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केरल विझिंजम पोर्ट डील के पीछे कौन? सौदे की परतें खोलती खास पड़ताल

$1.4 अरब की अडानी डील, जटिल कॉरपोरेट संरचनाएं, फैमिली ट्रस्ट और एक ऐसा नेटवर्क, जिसकी कड़ियां चुपचाप पनामा नहर तक पहुंचती हैं. (भाग-1)

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago

पलक शाह

29 जून को अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) ने भारत के सबसे नए गहरे समुद्री बंदरगाह विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट में अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी 1.397 अरब डॉलर में बेचने का समझौता किया. कंपनी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में खरीदार का नाम टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (TiL) बताया गया, जो दुनिया की सबसे बड़ी कंटेनर शिपिंग कंपनी मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (MSC) की पोर्ट्स इकाई है. यह खबर प्रकाशित हुई, नियामकीय दस्तावेजों में दर्ज हुई और कुछ ही समय में सामान्य कारोबारी खबर बनकर रह गई.

लेकिन शायद ऐसा नहीं होना चाहिए था.

क्योंकि प्रेस विज्ञप्ति में जिस कंपनी का नाम खरीदार के रूप में सामने आया, वास्तविकता उससे कहीं अधिक जटिल है. विझिंजम में हिस्सेदारी लेने वाली कंपनी दुनिया के दर्जनों देशों के संयुक्त व्यापारी बेड़ों से भी अधिक कंटेनर शिपिंग क्षमता नियंत्रित करती है. इसके बावजूद जिनेवा स्थित एक फैमिली ऑफिस के बाहर शायद ही कोई स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित कर सकता है कि उसकी वास्तविक वित्तीय स्थिति क्या है. भारत ने यह माना कि विझिंजम में हिस्सेदारी MSC ने खरीदी है, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती.

आखिर MSC है कौन?

वह परिवार जो कभी अपनी कहानी नहीं बताता

MSC पूरी तरह जिनेवा के अपोंटे (Aponte) परिवार के नियंत्रण में है. इसकी शुरुआत वर्ष 1970 में हुई थी, जब जियानलुइगी अपोंटे, जो उस समय इटली के सोरेंटो और कैप्री द्वीप के बीच फेरी चलाते थे, ने अपनी पत्नी राफाएला अपोंटे-डायमंट के साथ 2 लाख डॉलर का ऋण लेकर जर्मनी का एक पुराना मालवाहक जहाज खरीदा.

करीब 56 वर्षों बाद यही कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग लाइन बन चुकी है. चूंकि MSC कभी शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं हुई और न ही उसने इस तरह का सार्वजनिक कर्ज लिया, जिससे उसे बाहरी निवेशकों के प्रति जवाबदेह होना पड़े, इसलिए आज भी कंपनी पूरी तरह अपोंटे परिवार के नियंत्रण में है.

इसमें कोई गैरकानूनी बात नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह भी है कि जब इतनी निजी कंपनी किसी रणनीतिक सौदे में खरीदार बनकर सामने आती है, तो आमतौर पर उपलब्ध सार्वजनिक दस्तावेज, जैसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों की जानकारी या बॉन्ड प्रॉस्पेक्टस, यह बताने में सक्षम नहीं होते कि सौदे के पीछे वास्तविक वित्तपोषण कौन कर रहा है.

अप्रैल 2026 में कंपनी का नियंत्रण बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के अगली पीढ़ी को सौंप दिया गया. डिएगो अपोंटे और एलेक्सा अपोंटे वागो को जिनेवा में पंजीकृत पारिवारिक ट्रस्टों के माध्यम से कंपनी का नियंत्रण मिला. इस बदलाव की कोई सार्वजनिक फाइलिंग सामने नहीं आई. इसके कुछ ही महीनों बाद इसी पारिवारिक कंपनी ने भारत के सबसे रणनीतिक बंदरगाहों में से एक विझिंजम में हिस्सेदारी खरीदने का समझौता कर लिया.

खरीदार, जिसका नाम सामने नहीं आया

चूंकि MSC की अपनी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं है, इसलिए यह समझने का एकमात्र तरीका कि विझिंजम बंदरगाह में खरीदी गई हिस्सेदारी के पीछे वास्तव में कौन है, आधिकारिक दस्तावेजों की पड़ताल करना है. लेकिन यह पड़ताल उस दिशा में नहीं जाती, जिसकी ओर प्रेस विज्ञप्ति इशारा करती है.

वास्तव में शेयर खरीद समझौते (Share Purchase Agreement) पर हस्ताक्षर मुंडी लिमिटेड (Mundi Limited) ने किए हैं. यह कंपनी टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (TiL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है, जो MSC की पोर्ट्स इकाई है.

लेकिन TiL भी अंतिम होल्डिंग कंपनी नहीं है. यह एक ऐसी होल्डिंग कंपनी के अधीन कार्य करती है, जिसके बारे में भारत में बहुत कम लोग जानते हैं. इसका नाम टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड होल्डिंग एस.ए. (Terminal Investment Limited Holding S.A.) है, जो जिनेवा या स्विट्जरलैंड में नहीं, बल्कि लक्जमबर्ग में पंजीकृत है.

यहीं से यह कहानी केवल एक शिपिंग कंपनी की नहीं रह जाती.

