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भारत के समुद्री निर्यात ने बनाया रिकॉर्ड, FY26 में ₹72,325 करोड़ के पार पहुंचा कारोबार

विशाखापट्टनम, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख बंदरगाहों ने कुल निर्यात मूल्य का लगभग 64% हिस्सा संभाला है. इससे इन बंदरगाहों की लॉजिस्टिक और ट्रेडिंग में अहम भूमिका साफ होती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago

भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात ने वित्त वर्ष 2025–26 में अब तक का सबसे बड़ा स्तर हासिल किया है. मजबूत वैश्विक मांग, खासकर झींगा (श्रिम्प) की बढ़ती खपत और चीन, यूरोपीय संघ व दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे बाजारों में बेहतर प्रदर्शन के चलते कुल निर्यात ₹72,325.82 करोड़ तक पहुंच गया है. यह जानकारी मरीन प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों में सामने आई है.

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निर्यात

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने इस वित्त वर्ष में 19.32 लाख टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया है. यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है, जो वैश्विक बाजारों में भारतीय समुद्री उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाता है.

झींगा बना सबसे बड़ा कमाई का स्रोत

फ्रोजन झींगा भारत के समुद्री निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है. इसने अकेले ₹47,973.13 करोड़ का योगदान दिया, जो कुल कमाई का दो-तिहाई से भी अधिक है. झींगा के निर्यात में मात्रा 4.6% और मूल्य में 6.35% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह सेक्टर की रीढ़ बना हुआ है.

अमेरिका में गिरावट, लेकिन अन्य बाजारों ने संभाली कमान

संयुक्त राज्य अमेरिका अभी भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है, लेकिन यहां शिपमेंट में गिरावट देखी गई है. अमेरिका को होने वाले निर्यात में मात्रा 19.8% और मूल्य 14.5% घटा है, जिसका मुख्य कारण पारस्परिक टैरिफ प्रभाव बताया गया है. हालांकि इस गिरावट की भरपाई अन्य प्रमुख बाजारों ने की है.

चीन, यूरोप और एशिया से मजबूत मांग

चीन को होने वाले निर्यात में 22.7% की मूल्य वृद्धि और 20.1% की मात्रा वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं यूरोपीय संघ में यह वृद्धि और भी तेज रही, जहां निर्यात मूल्य 37.9% और मात्रा 35.2% बढ़ी. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी 36% से अधिक की बढ़त देखी गई है, जिससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है.

जापान और पश्चिम एशिया का प्रदर्शन

जापान को निर्यात में 6.55% की वृद्धि हुई है, जबकि पश्चिम एशिया में वित्त वर्ष के अंत में क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण हल्की गिरावट दर्ज की गई.

फ्रोजन फिश, स्क्विड, कटलफिश, सूखे उत्पाद और लाइव सीफूड सेगमेंट में भी बढ़ोतरी देखी गई है. वहीं कुछ चिल्ड प्रोडक्ट्स में गिरावट आई है. इसके अलावा फिशमील और फिश ऑयल जैसे सेगमेंट ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है.

प्रमुख बंदरगाहों की अहम भूमिका

विशाखापट्टनम, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट, कोच्चि, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख बंदरगाहों ने कुल निर्यात मूल्य का लगभग 64% हिस्सा संभाला है. इससे इन बंदरगाहों की लॉजिस्टिक और ट्रेडिंग में अहम भूमिका साफ होती है.

कुल मिलाकर, भारत का समुद्री निर्यात अब पारंपरिक बाजारों पर निर्भर न रहकर विविध वैश्विक बाजारों की ओर तेजी से बढ़ रहा है. यह बदलाव कमजोर बाजारों के प्रभाव को संतुलित करते हुए सेक्टर की स्थिर और मजबूत वृद्धि को सुनिश्चित कर रहा है.
 


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