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बीमा बेचने के तरीके में बड़ा बदलाव! एजेंटों के कमीशन से लेकर मिस-सेलिंग तक IRDAI का नया प्लान

IRDAI ने सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री बनाने का प्रस्ताव भी रखा है. इसके जरिए ग्राहक बीमा उत्पाद, बीमा कंपनी और वितरक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक जगह देख सकेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

बीमा नियामक आईआरडीएआई (IREDAI) ने बीमा की बिक्री और वितरण व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. नए प्रस्तावों में पहले साल मिलने वाले ऊंचे कमीशन को कम करने, गलत तरीके से पॉलिसी बेचने पर एजेंटों की जवाबदेही तय करने, ऋण के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक और ग्राहकों को एजेंट का रिकॉर्ड देखने की सुविधा देने जैसे कदम शामिल हैं. नए नियमों को लेकर अंतिम फैसला सार्वजनिक सुझावों और मसौदा नियमों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा.

पहले साल के भारी कमीशन पर लगाम की तैयारी

भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण यानी आईआरडीएआई ने 23 सितंबर को बीमा वितरण की आर्थिक व्यवस्था में बदलाव को लेकर दो हिस्सों वाला परामर्श पत्र जारी किया है. इसमें बीमा कंपनियों की वितरण लागत, कमीशन और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव है.

आईआरडीएआई के चेयरमैन अजय सेठ ने कहा है कि बीमा में गलत बिक्री की एक बड़ी वजह पहले साल मिलने वाला ऊंचा कमीशन है. उनके मुताबिक, नए कारोबार पर पहले साल एजेंट का कमीशन 40 से 50 फीसदी तक हो सकता है, जबकि पॉलिसी के जारी रहने से जुड़ा प्रोत्साहन अपेक्षाकृत कम होता है. इससे बिक्री पर ज्यादा जोर पड़ने की आशंका रहती है.

प्रस्तावित व्यवस्था में पहले साल के कमीशन को कम करने और पॉलिसी के नवीनीकरण के साथ कमीशन का अधिक हिस्सा देने की दिशा में बदलाव सुझाया गया है. इसका उद्देश्य केवल बिक्री पर ध्यान देने के बजाय पॉलिसी को जारी रखने और ग्राहक के लिए उपयुक्त बीमा उत्पाद बेचने पर जोर देना है.

ग्राहकों को मिल सकता है एजेंट का रिकॉर्ड देखने का अधिकार

आईआरडीएआई ने सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री बनाने का प्रस्ताव भी रखा है. इसके जरिए ग्राहक बीमा उत्पाद, बीमा कंपनी और वितरक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एक जगह देख सकेंगे. अजय सेठ के मुताबिक, ग्राहकों को अपने बीमा उत्पाद, बीमा कंपनी और बीमा वितरक के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का विचार है. इसमें उत्पादों की उपलब्धता और प्रदर्शन, बीमा कंपनी या वितरक के खिलाफ शिकायतों तथा दावों के निपटारे से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है.

प्रस्ताव में पॉलिसी बेचने वाले व्यक्ति की पहचान को संबंधित पॉलिसी से जोड़ने और गलत बिक्री की घटनाओं से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का भी प्रावधान सुझाया गया है. इसके अलावा, गलत बिक्री साबित होने पर एजेंट को पहले दिया गया कमीशन वापस लेने का प्रस्ताव भी है.

ऋण के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक

आईआरडीएआई ने बीमा को दूसरे वित्तीय उत्पादों के साथ जबरन जोड़ने की प्रथा पर भी सख्ती का प्रस्ताव रखा है. खासतौर पर बैंक या अन्य ऋणदाता द्वारा ऋण के साथ बीमा को अनिवार्य रूप से जोड़ने पर रोक लगाने की दिशा में नियम प्रस्तावित किए गए हैं.

अजय सेठ के मुताबिक, कोई ऋणदाता अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर जीवन बीमा की मांग कर सकता है, लेकिन उस बीमा प्रीमियम से कमीशन कमाने की उम्मीद नहीं कर सकता. हालांकि, ऐसा पैकेज जिसमें कर्ज लेने वाले और ऋणदाता दोनों के लिए स्पष्ट लाभ हो, कुछ शर्तों के साथ स्वीकार्य हो सकता है.

ऑनलाइन बीमा खरीदते समय 'डार्क पैटर्न' पर भी नजर

नए प्रस्तावों में ऑनलाइन बीमा बिक्री में इस्तेमाल होने वाले भ्रामक डिजिटल तरीकों पर भी रोक लगाने की बात कही गई है. उदाहरण के तौर पर, ग्राहक को केवल प्रीमियम की कीमत जानने के लिए मोबाइल नंबर देने के लिए मजबूर करना और उसके बाद लगातार प्रचारात्मक फोन करना चिंता का विषय माना गया है.

आईआरडीएआई का कहना है कि बीमा की कीमत और उत्पाद से जुड़ी जानकारी ग्राहकों के लिए आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए. ग्राहक को ऐसी जानकारी देने या ऐसा विकल्प चुनने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जिसे वह लेना नहीं चाहता.

बीमा कंपनियों के खर्च में भी कटौती का प्रस्ताव

आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों के प्रबंधन खर्च को भी चरणबद्ध तरीके से कम करने का प्रस्ताव रखा है. जीवन बीमा कंपनियों के लिए कंपनी स्तर पर प्रबंधन खर्च की सीमा को दो साल में 15 फीसदी और पांच साल में 12.5 फीसदी तक लाने का प्रस्ताव है. वहीं सामान्य बीमा में पांच साल में प्रबंधन खर्च की सीमा को सकल प्रत्यक्ष लिखित प्रीमियम के 20 फीसदी तक लाने का प्रस्ताव है.

अजय सेठ ने कहा है कि लागत में होने वाली बचत का लाभ पॉलिसीधारकों तक पहुंचना चाहिए. यह कम प्रीमियम, प्रीमियम बढ़ोतरी की धीमी दर, बचत आधारित बीमा उत्पादों में बेहतर रिटर्न या सामान्य बीमा में बेहतर दावा अनुपात के रूप में सामने आ सकता है.

कब लागू हो सकते हैं नए नियम?

फिलहाल ये प्रस्ताव परामर्श पत्र के स्तर पर हैं. सार्वजनिक और उद्योग से सुझाव मिलने के बाद मसौदा नियम जारी किए जाएंगे और उसके बाद अंतिम नियम अधिसूचित होंगे. अजय सेठ के अनुसार, नए ढांचे को 1 जनवरी 2027 या 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है. सार्वजनिक टिप्पणियां 25 अक्टूबर 2026 तक मांगी गई हैं.

इसलिए फिलहाल ग्राहकों के लिए ये बदलाव प्रस्तावित नियम हैं, अंतिम नियम नहीं. अंतिम व्यवस्था मसौदा और सार्वजनिक सुझावों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी.


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