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अब देश की इस बड़ी समस्‍या के उपाय को लेकर काम करेगा Google, तकनीक से जुड़ी है समस्‍या 

सरकार की ओर से गुरुवार को सभी कंपनियों के साथ हुई बैठक के बाद कहा गया था कि वो अगले कुछ दिनों में इस पर रेग्‍यूलेशन बनाने को लेकर काम करेगी. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत सरकार के डीपफेक वीडियो को लेकर रेग्‍यूलेशन बनाने की बात के बाद अब गूगल ने इस समस्‍या को लेकर सरकार के साथ मिलकर काम करने की बात कही है. दरअसल इससे पहले गुरुवार को केन्‍द्रीय इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने अपनी बात कहते हुए कहा था कि सभी कंपनियों के साथ मिलकर बहुत जल्‍द नए रेग्‍यूलेशन बनाए जाएंगे. उन्‍होंने ये भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी इन्‍हें कानूनी जामा पहनाने की तो सरकार उससे भी पीछे नहीं हटेगी. इसी को लेकर गूगल ने इस दिशा में सरकार के साथ मिलकर काम करने की बात कही है. 

Google के प्रवक्‍ता ने कही क्‍या बात? 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Google के प्रवक्‍ता ने अपनी बात कहते हुए बताया कि आखिर कंपनी कैसे इस तरह की समस्‍याओं को रोकने को लेकर काम कर रही है. उन्‍होंने ये भी बताया कि इस तरह की समस्‍या को खत्‍म करने के लिए वो किस तरह के टूल और प्रोटोकाल को लेकर काम कर रहे हैं. उन्‍होंने सरकार के द्वारा इस समस्‍या से निपटने के उपायों की तलाश करने के लिए बुलाई गई मीटिंग का स्‍वागत करते हुए कहा कि गूगल भी इस दिशा में सक्रियता से काम कर रहा है. उन्‍होंने किसी भी तरह की समस्‍या को लेकर भारत सरकार के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर से दोहराया. 

ऐसे वीडियो की पहचान करना बेहद आवश्‍यक 
मौजूदा समय में सबसे बड़ी समस्‍या सरकार या एजेंसियों के सामने ये भी है कि आखिर इस तरह के वीडियो जब इंटरनेट पर आते हैं तो उसकी पहचान नहीं हो पाती है. गुरुवार को हुई मीटिंग में ये बात भी निकलकर सामने आई कि ऐसे वीडियो की पहचान के लिए या तो वॉटरमार्क को अनिवार्य किया जाए या सिंथेटिक ऑडियो डिटेक्‍शन जैसी सुविधा दी जाए. इसे लेकर गूगल ने भी ये बताया है कि वो इसे लेकर क्‍या काम कर रहे हैं. 

Deepfake वीडियो को लेकर हो रही है सारी मशक्‍कत 
दरअसल पिछले कुछ समय में एक के बाद एक सामने आए कई डीपफेक वीडियो के आने के बाद सरकार इसे लेकर सक्रियता से काम कर रही है. खुद पीएम मोदी इस समस्‍या को लेकर चिंता जता चुके हैं. सरकार की ओर से भी कहा गया है कि इस समस्‍या को अगले कुछ दिनों में रेग्‍यूलेशन को तैयार कर लिया जाएगा. दूसरी सबसे अहम बात ये है कि अश्विनी वैष्‍णव ने साफ तौर पर कहा था कि अगर सरकार को लगता है कि इसे कानूनी दायरे में लाने की जरूरत है तो सरकार उससे भी पीछे नहीं हटेगी. 

इस खबर को भी पढ़िए : ChatGPT बनाने वाली OpenAI के नए बोर्ड मेंबर्स के बारे में कितना जानते हैं आप?


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