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भारत के 500 GW स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य के साथ जरूरी होगी ग्रिड स्थिरता की तैयारी: FICCI-Nangia
FICCI और Nangia की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ग्रिड स्थिरता से जुड़े समानांतर लक्ष्य तय करने की जरूरत है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत के 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता के लक्ष्य के साथ देश को ग्रिड स्थिरता के लिए भी स्पष्ट और समानांतर मील के पत्थर तय करने होंगे. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) और Nangia की संयुक्त रिपोर्ट में यह बात कही गई है.
‘Grid Stability in India: From Diagnostic Assessment to a Reform and Implementation Roadmap’ नाम से जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश का पावर ग्रिड छोटी क्षमता वाली, मौसम पर निर्भर और पावर-इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित बिजली उत्पादन को लगातार अधिक मात्रा में अपने नेटवर्क में शामिल कर रहा है. हालांकि, ट्रांसमिशन, एनर्जी स्टोरेज और संस्थागत क्षमता का विस्तार हर जगह इसी गति से नहीं हुआ है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ ग्रिड के संचालन और स्थिरता से जुड़ी चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं. ऐसे में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ग्रिड की तकनीकी और संस्थागत क्षमता को मजबूत करना जरूरी होगा.
ग्रिड-फॉर्मिंग टेक्नोलॉजी के लिए कानूनी ढांचा
रिपोर्ट में ग्रिड-फॉर्मिंग टेक्नोलॉजी के लिए मौजूदा कानूनी और नियामकीय ढांचे को स्पष्ट करने की सिफारिश की गई है. इसके साथ ही 50 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के लिए एक समान परिभाषा और क्षमता सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है.
रिपोर्ट में देशभर में ग्रिड स्थिरता से जुड़े कुछ न्यूनतम मानक लागू करने की भी बात कही गई है. इनमें ग्रिड इनर्शिया, फ्रीक्वेंसी में बदलाव की दर (Rate of Change of Frequency) और सिस्टम स्ट्रेंथ जैसे मानक शामिल हैं. इन मानकों को खासतौर पर उन क्षेत्रों में लागू करने की जरूरत बताई गई है जहां नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी अधिक है.
ट्रांसमिशन और भीड़ प्रबंधन पर जोर
FICCI-Nangia की रिपोर्ट में ग्रिड-एन्हांसिंग टेक्नोलॉजी और पावर ट्रांसमिशन में कंजेशन मैनेजमेंट के लिए जरूरी कॉरिडोर की पहचान का काम पूरा करने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा, बिजली उत्पादन और खपत में अंतर से जुड़े सेटलमेंट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक ढांचा बनाने का सुझाव दिया गया है.
रिपोर्ट में डिमांड फ्लेक्सिबिलिटी के लिए भी राष्ट्रीय फ्रेमवर्क तैयार करने की बात कही गई है. प्रस्तावित व्यवस्था में कुछ निश्चित मानक और पैरामीटर तय किए जाएंगे, जबकि राज्यों को इन सहमत सीमाओं के भीतर अपने स्तर पर निर्णय लेने की गुंजाइश दी जाएगी.
ग्रिड स्थिरता परियोजनाओं के लिए ब्लेंडेड फाइनेंस
रिपोर्ट में ग्रिड-फॉर्मिंग टेक्नोलॉजी और सिस्टम स्ट्रेंथ से जुड़े शुरुआती चरण या अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले प्रोजेक्ट्स के लिए ब्लेंडेड फाइनेंस की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की वित्तीय व्यवस्था नई तकनीकों और ग्रिड स्थिरता से जुड़ी परियोजनाओं में शुरुआती निवेश को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है.
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार तेजी से हो रहा है. ऐसे में 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता के लक्ष्य के साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क, स्टोरेज क्षमता, ग्रिड तकनीक और नियामकीय व्यवस्था को समान गति से विकसित करना बिजली व्यवस्था की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होगा.
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