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इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ₹23 हजार करोड़ निवेश करने की योजना, हजारों को मिलेगा रोजगार
PLI के बाद, यह स्कीम एक और महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भारतीय इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर को नई दिशा मिल सकती है और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स इंसेंटिव स्कीम (ECIS) को फाइनलाइज किया है, जिसे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को प्रोत्साहित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से पेश किया गया है. सरकार ने इस स्कीम के लिए अगले छह सालों में 23 हजार करोड़ रुपये का बजट तय किया है, जिससे लगभग 93 हजार लोगों को नौकरियां मिलने की उम्मीद है. तो आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
सरकार का निवेश प्लान
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर को बूस्ट देने के लिए एक व्यापक निवेश योजना बनाई है. इसके तहत, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 23 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. इससे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के उत्पादन में वृद्धि होगी और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे. इस स्कीम से जुड़े प्रमुख सेक्टरों में डिस्प्ले मॉड्यूल, सब असेंबली कैमरा मॉड्यूल, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली, और लिथियम सेल एनक्लोजर जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है.
रोजगार के नए अवसर
केंद्र सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से देश में डायरेक्ट जॉब्स को बढ़ाना है. इस योजना के तहत अगले छह सालों में करीब 91,600 डायरेक्ट जॉब्स उत्पन्न होने की संभावना जताई गई है. सरकार हर साल इस स्कीम के लिए 2,300 करोड़ रुपये से लेकर 4,200 करोड़ रुपये तक निवेश करेगी. इसके साथ ही, कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे निर्धारित समय में उत्पादन और रोजगार के लक्ष्यों को पूरा करें.
PLI स्कीम के बाद सरकार का दूसरा कदम
प्रधानमंत्री के प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के बाद इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स इंसेंटिव स्कीम दूसरी बड़ी पहल है, जिसका उद्देश्य देश में रोजगार को बढ़ावा देना और घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ाना है. इस पहल के तहत सरकार का लक्ष्य है कि देश में ऑपरेशनल और कैपिटल एक्सपेंस दोनों के आधार पर कंपनियों को इंसेंटिव प्रदान किए जाएं. सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, भारत में इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर की बड़ी कंपनियों जैसे Apple और Samsung की मौजूदगी है, लेकिन इन कंपनियों में घरेलू वैल्यू एडिशन केवल 15 से 20 प्रतिशत है. सरकार का उद्देश्य इसे बढ़ाकर 30 से 40 प्रतिशत करने का है.
इंसेंटिव की प्रक्रिया
इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स इंसेंटिव स्कीम के तहत तीन प्रमुख तरीके से इंसेंटिव दिए जाएंगे. पहला ऑपरेशनल एक्सपेंस पर आधारित होगा, दूसरा कैपिटल एक्सपेंस पर निर्भर करेगा और तीसरा दोनों का संयोजन होगा. ऑपरेशनल इंसेंटिव नेट इंक्रीमेंटल सेल के आधार पर दिया जाएगा, जबकि कैपेक्स एलिजिबल कैपिटल एक्सपेंडीचर पर आधारित होगा.
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