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1 अप्रैल से बदलने जा रही है असली गोल्ड की पहचान, ऐसे पहचान सकते हैं असली सोना

बहुत से ऐसे रस्म और रिवाज हैं जिनमें सोने का अपना महत्त्व है और इसीलिए इन्वेस्टमेंट के साथ सोना इमोशनल रूप से भी भारतीय समाज और परिवारों से जुड़ा हुआ है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

 

भारतीय परिवारों और लोगों के लिए गोल्ड यानी सोना, इन्वेस्टमेंट का एक काफी पसंदीदा तरीका है. इतना ही नहीं भारतीय परिवारों में नए बच्चे के जन्म से लेकर शादी तक बहुत से ऐसे रस्म और रिवाज हैं जिनमें सोने का अपना अलग महत्त्व है और इसीलिए इन्वेस्टमेंट के साथ-साथ सोना इमोशनल रूप से भी भारतीय समाज और भारतीय परिवारों से जुड़ा हुआ है. लेकिन सोना खरीदने के लिए उसकी सही पहचान और समझ होना बहुत जरूरी है. गोल्ड हॉलमार्किंग एक ऐसा ही तरीका है जो कंज्यूमर्स को सोने की ज्वेलरी और आर्टिफैक्ट्स यानी कलाकृतियों में इस्तेमाल किये गए सोने की शुद्धता के बारे में बताता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि, 1 अप्रैल 2023 से गोल्ड हॉलमार्किंग के नियमों में बदलाव होने जा रहा है?

1 अप्रैल से बदल जाएगा सिस्टम
1 अप्रैल 2023 से सोने के सभी ज्वेलरी और आर्टिफैक्ट्स पर 6 अंकों का HUID यानी हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर अनिवार्य हो जाएगा. इस नंबर के माध्यम से आप न सिर्फ इस्तेमाल किये गए सोने की शुद्धता के बारे में जान पायेंगे बल्कि ज्वेलरी बनाने वाले ज्वेलर के बारे में भी आप जानकारी इकट्ठी कर सकेंगे. मार्केट में इस वक्त 4 डिजिट और 6 डिजिट के HUID वाली गोल्ड ज्वेलरी मिल रही है जिसकी वजह से कंज्यूमर अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं कि दोनों में अंतर क्या है और दोनों में से ज्यादा शुद्ध ज्वेलरी कौन सी होती है?
 

भारत में कब आई हॉलमार्किंग?
भारत में सोने के हॉलमार्किंग की प्रक्रिया साल 2000 में शुरू हुई थी. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की मानें तो इस वक्त देश भर में हर रोज सोने के लगभग 3 लाख सामानों की हॉलमार्किंग HUID के साथ की जा रही है. इतना ही नहीं, देश के लगभग 339 जिलों में सोने को परखने के लिए एक हॉलमार्क सेंटर मौजूद है इन सेंटर्स को AHC (Assaying Hallmark Centre) के नाम से भी जाना जाता है. 

 

ये है हॉलमार्किंग का इतिहास
गोल्ड हॉलमार्किंग का इतिहास बहुत पुराना है. पुराने समय में कीमती मेटल्स को जांचने के लिए पंच मार्क का इस्तेमाल किया जाता था. सबसे पहले चांदी पर हॉलमार्किंग का इतिहास आपको चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में सम्राट Augustinian के पास ले जाता है और यह कस्टमर प्रोटेक्शन का सबसे पुराना सबूत है. इसके बाद मध्यकालीन समय में इंग्लैंड और फ़्रांस जैसे यूरोपीय देशों में हॉलमार्किंग का प्रचलन बढ़ने लगा. आधुनिक हॉलमार्किंग की शुरुआत ब्रिटेन से हुई और भारत को आधुनिक हॉलमार्किंग की शुरुआत करने में भी लगभग 20 सालों का समय लगा लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हॉलमार्किंग का भारतीय सिस्टम सबसे अच्छा और आगे है. 

BIS केयर से आपको मिलेगी ज्वेलरी की सारी जानकारी
यह जानने के लिए कि आपकी ज्वेलरी कितनी शुद्ध है, आप BIS केयर ऐप डाउनलोड कर सकते हैं. डाउनलोड करने के बाद इसमें जाकर अपना 6 अंकों का HUID नंबर डालें और उसके बाद आपको आपकी ज्वेलरी के बारे में सारी जानकारी आपकी स्क्रीन पर मिल जायेगी. आपकी ज्वेलरी किस ज्वेलर ने बनायीं इसे कौन से AHC द्वारा जांचा गया और उसमें इस्तेमाल किये गए सोने की शुद्धता का स्टैण्डर्ड क्या है? इन सभी सवालों के जवाब आपको BIS के केयर ऐप में HUID नंबर डालकर मिल जायेंगे. 

क्यों बदला जा रहा है हॉलमार्किंग का पुराना सिस्टम?
पुराने सिस्टम में किसी भी ज्वेलरी पर 4 तरह के चिन्ह देखने को मिलते थे. पुराने हॉलमार्किंग सिस्टम में आपको ज्वेलरी पर BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैण्डर्ड) का लोगो, कैरेट में सोने की शुद्धता, AHC का निशान और ज्वेलर का निशान देखने को मिलता था लेकिन इस सिस्टम के साथ सबसे बड़ी समस्या है ये है कि यह ट्रेसेबल नहीं है. यानी, इस सिस्टम से आपको ज्वेलरी बनाने वाले और उसको जांचने वाले AHC की जानकारी नहीं मिलती थी. नए सिस्टम में BIS के लोगो, और क्रेट में सोने की शुद्धता के साथ-साथ 6 अंकों का एक HUID नंबर दिया जाता है जिसे BIS केयर ऐप में डालकर आप अपनी ज्वेलरी के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. 

नया सिस्टम है बेहतर
इस वक्त देश में लगभग 1400 AHC काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं, देश में बेची जाने वाली लगभग 90% ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग के माध्यम से कंज्यूमर्स को गारंटी प्रदान कर रहे हैं. साथ ही नए सिस्टम के अंतर्गत अभी तक लगभग 1.5 लाख ज्वेलर्स खुदको रजिस्टर कर चुके हैं और 17 करोड़ ज्वेलरी और आर्टिफैक्ट्स की हॉलमार्किंग की जा चुका है. 
 

यह भी पढ़ें: NSE और BSE पर फ्रीज हुए पतंजलि के शेयर्स, कंपनी ने कहा नहीं पड़ता फर्क

 


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