ जाता है तो भारतीय टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स को ऐसे बाजार में कीमत का फायदा मिलेगा, जिसने 2025 में भारत से 103.8 अरब डॉलर का सामान खरीदा था.
18 सितंबर: कानून पर हस्ताक्षर, 18 अक्टूबर: समयसीमा, 3 नवंबर: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव, 8 नवंबर: दिवाली
एक ऐसा समझौता जिसमें सभी जीतते हैं
इस समझौते के पिछले झूठे संकेतों की तुलना में अधिक संभावित होने की वजह यह है कि दोनों नेताओं को इसकी जरूरत है और अभी जरूरत है. 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के साथ ट्रंप मतदाताओं के सामने एक बड़ी व्यापारिक जीत पेश करना चाहते हैं और वह दावा कर सकेंगे कि रूस प्रतिबंध कानून की तलवार ने भारत को बातचीत की मेज पर ला दिया. भारत में मोदी सरकार देश को बता सकेगी कि किसानों या डेयरी पर समझौता किए बिना भारत ने चीन, वियतनाम और बांग्लादेश से बेहतर टैरिफ दर हासिल की है, जिससे यह एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी समझौता बनता है. जब दोनों पक्षों को एक ही हेडलाइन की इतनी जरूरत होती है, तो वह हेडलाइन आमतौर पर सामने आ जाती है.
330 दिनों के शॉर्ट्स
विदेशी संस्थागत निवेशक 13 मई 2025 से हर एक कारोबारी दिन Nifty इंडेक्स फ्यूचर्स में नेट शॉर्ट रहे हैं. यह 330 से अधिक सत्रों की अवधि है और पिछले रिकॉर्ड से दोगुने से भी अधिक है. उनका लॉन्ग रेशियो घटकर करीब 11 फीसदी रह गया है, यानी हर एक लॉन्ग के मुकाबले करीब नौ शॉर्ट बेट हैं. सोमवार को उनके पास करीब 3.12 लाख इंडेक्स फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की नेट शॉर्ट पोजीशन थी. मार्केट टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि लॉट साइज के हिसाब से समायोजित करने पर यह अब तक की सबसे बड़ी पोजीशन है. सितंबर के पहले 11 कारोबारी सत्रों में ही विदेशी निवेशकों ने इंडेक्स फ्यूचर्स में ₹14,477 करोड़ की बिकवाली की.
इसके बावजूद बाजार नहीं टूटा, क्योंकि घरेलू संस्थानों ने विदेशी निवेशकों की लगभग पूरी बिकवाली को सोख लिया. 1 से 25 सितंबर के बीच घरेलू फंड्स ने ₹52,617 करोड़ के शेयर खरीदे, जो विदेशी बिकवाली से करीब तीन गुना अधिक है. इस दौरान भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी घटकर करीब 14.7 फीसदी रह गई, जो 14 वर्षों का निचला स्तर है. न तो बाजार में पूरी तरह बिकवाली हुई है और न ही जबरन शॉर्ट कवरिंग, जिसका मतलब है कि शॉर्ट पोजीशन अभी भी मजबूती से बनी हुई हैं. इतनी ज्यादा भीड़ वाली पोजीशन को खत्म होने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत नहीं है. इसे एक ट्रिगर की जरूरत है और अक्टूबर एक साथ दो ट्रिगर दे सकता है.
टैक्स के वाइल्ड कार्ड
एक और कार्ड टैक्स का है और यह सभी में सबसे बड़ा हो सकता है. सरकार के सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली इक्विटी मार्केट टैक्स में बदलाव पर विचार कर रही है. Securities Transaction Tax और Long-Term Capital Gains में बड़े बदलाव पर विचार किया जा रहा है. घोषणा फरवरी 2027 के बजट में या उससे पहले भी हो सकती है. इसकी तैयारी पहले से की जा रही है. अगस्त में सरकार और SEBI ने विदेशी फंड्स के साथ बैठक की थी, जिसमें उन्होंने लिस्टेड शेयरों पर LTCG खत्म करने और STT कम करने की मांग की थी. जून में सरकार ने बजट का इंतजार नहीं किया और एक अध्यादेश के जरिए सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों के लिए कैपिटल गेन और विदहोल्डिंग टैक्स खत्म कर दिया, जिसका स्पष्ट उद्देश्य डॉलर आकर्षित करना और रुपये को समर्थन देना था. भारी उधारी के चलते सरकार कमजोर रुपये का जोखिम नहीं उठा सकती और इक्विटी टैक्स में राहत बचा हुआ सबसे स्पष्ट विकल्प है. अगर यह कदम आता है तो यह एक दशक में भारतीय शेयरों के लिए सबसे मजबूत संरचनात्मक तेजी का आधार हो सकता है.
दिवाली का फैसला
2026 के अधिकांश समय में भारत वह बाजार रहा है जिसे दुनिया शॉर्ट करना पसंद करती रही है. Nifty सितंबर 2024 के शिखर से करीब 13 फीसदी नीचे है, विदेशी पूंजी रिकॉर्ड गति से बाहर गई है और रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में रहा है. यही वजह है कि आने वाले कुछ सप्ताह इतने महत्वपूर्ण हैं. जब पोजीशन इतनी एकतरफा हो, तो बाजार को दस चीजों के सही होने की जरूरत नहीं होती. उसे एक ही समय में कुछ बड़ी चीजों के सही होने की जरूरत होती है.
जोखिम वास्तविक हैं, व्यापार वार्ता पहले भी कई बार अंतिम चरण के करीब पहुंचकर अटक चुकी है, जियो का प्राइस बैंड और तारीखें अभी औपचारिक रूप से घोषित नहीं हुई हैं और ईरान वार्ता सार्वजनिक रूप से अभी भी गतिरोध में है.
लेकिन कैलेंडर शायद ही कभी इस तरह एक साथ आया हो: इस सप्ताह गोयल अमेरिका में हैं, 18 अक्टूबर को रूस प्रतिबंधों की समयसीमा है, इसके बाद आने वाले हफ्तों में जियो की एंकर बुक, 3 नवंबर को अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और धनतेरस तथा दिवाली के आसपास जियो की लिस्टिंग
एक बम मुंबई से आ रहा है और दूसरा वॉशिंगटन से. अगर दोनों समय पर फटते हैं, तो संवत 2083 की शुरुआत उस धमाके के साथ हो सकती है जिसका दलाल स्ट्रीट पूरे साल इंतजार कर रहा है.
(यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और निवेश सलाह नहीं है. IPO से जुड़ी जानकारी, जिसमें प्राइस बैंड और तारीखें शामिल हैं, कंपनी के अंतिम ऑफर दस्तावेजों के अधीन हैं.)
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
टैग्स