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कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार में आएगी तेजी, 2030 तक ₹3.25 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान: रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक सालाना 8-10 फीसदी की दर से बढ़कर 30-35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूम एयर कंडीशनर (RAC) इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार अगले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है. BCG और CII की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक यह बाजार 3-3.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. इस बढ़ोतरी के साथ घरेलू स्तर पर पार्ट्स और मटीरियल के निर्माण में 40,000-50,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वैल्यूएडिशन का अवसर पैदा हो सकता है.
भारत अगले पांच वर्षों में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के प्रमुख वैश्विक बाजारों में सबसे तेज गति से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल रह सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती घरेलू आय, घरों में इन उत्पादों की पहुंच, सिंगल-फैमिली घरों की बढ़ती संख्या, आसान फाइनेंसिंग, व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग बाजार की वृद्धि के प्रमुख कारण होंगे.
2030 तक 8-10% सालाना बढ़ सकता है बाजार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार 2030 तक सालाना 8-10 फीसदी की दर से बढ़कर 30-35 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रूम एयर कंडीशनर (RAC) इस वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकता है.
हालांकि, रिपोर्ट ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया है. यदि देश में पार्ट्स और मटीरियल के उत्पादन की क्षमता पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ी, तो बाजार की बढ़ती मांग का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा हो सकता है.
पार्ट्स के लोकल उत्पादन में अभी बड़ा अंतर
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स और मटीरियल का घरेलू उत्पादन अलग-अलग श्रेणियों में 25 फीसदी से 70 फीसदी के बीच है. रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीविजन और एयर कंडीशनर के मामले में लोकल प्रोडक्शन का स्तर अपेक्षाकृत कम है, जबकि रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन में यह अधिक है.
2030 तक विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में लोकल प्रोडक्शन 30-80 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. रिपोर्ट ने टीवी डिस्प्ले पैनल, रूम एयर-कंडीशनर कंप्रेसर, रेफ्रिजरेटर इंसुलेशन और वॉशिंग मशीन मोटर को उन प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया है, जहां घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश है.
जिन क्षेत्रों में तकनीक कुछ चुनिंदा वैश्विक कंपनियों के पास है, वहां टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और जॉइंट वेंचर की जरूरत हो सकती है. वहीं, क्लस्टर आधारित मैन्युफैक्चरिंग से बड़े पैमाने पर उत्पादन और लागत से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है.
ग्लोबल एक्सपोर्ट में भारत की हिस्सेदारी 1% से कम
रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक दुनिया का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट 900-950 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. फिलहाल ग्लोबल ट्रेड में भारत की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है.
भारत का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स एक्सपोर्ट बढ़ रहा है, लेकिन इसकी बड़ी हिस्सेदारी पड़ोसी देशों और यूएई जैसे बाजारों तक सीमित है. बड़े वैश्विक इंपोर्ट बाजारों में भारत की मौजूदगी अभी अपेक्षाकृत कम है.
रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख एक्सपोर्टर्स की तुलना में भारत को मटीरियल लागत, बड़े पैमाने पर उत्पादन, बैकवर्ड इंटीग्रेशन और टेक्नोलॉजी के मामले में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और कंप्लायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमित उपलब्धता भी एक्सपोर्ट बढ़ाने में बाधा बनती है.
रिपोर्ट में थाईलैंड का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि ग्लोबल एयर-कंडीशनर एक्सपोर्ट में उसकी हिस्सेदारी 2010 के 16 फीसदी से बढ़कर 2025 में 22 फीसदी हो गई. इससे वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एयर-कंडीशनर एक्सपोर्टर बन गया.
R&D पर खर्च बढ़ाने की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रमुख लिस्टेड कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियां अपने रेवेन्यू का 1 फीसदी से भी कम हिस्सा रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च करती हैं. इसके मुकाबले दुनियाभर की समान कंपनियां R&D पर करीब 1-4 फीसदी खर्च करती हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने के बजाय टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर भी ध्यान देना होगा. इससे घरेलू कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति बनाने और एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
AI से बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बिजनेस लीडर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ को लेकर वैश्विक कंपनियों के मुकाबले अधिक आशावादी हैं, हालांकि वर्कफोर्स की तैयारी अभी सीमित है.
जेनरेटिव AI और एजेंटिक AI का इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर सर्विस जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, इन तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में एक्सपोर्ट का विस्तार करने में मददगार हो सकता है.
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