कहानी में BlackRock की एंट्री

यूरोपीय आयोग (European Commission) के समक्ष इस वर्ष दाखिल एक नियामकीय दस्तावेज में लक्जमबर्ग स्थित इस कंपनी का कानूनी विवरण दिया गया है. दस्तावेज के अनुसार, यह कंपनी MSC Mediterranean Shipping Company Holding S.A. और BlackRock Inc. के "अप्रत्यक्ष और संयुक्त नियंत्रण (Indirect and Joint Control)" में है.

यानी इस संरचना में दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी BlackRock भी शामिल है.

BlackRock वर्तमान में करीब 13.9 ट्रिलियन डॉलर की परिसंपत्तियों (Assets Under Management) का प्रबंधन करती है. यह राशि दुनिया के लगभग सभी देशों की वार्षिक अर्थव्यवस्था से अधिक है. केवल अमेरिका** और चीन की अर्थव्यवस्था ही इससे बड़ी हैं.

केवल निवेशक नहीं, रणनीतिक साझेदार

यूरोपीय संघ (EU) के मर्जर कानून के तहत "संयुक्त नियंत्रण (Joint Control)" का अर्थ केवल किसी कंपनी में हिस्सेदारी होना नहीं है.

इसका मतलब है कि BlackRock को TiL के प्रमुख रणनीतिक फैसलों पर महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं. इनमें कंपनी का बजट, कारोबारी रणनीति, बिजनेस प्लान और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियां जैसे फैसले शामिल हैं. यानी BlackRock केवल मुनाफे में हिस्सेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक निर्णयों में भी प्रभाव रखती है.

यह हिस्सेदारी BlackRock को वर्ष 2024 में ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (Global Infrastructure Partners - GIP) के अधिग्रहण के बाद मिली. GIP के पास TiL में लगभग 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

GIP के चेयरमैन अदेबायो "बायो" ओगुनलेसी TiL के निदेशक मंडल (Board of Directors) में भी शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि GIP के अधिग्रहण के बाद उन्हें BlackRock के बोर्ड में भी शामिल किया गया.

यानी एक ही व्यक्ति दोनों संस्थाओं के निदेशक मंडल का हिस्सा है. इस तरह वह अप्रत्यक्ष रूप से भारत के एक रणनीतिक बंदरगाह से जुड़े निर्णयों में भी भूमिका निभाता है.

यह नेटवर्क आखिर कितना व्यापक है?

विझिंजम बंदरगाह इस वैश्विक संरचना का अकेला हिस्सा नहीं है.

ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स (GIP) के जरिए BlackRock पहले से ही दुनिया के कई महत्वपूर्ण परिवहन और बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी रखती है. इनमें गैटविक, एडिनबर्ग और सिडनी हवाई अड्डे, मलेशिया के राष्ट्रीय एयरपोर्ट ऑपरेटर, पोर्ट ऑफ मेलबर्न और ब्रिटेन के पील पोर्ट्स शामिल हैं.

इसके अलावा टर्मिनल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (TiL) के माध्यम से BlackRock को अब क्रिस्टोबाल (Cristóbal) बंदरगाह का अंतरिम नियंत्रण भी प्राप्त है. यह बंदरगाह पनामा नहर के दोनों प्रमुख कंटेनर टर्मिनलों में से एक है.

यह बदलाव ऐसे समय हुआ, जब पनामा ने एक हांगकांग की कंपनी से उसका संचालन अधिकार वापस ले लिया. यह फैसला ऐसे दौर में आया, जब अमेरिका और चीन के बीच पनामा नहर पर प्रभाव को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है.

हालांकि पनामा नहर का स्वामित्व और संचालन अब भी पनामा कैनाल अथॉरिटी के पास है, लेकिन नहर से जुड़े प्रमुख बंदरगाहों का नियंत्रण धीरे-धीरे वैश्विक निवेशकों के एक सीमित समूह के हाथों में सिमटता जा रहा है.

अडानी ने किसे बेची हिस्सेदारी?

लेख के अनुसार, अडानी समूह ने विझिंजम बंदरगाह का निर्माण किया और अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी उस कंपनी को बेची, जिसे वह MSC के नाम से जानता था.

लेकिन सवाल यह है कि क्या इस सौदे के पीछे मौजूद वास्तविक कॉरपोरेट संरचना और उसके प्रभाव का पूरा आकलन किया गया था? क्योंकि MSC के पीछे मौजूद संस्थागत ढांचे में ऐसे वैश्विक निवेशकों की मौजूदगी दिखाई देती है, जिनका प्रभाव केरल से लेकर पनामा नहर तक फैले रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर नजर आता है.

आगे क्या?

यहीं से यह कहानी केवल भारत के एक बंदरगाह तक सीमित नहीं रहती.

यह सवाल उठाती है कि दुनिया के महत्वपूर्ण बंदरगाहों, हवाई अड्डों और अन्य रणनीतिक बुनियादी ढांचों का वास्तविक स्वामित्व और नियंत्रण किन संस्थाओं के पास है. साथ ही यह भी कि वैश्विक स्तर पर बार-बार कुछ चुनिंदा नाम ही ऐसे अहम परिसंपत्तियों के पीछे क्यों दिखाई देते हैं.

(क्रमशः...)

भाग-2 में: BlackRock के वैश्विक पोर्ट नेटवर्क, उसके निवेश साम्राज्य और अरब सागर के केरल से लेकर पनामा नहर तक फैले रणनीतिक बंदरगाहों पर उसके बढ़ते प्रभाव का विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


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