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अडानी ग्रुप को सेबी से बड़ी राहत, MPS मामले में 4 कंपनियों ने ₹1.48 करोड़ में किया सेटलमेंट
अडानी ग्रुप से जुड़े मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 28 सितंबर को दो अहम आदेश जारी किए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
अडानी ग्रुप से जुड़े मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) मामले में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 28 सितंबर को दो अहम आदेश जारी किए. एक सेटलमेंट ऑर्डर के तहत अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस समेत संबंधित पक्षों ने कुल ₹1.48 करोड़ का भुगतान कर कार्यवाही का निपटारा किया. वहीं, एक अलग फाइनल ऑर्डर में विनोद अडानी समेत 12 लोगों के खिलाफ MPS नियमों के उल्लंघन और फ्रॉड्यूलेंट ट्रेड प्रैक्टिस से जुड़े आरोप स्थापित नहीं पाए गए.
चार कंपनियों से जुड़ा था मामला
SEBI के सेटलमेंट ऑर्डर में अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पावर, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और अडानी ट्रांसमिशन, जिसे अब अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के नाम से जाना जाता है, से जुड़ी कार्यवाही शामिल थी. मामले में ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और अन्य निदेशकों समेत कई लोगों का नाम भी शामिल था. मामला मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन से संबंधित था. भारतीय शेयर बाजार के नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों के लिए न्यूनतम 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखना जरूरी है.
SEBI के मुताबिक, इस मामले में 2020 में शिकायतें मिली थीं और इसके बाद नियामक ने जांच शुरू की थी. बाद में सितंबर 2024 में कारण बताओ नोटिस और मार्च 2025 में सप्लीमेंट्री नोटिस जारी किया गया.
क्या था आरोप?
मामले में आरोप था कि दो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) EIFF यानी Emerging India Focus Fund और EM Resurgent Fund ने अडानी ग्रुप की चार कंपनियों में निवेश किया था. जांच के दौरान यह सवाल उठा कि क्या इन निवेशों को वास्तव में सार्वजनिक शेयरहोल्डिंग माना जा सकता है या इन पर प्रमोटर ग्रुप से जुड़े व्यक्तियों का प्रभावी नियंत्रण था.
SEBI के आरोपों के मुताबिक, निवेश संरचना के जरिए करीब ₹1,984 करोड़ का अनुचित लाभ हासिल किए जाने का दावा किया गया था. मामले में Opal से जुड़े निवेश की भी जांच की गई थी.
विनोद अडानी पर क्या कहा SEBI ने?
अलग फाइनल ऑर्डर में SEBI ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह साबित नहीं हुआ कि विनोद अडानी का EIFF और EM Resurgent Fund पर प्रभावी नियंत्रण था. इसी वजह से MPS नियमों के उल्लंघन और फ्रॉड्यूलेंट ट्रेड प्रैक्टिस से जुड़े आरोप स्थापित नहीं पाए गए. SEBI ने यह भी कहा कि संबंधित विदेशी निवेशकों के निवेश को केवल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग मानने का पर्याप्त आधार नहीं मिला.
इस महीने अडानी ग्रुप से जुड़े कई आदेश
SEBI की वेबसाइट के मुताबिक, सितंबर 2026 में अडानी ग्रुप से संबंधित कई आदेश जारी हुए हैं. 22 सितंबर को भी अडानी ग्रुप से जुड़ा एक सेटलमेंट ऑर्डर जारी किया गया था, जबकि 28 सितंबर को MPS मामले में सेटलमेंट ऑर्डर और अलग फाइनल ऑर्डर दोनों सूचीबद्ध किए गए.
इस तरह 28 सितंबर के दोनों आदेशों में कार्रवाई की प्रकृति अलग है. एक मामले में संबंधित पक्षों ने सेटलमेंट के जरिए कार्यवाही का निपटारा किया है, जबकि दूसरे में नियामक ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को स्थापित नहीं पाया.
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