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मैक्स फाइनेंशियल-एक्सिस बैंक को बड़ी राहत, सेबी ने 3,912 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले की जांच की खत्म
2010 से 2021 के बीच मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में हुए लेनदेन की हुई थी जांच, बीमा कमीशन की सीमा से बचने और शेयरधारकों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की हुई थी पड़ताल
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 hours ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MFSL), एक्सिस बैंक और अन्य संस्थाओं के खिलाफ 3,911.95 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े मामले में कार्यवाही खारिज कर दी है. यह मामला मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों से जुड़े लेनदेन से संबंधित था. सेबी ने कहा कि प्रतिभूति धोखाधड़ी, शेयरधारकों को गलत तरीके से निवेश के लिए प्रेरित करने या MFSL के शेयर मूल्य में हेरफेर के आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले.
2010 से 2021 तक के लेनदेन की जांच
इस मामले में 2010 से 2021 के बीच मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के शेयरों में हुए कई इक्विटी लेनदेन की जांच की गई थी. नियामक ने यह भी जांच की कि क्या इन लेनदेन की संरचना बीमा कमीशन पर लागू सीमा से बचने के लिए तैयार की गई थी और क्या इससे MFSL के शेयरधारकों को नुकसान हुआ. सेबी की कार्यवाही में मैक्स लाइफ इंश्योरेंस, एक्सिस कैपिटल, एक्सिस सिक्योरिटीज और कंपनियों के कुछ प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों को भी शामिल किया गया था.
IRDAI की कार्रवाई के बाद शुरू हुई थी जांच
सेबी की जांच नवंबर 2022 में भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) की ओर से मिली जानकारी के बाद शुरू हुई थी. यह जानकारी मैक्स लाइफ के गैर-सूचीबद्ध शेयरों से जुड़े लेनदेन को लेकर दी गई थी. इससे पहले IRDAI ने कुछ लेनदेन में बीमा कमीशन की निर्धारित सीमा से बचने का मामला पाए जाने के बाद एक्सिस बैंक पर 2 करोड़ रुपये और मैक्स लाइफ पर 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था.
मामले के अनुसार, एक्सिस बैंक को मैक्स लाइफ के शेयर 10 रुपये के अंकित मूल्य पर मिले थे. इसके बाद MFSL और उसके साझेदारों ने उचित बाजार मूल्य के आधार पर 54 रुपये से 166 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर इन शेयरों को दोबारा खरीदा था.
सेबी के कारण बताओ नोटिस में आरोप लगाया गया था कि ये लेनदेन एक्सिस बैंक को बैंकएश्योरेंस साझेदारी के लिए मुआवजा देने वाली एक व्यापक व्यवस्था का हिस्सा थे. इससे MFSL को कथित तौर पर 3,911.95 करोड़ रुपये का नुकसान और एक्सिस समूह की संस्थाओं को लाभ होने का आरोप था.
प्रतिभूति कानून के तहत धोखाधड़ी के सबूत नहीं मिले
सेबी ने निष्कर्ष निकाला कि बीमा क्षेत्र से जुड़े नियमों का उल्लंघन या उनसे बचने की कोशिश अपने आप में प्रतिभूति कानूनों के तहत धोखाधड़ी साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है. नियामक को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि शेयरधारकों को गलत जानकारी के आधार पर शेयरों में कारोबार करने के लिए प्रेरित किया गया था या MFSL के शेयर मूल्य में कृत्रिम तरीके से हेरफेर किया गया.
खुलासे से जुड़े आरोप भी खारिज
सेबी ने 2010 और 2015 में किए गए समझौतों से जुड़े पुट और कॉल विकल्पों की पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने के आरोपों की भी जांच की. नियामक के अनुसार, शुरुआती कुछ खुलासों में लेनदेन की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी, लेकिन उस समय लागू नियमों के आधार पर इसकी समीक्षा की गई.
दिसंबर 2015 से पहले के लेनदेन उस समय लागू लिस्टिंग एग्रीमेंट के तहत आते थे. इसमें बाद में लागू हुए लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) नियमों की तरह मात्रात्मक महत्वपूर्णता की सीमा तय नहीं थी.
सेबी ने इन आरोपों से जुड़ी कार्यवाही भी खत्म कर दी. नियामक ने कहा कि कारण बताओ नोटिस में यह स्थापित नहीं किया गया था कि कथित तौर पर छूटी हुई जानकारी का MFSL के कारोबार या शेयर के मूल्य निर्धारण पर क्या प्रभाव पड़ा. मुख्य धोखाधड़ी और खुलासे से जुड़े आरोप साबित नहीं होने के बाद सेबी ने मामले में नामित प्रमुख प्रबंधकीय अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही भी खारिज कर दी.
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