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UPI चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट की तत्काल रोक से इनकार, केंद्र-NPCI से 4 हफ्ते में मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित चार्ज व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं है. इस मामले में अदालत ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर लगाए जाने वाले शुल्क की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 57 minutes ago
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित चार्ज के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार, यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का मतलब है कि फिलहाल 15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित चार्ज व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं है. इस मामले में अदालत ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर लगाए जाने वाले शुल्क की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की.
96 फीसदी लेनदेन पर नहीं लगेगा चार्ज
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमन ने अदालत को बताया कि नई व्यवस्था के तहत 96 फीसदी लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. जरूरी सेवाओं से जुड़े कुछ भुगतानों के लिए चार्ज की अधिकतम सीमा 5 रुपये तय की गई है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित चार्ज न तो कर है और न ही सरकारी शुल्क. सरकार को इन चार्ज से कोई राशि नहीं मिलेगी. उनके अनुसार, यह भुगतान एग्रीगेटर और बैंकों के बीच लगने वाला निपटान शुल्क है.
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में सरकार से हलफनामे के जरिए विस्तृत जानकारी मांगी. पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं.
2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर प्रस्तावित है 0.4% शुल्क
एनपीसीआई ने 15 अक्टूबर से चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर व्यापारी छूट दर यानी एमडीआर लागू करने का फैसला किया है. इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 फीसदी शुल्क प्रस्तावित है. 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है.
हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा. सरकार का कहना है कि इस बदलाव से करीब 96 फीसदी व्यापारी लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे.
छोटे दुकानदारों को शुल्क से छूट
नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए भी राहत का प्रावधान है. यूपीआई क्यूआर के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसके अलावा रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क प्रस्तावित किया गया है.
याचिका में क्या है चुनौती?
सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी यूपीआई भुगतानों पर शुल्क लगाने के फैसले को चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि शून्य-शुल्क व्यवस्था में बदलाव पर्याप्त कानूनी आधार, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना किया गया है. याचिका में जनवरी 2020 से लागू शून्य-शुल्क व्यवस्था में बदलाव को भी चुनौती दी गई है.
अब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. फिलहाल अदालत ने प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है. मामले की अगली सुनवाई संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद होगी.
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