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OMCs की अंडर-रिकवरी 2.19 लाख करोड़ रुपये पर पहुंची, पेट्रोल-डीजल पर मिल सकती है राहत
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतों के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन उपलब्ध कराया. इसके चलते कंपनियों को भारी अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर भारी पड़ा है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों की कुल अंडर-रिकवरी 2.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. हालांकि, उन्होंने संकेत दिए कि यदि कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है.
पेट्रोल, डीजल और LPG पर भारी नुकसान
हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतों के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईंधन उपलब्ध कराया. इसके चलते कंपनियों को भारी अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा.
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में पेट्रोल पर 19,905 करोड़ रुपये, डीजल पर 1.44 लाख करोड़ रुपये और LPG पर 24,148 करोड़ रुपये की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई. इसके अलावा पिछली तिमाहियों से LPG पर 30,720 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान भी कंपनियों पर बना हुआ है.
पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाया दबाव
मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण अकेले 30 जून तक सरकारी तेल कंपनियों को 74,781 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ. अंडर-रिकवरी का अर्थ किसी उत्पाद की लागत और उसकी बिक्री कीमत के बीच का अंतर होता है, जब कंपनियां लागत से कम कीमत पर उत्पाद बेचती हैं.
कच्चा तेल सस्ता, फिर भी क्यों नहीं घटीं कीमतें?
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अप्रैल में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल से घटकर करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं. इसके बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल कमी संभव नहीं है, क्योंकि रिफाइनरियां लगभग दो महीने पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार और तेल कंपनियां खुदरा ईंधन की कीमतों में कटौती पर विचार कर सकती हैं.
मई में बढ़ी थीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
सरकारी तेल कंपनियों ने बढ़ती अंडर-रिकवरी की भरपाई के लिए 15 मई को पेट्रोल की कीमत में 7.38 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 7.52 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. यह करीब चार वर्षों में ईंधन की कीमतों में पहली बड़ी वृद्धि थी.
ऊर्जा सुरक्षा के लिए स्टोरेज बढ़ाने पर जोर
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने अपनी मजबूत रिफाइनिंग क्षमता के कारण पश्चिम एशिया संकट के बावजूद ईंधन आपूर्ति को प्रभावित नहीं होने दिया. फिलहाल देश के पास बंदरगाहों, रिफाइनरियों और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) को मिलाकर 76 से 80 दिनों का तेल भंडार उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए देश को अपनी स्टोरेज क्षमता और बढ़ाने की जरूरत है.
आयात पर अब भी बड़ी निर्भरता
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत LNG और 60 प्रतिशत LPG आयात करता है. ऐसे में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाओं का सीधा असर देश की ऊर्जा लागत और ईंधन कीमतों पर पड़ता है.
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