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NSE IPO की राह साफ, ₹1800 करोड़ सेटलमेंट से सुलझेगा विवाद
₹1800 करोड़ के प्रस्तावित सेटलमेंट के साथ NSE और SEBI के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
करीब एक दशक से अटके नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है. मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति अधिनियम (Securities and Exchange Board of India-SEBI) की एक हाई-पावर्ड कमेटी ने को-लोकेशन विवाद के निपटारे के लिए ₹1800 करोड़ के सेटलमेंट का प्रस्ताव दिया है, जिससे देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है.
₹1800 करोड़ सेटलमेंट का प्रस्ताव क्या है
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेबी की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) ने NSE से ₹1800 करोड़ से अधिक राशि के सेटलमेंट की सिफारिश की है. इस प्रस्ताव के तहत करीब ₹1200 करोड़ को डिस्गॉर्जमेंट यानी कथित अनुचित लाभ की वसूली के रूप में रखा गया है, जबकि लगभग ₹400 करोड़ ब्याज के तौर पर शामिल हैं. शेष राशि अन्य शर्तों के आधार पर तय की जाएगी. हालांकि इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए अभी सेबी के पूर्णकालिक सदस्यों की अंतिम मंजूरी जरूरी है.
NSE की पेशकश से ज्यादा है राशि
इससे पहले NSE ने इस विवाद को सुलझाने के लिए ₹1387.39 करोड़ का सेटलमेंट प्रस्ताव दिया था. कंपनी ने इस प्रक्रिया के तहत करीब ₹600 करोड़ पहले ही एस्क्रो खाते में जमा कर दिए हैं और बाकी राशि अंतिम मंजूरी मिलने के बाद जमा करने की बात कही है. ऐसे में सेबी की कमेटी द्वारा सुझाई गई राशि NSE की शुरुआती पेशकश से काफी ज्यादा है.
क्या है को-लोकेशन विवाद
को-लोकेशन मामले में NSE पर आरोप लगे थे कि उसने कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को ट्रेडिंग डेटा तक तेज और प्राथमिक पहुंच दी, जिससे उन्हें बाजार में अनुचित बढ़त मिली. इस मामले में लंबे समय तक जांच और कानूनी प्रक्रिया चलती रही, जिसके कारण NSE का आईपीओ करीब 10 वर्षों से अटका हुआ है.
IPO की तैयारी कहां तक पहुंची
इस बीच NSE ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की तैयारी भी तेज कर दी है. कंपनी ने हाल ही में 20 निवेश बैंकों को आईपीओ मैनेज करने की जिम्मेदारी सौंपी है, जो किसी भी भारतीय आईपीओ के लिए अब तक की सबसे बड़ी टीम मानी जा रही है. इसके साथ ही मौजूदा निवेशकों को आईपीओ के जरिए अपने शेयर बेचने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसके लिए 27 अप्रैल तक की समयसीमा तय की गई है.
क्यों अहम है यह लिस्टिंग
NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज होने के साथ-साथ सबसे बड़ी अनलिस्टेड कंपनियों में भी शामिल है. इसके करीब 1.90 लाख निवेशक हैं, जो लंबे समय से लिस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं. आईपीओ आने से निवेशकों को एग्जिट का मौका मिलेगा और कंपनी की वास्तविक बाजार वैल्यू भी सामने आएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी.
सूत्रों के अनुसार, सेबी जल्द ही NSE को भुगतान के लिए डिमांड लेटर जारी कर सकता है. इसके बाद अंतिम आदेश जारी होगा और सेटलमेंट प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस प्रक्रिया के पूरा होते ही NSE के आईपीओ का रास्ता पूरी तरह साफ हो सकता है.
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