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2028 तक भारत की ग्रोथ में गिरावट का अनुमान, मूडीज ने जारी की रिपोर्ट
मूडीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी ग्रोथ 2025 के अनुमानित 7.5% से घटकर 2026 में 7% और 2027 में 6.5% रह सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
वैश्विक रेटिंग एजेंसी Moody’s Investors Service ने अनुमान लगाया है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर में धीरे-धीरे कमी आ सकती है. हालांकि इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा.
2028 तक GDP ग्रोथ में गिरावट का अनुमान
मूडीज की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी ग्रोथ 2025 के अनुमानित 7.5% से घटकर 2026 में 7% और 2027 में 6.5% रह सकती है. आगे चलकर यह 2028 तक घटकर 6.3% तक पहुंचने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि उच्च वृद्धि के दौर के बाद अब अर्थव्यवस्था सामान्य स्तर की ओर बढ़ रही है.
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी सुस्ती के संकेत
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी विकास दर धीमी हो सकती है. इस क्षेत्र की ग्रोथ 2025 में 4.3% से घटकर 2026 में 3.8% और 2027 में 3.6% रहने का अनुमान है.
कमजोर मांग और एक्सपोर्ट ग्रोथ की चुनौती
मूडीज ने कहा कि घरेलू मांग में नरमी और निर्यात वृद्धि में संभावित गिरावट इस सुस्ती के प्रमुख कारण हैं. हालांकि इन चुनौतियों के बावजूद भारत क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
महंगाई में बढ़ोतरी का अनुमान
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में महंगाई दर में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. 2025 में महंगाई 2.2% और 2026 में 4.5% बढ़ने का अनुमान है. इसका कारण वैश्विक स्तर पर कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव बताए गए हैं.
मध्य पूर्व तनाव और वैश्विक जोखिम
मूडीज ने खास तौर पर मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों को प्रमुख जोखिम बताया है. इन कारणों से तेल और अन्य कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. यह स्थिति कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान देखी गई सप्लाई बाधाओं जैसी बताई गई है.
रोजगार पर भी हल्का दबाव
रिपोर्ट के अनुसार भारत में बेरोजगारी दर में भी मामूली बढ़ोतरी हो सकती है. 2025 में बेरोजगारी 6.9% और 2026 में 7% तक जाने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि आर्थिक सुस्ती का असर रोजगार सृजन पर भी पड़ सकता है.
कुल मिलाकर, Moody’s Investors Service की रिपोर्ट के अनुसार भारत की विकास दर में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है, लेकिन इसके बावजूद देश वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा. आने वाले वर्षों में वैश्विक अनिश्चितताएं और घरेलू चुनौतियां आर्थिक गति को प्रभावित कर सकती हैं.
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