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तेलंगाना-आंध्र प्रदेश में बढ़ा MF निवेश, AUM 2.95 लाख करोड़ रुपये पहुंचा; 25% निवेशक महिलाएं
देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 2.5 फीसदी रही. राज्य में कुल फोलियो की संख्या 82.24 लाख रही, जो देशभर के कुल म्युचुअल फंड फोलियो का करीब 2.9 फीसदी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश म्युचुअल फंड निवेश के तेजी से बढ़ते बाजार के रूप में उभर रहे हैं. जुलाई 2026 तक दोनों राज्यों का कुल म्युचुअल फंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. खास बात यह है कि दोनों राज्यों में म्युचुअल फंड निवेशकों में करीब 25 फीसदी महिलाएं हैं. वहीं, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए नियमित निवेश की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है.
तेलंगाना का एयूएम 19 फीसदी बढ़ा
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (MFs) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में तेलंगाना का म्युचुअल फंड एयूएम 2,12,856 करोड़ रुपये रहा. जुलाई 2025 की तुलना में इसमें 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेलंगाना एयूएम के मामले में आठवें स्थान पर रहा.
देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में तेलंगाना की हिस्सेदारी करीब 2.5 फीसदी रही. राज्य में कुल फोलियो की संख्या 82.24 लाख रही, जो देशभर के कुल म्युचुअल फंड फोलियो का करीब 2.9 फीसदी है.
आंध्र प्रदेश में 23 फीसदी बढ़ा एयूएम
आंध्र प्रदेश में जुलाई 2026 में म्युचुअल फंड एयूएम 82,409 करोड़ रुपये रहा. एक साल पहले के मुकाबले इसमें 23 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1 फीसदी रही. एयूएम के मामले में आंध्र प्रदेश देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 15वें स्थान पर रहा. राज्य में म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या 79.44 लाख को पार कर गई.
हैदराबाद में तेलंगाना के एयूएम का 87 फीसदी
तेलंगाना में म्युचुअल फंड निवेश का सबसे बड़ा केंद्र हैदराबाद बना हुआ है. जुलाई में शहर का म्युचुअल फंड एयूएम 1,84,261 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल एयूएम का करीब 87 फीसदी है. एक साल में हैदराबाद के एयूएम में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
देश के शीर्ष 30 शहरों में हैदराबाद एयूएम के मामले में आठवें स्थान पर रहा. देश के कुल म्युचुअल फंड एसेट्स में शहर की हिस्सेदारी 2.10 फीसदी रही. हैदराबाद में म्युचुअल फंड फोलियो की संख्या 54.44 लाख रही, जो तेलंगाना के कुल फोलियो का 66.2 फीसदी है.
विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा भी आगे
आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम म्युचुअल फंड निवेश के मामले में सबसे आगे रहा. जुलाई में शहर का एयूएम 16,614 करोड़ रुपये रहा. इसके बाद विजयवाड़ा 8,337 करोड़ रुपये के एयूएम के साथ दूसरे स्थान पर रहा.
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि आंध्र प्रदेश में म्युचुअल फंड निवेश केवल एक शहर तक सीमित नहीं है और राज्य के प्रमुख शहरों में इसकी पहुंच बढ़ रही है.
एसआईपी के जरिए बढ़ रहा नियमित निवेश
दोनों राज्यों में एसआईपी के जरिए निवेश भी बढ़ रहा है. तेलंगाना में एसआईपी एयूएम 47,975 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल म्युचुअल फंड एयूएम का करीब 22 फीसदी है. राज्य में एसआईपी फोलियो की संख्या 26.09 लाख से ज्यादा रही.
आंध्र प्रदेश में एसआईपी एयूएम 26,820 करोड़ रुपये रहा, जो राज्य के कुल एयूएम का करीब 32 फीसदी है. यहां एसआईपी फोलियो की संख्या 26.47 लाख रही.
महिलाओं की भागीदारी करीब 25 फीसदी
म्युचुअल फंड निवेश में महिलाओं की भागीदारी भी दोनों राज्यों में उल्लेखनीय है. तेलंगाना में 19.60 लाख से ज्यादा विशिष्ट निवेशक हैं, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 24.42 फीसदी है. आंध्र प्रदेश में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 20.94 लाख रही. इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी 23.60 फीसदी है. देशभर में म्युचुअल फंड के विशिष्ट निवेशकों में महिलाओं की हिस्सेदारी 26.74 फीसदी है.
आर्थिक आधार से भी निवेश को मिल रहा समर्थन
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में म्युचुअल फंड निवेश बढ़ने के पीछे दोनों राज्यों की आर्थिक गतिविधियों और आय के आधार का भी योगदान है. वित्त वर्ष 2025-26 में तेलंगाना की जीडीपी 17.82 लाख करोड़ रुपये रही, जो भारत की कुल जीडीपी का करीब 5 फीसदी है. वहीं, आंध्र प्रदेश की जीडीपी 17.62 लाख करोड़ रुपये रही, जो देश की कुल जीडीपी का करीब 4.9 फीसदी है.
एम्फी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट एन. चलसानी ने कहा कि दोनों राज्यों में म्युचुअल फंड में भागीदारी बढ़ रही है. उनके मुताबिक, तेलंगाना में हैदराबाद की बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है, जबकि आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा समेत कई शहरों में निवेश का दायरा बढ़ रहा है.
उन्होंने एसआईपी के बढ़ते चलन को भी महत्वपूर्ण बताया. उनके अनुसार, नियमित निवेश की बढ़ती हिस्सेदारी निवेशकों के बीच अनुशासित निवेश की प्रवृत्ति को दर्शाती है. म्युचुअल फंड में भागीदारी बढ़ने के साथ निवेशकों के लिए सही जानकारी के आधार पर फैसला लेना और लंबी अवधि का नजरिया बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है.
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