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भारत पर जापान का बड़ा दांव, ₹1 लाख करोड़ का निवेश, सेमीकंडक्टर, AI और ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी नई ताकत
दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक तेल भंडारण, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत और जापान ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. जापान भारत में ₹1 ट्रिलियन (करीब ₹1 लाख करोड़) से अधिक का निवेश करेगा, जबकि दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक तेल भंडारण, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. इन पहलों का उद्देश्य भारत में निवेश, रोजगार, तकनीकी विकास और सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करना है.
भारत-जापान की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती
भारत और जापान के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है. अगस्त 2025 से अब तक दोनों देशों के बीच 120 से अधिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. इन समझौतों के तहत जापान भारत में ₹1 ट्रिलियन (करीब ₹1 लाख करोड़) से अधिक का निवेश करेगा. यह निवेश सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ग्रीन एनर्जी, ऑटोमोबाइल, स्टील, डिजिटल टेक्नोलॉजी और कृषि समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा.
ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष फोकस
दोनों देशों ने वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों और ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच तेल और गैस की सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है. इसके तहत भारत और जापान रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Oil Reserves) के प्रबंधन, कच्चे तेल के भंडारण, आपूर्ति सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपने अनुभव साझा करेंगे. इसका उद्देश्य किसी भी वैश्विक संकट के दौरान घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाना है.
तीसरे देशों में भी करेंगे संयुक्त निवेश
भारत और जापान केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे. दोनों देश तीसरे देशों में तेल और गैस परियोजनाओं में संयुक्त निवेश की संभावनाएं तलाशेंगे. साथ ही ऊर्जा बाजार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करेंगे और नए ऊर्जा स्रोतों के विकास पर भी मिलकर काम करेंगे.
समुद्री परिवहन होगा अधिक सुरक्षित
तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों से होता है. इसे देखते हुए दोनों देशों ने ऊर्जा परिवहन को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत बनाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. ऊर्जा परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे में संयुक्त निवेश की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा.
सेमीकंडक्टर, AI और ग्रीन एनर्जी में बड़े प्रोजेक्ट
जापान का निवेश भारत के कई राज्यों में नई परियोजनाओं के रूप में दिखाई देगा.
1. हरियाणा में Daikin रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर स्थापित करेगी.
2. Sumitomo Corporation औद्योगिक सहयोग और रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं में निवेश करेगी.
3. गुजरात में Fujifilm सेमीकंडक्टर मटेरियल्स का उत्पादन शुरू करेगी.
4. Suzuki नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहित कर रही है.
5. असम में Suzuki R&D, NDDB और NEDF के सहयोग से बायोगैस प्लांट लगाया जाएगा.
6. Toho Koki और IIT गुवाहाटी मिलकर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करेंगे.
भविष्य की तकनीकों पर रहेगा जोर
ग्रीन एनर्जी और अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू होंगी.
1. Mitsubishi Gas Chemical और ACME ग्रीन मेथेनॉल परियोजना पर काम करेंगे.
2. IHI और ACME बड़े पैमाने पर ग्रीन अमोनिया उत्पादन संयंत्र स्थापित करेंगे.
3. NTT Data अगली पीढ़ी की टेलीकॉम तकनीक और सबमरीन केबल नेटवर्क में निवेश करेगी.
4. हैदराबाद में Mitsubishi Electric और IIT Hyderabad AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सुरक्षा क्षेत्र के लिए विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करेंगे.
5. Yaqumo और IISc क्वांटम टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम विकसित करेंगे.
रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में Toyota कर्नाटक के बिदादी में नया प्लांट स्थापित करेगी, जहां हर वर्ष लगभग एक लाख वाहनों का उत्पादन होगा और करीब 2,800 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. वहीं JFE Steel और JSW Steel एकीकृत स्टील परियोजना में निवेश करेंगे.
संस्थागत सहयोग भी होगा मजबूत
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की Indian Strategic Petroleum Reserves Limited (ISPRL) और राष्ट्रीय तेल कंपनियां जापान की JOGMEC तथा JBIC जैसी संस्थाओं के साथ तकनीकी, वित्तीय और रणनीतिक सहयोग बढ़ाएंगी.
इसके अलावा India-Japan Joint Working Group on Petroleum and Natural Gas के तहत नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें चल रही परियोजनाओं की समीक्षा और भविष्य के सहयोग की दिशा तय की जाएगी.
भारत को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि जापान का यह निवेश और ऊर्जा सहयोग भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर उद्योग, हरित ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देगा. इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, विदेशी निवेश बढ़ेगा और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी.
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