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घरेलू फंडामेंटल मजबूत, लेकिन ग्लोबल दबाव बढ़ा; शेयर बाजार पर मोतीलाल ओसवाल का न्यूट्रल रुख
घरेलू अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई में सुधार के बावजूद कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, ऊंची ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और सख्त मौद्रिक परिस्थितियां शेयर बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव डाल सकती हैं. मोतीलाल ओसवाल ने इक्विटी पर न्यूट्रल रुख बरकरार रखते हुए मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों को प्राथमिकता दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
भारत के शेयर बाजार के सामने मजबूत घरेलू फंडामेंटल और चुनौतीपूर्ण वैश्विक मैक्रो माहौल के बीच खींचतान बढ़ रही है. मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ के मुताबिक, आर्थिक विकास और कॉरपोरेट कमाई में तेजी आई है, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और मौद्रिक परिस्थितियों के सख्त होने से शेयरों के वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है.
100 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
वेल्थ मैनेजमेंट फर्म के मुताबिक, सितंबर में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई. वहीं, प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड की यील्ड कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को अपनी पॉलिसी रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 3.75-4 फीसदी कर दिया. 2023 के बाद यह फेड की पहली दर वृद्धि थी. अमेरिका में महंगाई अभी भी फेड के 2 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है.
भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत
वैश्विक दबावों के बावजूद भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद यानी Real GDP की वृद्धि दर सालाना आधार पर बढ़कर 7.8 फीसदी हो गई. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, खपत, निवेश और सर्विसेज सेक्टर का योगदान रहा. इस दौरान निजी खपत में 7.1 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि सकल स्थिर पूंजी निर्माण यानी Gross Fixed Capital Formation 11.9 फीसदी बढ़ा.
कॉरपोरेट कमाई में भी सुधार
कंपनियों की कमाई के मोर्चे पर भी सुधार देखने को मिला है. पहली तिमाही में Nifty 50 कंपनियों का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 18 फीसदी बढ़ा. वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की कमाई उम्मीदों से बेहतर बनी रही. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) यूनिवर्स में अपग्रेड और डाउनग्रेड का अनुपात 1.5 गुना रहा. यह पिछले 22 तिमाहियों में सबसे ऊंचा स्तर है.
मजबूत कमाई से बाजार का री-रेटिंग जरूरी नहीं
हालांकि, फर्म ने सावधान किया है कि कंपनियों की कमाई में सुधार अपने आप पूरे बाजार के वैल्यूएशन में व्यापक री-रेटिंग में तब्दील नहीं हो सकता. घरेलू निवेश का मजबूत प्रवाह लगातार बढ़ रही इक्विटी सप्लाई में समाहित हो रहा है.
IPO, ब्लॉक और बल्क डील, प्रमोटर सेल और अन्य लेनदेन के जरिए बाजार में शेयरों की आपूर्ति बढ़ रही है. वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अगस्त के बीच केवल IPO के जरिए करीब ₹46,000 करोड़ जुटाए गए. इसके अलावा नए इश्यू की संभावित पाइपलाइन भी काफी बड़ी है. मोतीवाल ओसवाल के मुताबिक, बढ़ती इक्विटी सप्लाई और ऊंचे वैल्यूएशन के इस माहौल में शेयर और सेक्टर का चयन पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है.
इक्विटी पर न्यूट्रल रुख, मिडकैप-स्मॉलकैप पसंद
फर्म ने इक्विटी पर अपना न्यूट्रल रुख बरकरार रखा है और मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों को प्राथमिकता दी है. Nifty 50 फिलहाल अगले 12 महीनों की अनुमानित कमाई के मुकाबले 18.3 गुना के वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है. यह उसके 20.9 गुना के ऐतिहासिक औसत से करीब 12 फीसदी कम है.
दूसरी ओर, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अपने 10 साल के औसत से अभी भी प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, हालांकि सितंबर 2024 के स्तर की तुलना में यह प्रीमियम कम हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में बाजार न तो इतना सस्ता है कि आक्रामक खरीदारी की जरूरत हो और न ही इतना महंगा है कि पूरी तरह सतर्क रुख अपनाया जाए. ऐसे में व्यापक बाजार के बजाय अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है.
फिक्स्ड इनकम में 'Higher for Longer' यील्ड का अनुमान
फिक्स्ड इनकम के मोर्चे पर मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ का अनुमान है कि लंबे समय तक ऊंची ब्याज दर और यील्ड नया सामान्य स्तर बन सकता है. भारत की 10 साल की सरकारी सिक्योरिटी की यील्ड करीब 7 फीसदी की ओर बढ़ी है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, वैश्विक मौद्रिक नीति के सख्त होने की उम्मीदों और महंगाई के जोखिम के बीच यील्ड कर्व में भी तेजी आई है.
फर्म अवधि आधारित रणनीति के बजाय एक्यूरल स्ट्रेटर्जीज को प्राथमिकता दे रही है. इसमें Private Credit, High-Yield Non-Convertible Debentures (NCDs) और Infrastructure Investment Trusts (InvITs) जैसे आय देने वाले एसेट शामिल हैं.
सोने को चांदी पर प्राथमिकता
कीमती धातुओं पर फर्म का कुल रुख Neutral है, लेकिन वह सोने को चांदी की तुलना में प्राथमिकता देती है. अगस्त में सोने की कीमत अमेरिकी डॉलर में 13 फीसदी बढ़कर करीब 4,563 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई. इसी दौरान ग्लोबल गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में करीब 18 अरब डॉलर का निवेश आया. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी सोने के लिए एक संरचनात्मक समर्थन बनी हुई है. चीन ने अगस्त में 20 टन सोना खरीदा और लगातार 22वें महीने अपनी खरीदारी जारी रखी.
'चयनात्मक निवेश पर ध्यान जरूरी'
मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर संदीपन रॉय ने कहा कि वैश्विक जोखिमों और भारत के घरेलू फंडामेंटल के बीच अंतर बढ़ने से निवेश में चयनात्मकता का महत्व बढ़ गया है. उन्होंने कहा कि खपत, मैन्युफैक्चरिंग और निवेश में वृद्धि व्यापक हो रही है और कंपनियों की कमाई के अनुमान में भी सुधार हो रहा है. ऐसे में बाजार में निवेश बढ़ाने के बजाय सही सेक्टर और कंपनियों का चयन अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है.
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