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टाटा संस के पुनर्गठन की तैयारी, NBFC और CIC ढांचे से बाहर निकलने की योजना
टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव रखा है. पुनर्गठन के बाद टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी के रूप में बनाए रखने का रास्ता साफ हो सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 56 minutes ago
टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के पुनर्गठन की योजना सामने आई है. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव रखा है. प्रस्तावित विलय के बाद टाटा संस के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी यानी एनबीएफसी या कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी यानी सीआईसी के रूप में वर्गीकृत होने की स्थिति खत्म हो सकती है.
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. ट्रस्ट्स ने इस प्रस्ताव पर विचार और मंजूरी के लिए टाटा संस के निदेशक मंडल को पत्र भेजा है. प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले टाटा संस को भारतीय रिजर्व बैंक से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा.
1.05 लाख करोड़ रुपये का होगा परिचालन राजस्व
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, पुनर्गठित इकाई का 31 मार्च 2026 तक परिचालन राजस्व 1,05,043 करोड़ रुपये था, जबकि वित्तीय परिसंपत्तियों से आय 40,072 करोड़ रुपये थी. इस तरह संयुक्त इकाई की कुल आय में परिचालन राजस्व की हिस्सेदारी 64.3 फीसदी होगी.
ट्रस्ट्स का कहना है कि इन आंकड़ों के आधार पर पुनर्गठित इकाई एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत होने के लिए जरूरी प्रमुख कारोबारी मानदंडों को पूरा नहीं करेगी. साथ ही, यह कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी पर लागू शर्तों के दायरे में भी नहीं आएगी.
प्रस्ताव के अनुसार, पुनर्गठित इकाई की कुल शुद्ध परिसंपत्तियां 2,00,158 करोड़ रुपये होंगी. इनमें समूह की कंपनियों में 1,77,120 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है. ट्रस्ट्स के मुताबिक, समूह की कंपनियों में निवेश कुल शुद्ध परिसंपत्तियों के 90 फीसदी से कम रहेगा.
भारतीय रिजर्व बैंक से लेनी होगी मंजूरी
प्रस्तावित विलय को भारतीय रिजर्व बैंक के 2025 के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के स्वैच्छिक विलय संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. इसके तहत केंद्रीय बैंक से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा.
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, पुनर्गठन के बाद टाटा संस के कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में योग्य नहीं रहने की स्थिति में उसे अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र भी वापस करना होगा.
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह टाटा संस के साथ मिलकर भारतीय रिजर्व बैंक के साथ प्रस्तावित पुनर्गठन और इससे जुड़ी नियामकीय जरूरतों पर बातचीत करेगा. टाटा संस के निदेशक मंडल को भी विलय और नियामकीय प्रक्रिया के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे.
टाटा संस के पुराने कारोबारी मॉडल की वापसी
टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित ढांचा टाटा संस के उस कारोबारी मॉडल को फिर से स्थापित करेगा, जिसे कंपनी ने अपने इतिहास के बड़े हिस्से में अपनाया था. कंपनी के करीब 100 साल के इतिहास में लगभग 80 वर्षों तक टाटा संस के पास परिचालन कारोबार और उनसे होने वाला राजस्व था. इस राजस्व का इस्तेमाल टाटा समूह के नए कारोबारों को विकसित करने में किया जाता था.
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज भी 2004 में अलग सहायक कंपनी के रूप में अलग होने से पहले टाटा संस का एक कारोबारी प्रभाग थी. इसके अलावा कई अन्य परिचालन कारोबार भी पहले टाटा संस का हिस्सा रहे थे और बाद में उन्हें अलग सहायक कंपनियों में बदल दिया गया.
प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद टाटा संस के पास फिर से अपने परिचालन कारोबार और उनसे होने वाला राजस्व होगा, जबकि वह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की भूमिका भी निभाता रहेगा.
टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध रखने की योजना
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि यह प्रस्ताव सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के निदेशक मंडल द्वारा जुलाई 2025 में पारित सर्वसम्मत प्रस्तावों के अनुरूप भी है. इन प्रस्तावों के तहत टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाने थे. ट्रस्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ढांचा टाटा समूह के मौजूदा संगठनात्मक मॉडल को बनाए रखते हुए उसे दीर्घकालिक रणनीतिक पहलों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा
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