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भारत-दक्षिण कोरिया के बीच MSME समझौता, व्यापार और निवेश सहयोग को मिलेगा नया जोर

सरकार के अनुसार, यह समझौता इस बात को दर्शाता है कि दोनों देश MSME सेक्टर को समावेशी विकास, नवाचार और रोजगार सृजन का प्रमुख इंजन मानते हैं. इससे विभिन्न बाजारों में स्टेकहोल्डर्स के बीच सहयोग भी बढ़ेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत और दक्षिण कोरिया ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises और दक्षिण कोरिया के Ministry of SMEs and Startups के बीच एक समझौता (MoU) साइन हुआ है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के छोटे व्यवसायों को जोड़ना और व्यापार के नए अवसर पैदा करना है.

राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हुआ समझौता

यह समझौता दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae Myung की भारत यात्रा के दौरान साइन किया गया. इसका मकसद MSME से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच एक मजबूत और व्यवस्थित संवाद तंत्र तैयार करना है, जिससे सहयोग लंबे समय तक जारी रह सके.

व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

इस MoU के तहत दोनों देश व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए कई कदम उठाएंगे. इसमें जानकारी और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान, बेस्ट प्रैक्टिस साझा करना, बिजनेस मैचमेकिंग और तकनीकी व आर्थिक सहयोग शामिल है. इससे दोनों देशों के MSME सेक्टर को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी.

MSME इकोसिस्टम को जोड़ने पर फोकस

यह समझौता दोनों देशों के MSME इकोसिस्टम को बेहतर तरीके से समझने और आपसी साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है. संयुक्त पहलों के जरिए कंपनियों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी, जिससे छोटे व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा.

समावेशी विकास और रोजगार पर जोर

सरकार के अनुसार, यह समझौता इस बात को दर्शाता है कि दोनों देश MSME सेक्टर को समावेशी विकास, नवाचार और रोजगार सृजन का प्रमुख इंजन मानते हैं. इससे विभिन्न बाजारों में स्टेकहोल्डर्स के बीच सहयोग भी बढ़ेगा.

भारत के MSME सेक्टर की ताकत

भारत का MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है.

1. उद्यम पोर्टल पर 7.16 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूनिट्स
2. 31 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार
3. GDP में करीब 30% योगदान
4. मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में 35.4% हिस्सेदारी
5. निर्यात में लगभग 45% योगदान

यह आंकड़े दिखाते हैं कि यह सेक्टर आर्थिक विकास में कितनी अहम भूमिका निभाता है.

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि, MSME सेक्टर कई चुनौतियों का सामना भी कर रहा है. करीब ₹8.1 लाख करोड़ की राशि देरी से होने वाले भुगतान में फंसी हुई है, जिससे छोटे व्यवसायों की नकदी स्थिति पर दबाव पड़ता है. इसके अलावा सस्ती और औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच भी बड़ी समस्या है, जहां लगभग ₹30 लाख करोड़ का क्रेडिट गैप बना हुआ है. इन चुनौतियों के कारण कई कंपनियां तकनीक अपनाने और बड़े सप्लाई चेन से जुड़ने में पीछे रह जाती हैं.

 


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