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भारत के वैकल्पिक परिसंपत्ति बाजार में गाजा कैपिटल ने रचा इतिहास

गोपाल जैन ने कहा, हमने 1 लाख रुपये से शुरुआत की थी. आईपीओ के बाद हमारी कीमत 1 लाख करोड़ रुपये होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

उर्वी श्रीवास्तव

गाजा कैपिटल ब्रांड के तहत काम करने वाली गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट ने बुधवार को शेयर बाजार में पदार्पण किया. इसके साथ ही यह भारत की पहली सूचीबद्ध वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी बन गई और देश के तेजी से विस्तार कर रहे निजी पूंजी उद्योग में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई.

यह लिस्टिंग गाजा कैपिटल द्वारा भारतीय कारोबारों में निवेश शुरू करने के दो दशक से अधिक समय बाद और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) के लिए औपचारिक नियामकीय ढांचा तैयार किए जाने के एक दशक से अधिक समय बाद हुई है.

गाजा कैपिटल की एनएसई लिस्टिंग के दौरान औपचारिक दीप प्रज्वलन

कंपनी ने 550 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के बाद सार्वजनिक बाजार में प्रवेश किया. इसमें 450 करोड़ रुपये का नया निर्गम और 100 करोड़ रुपये की बिक्री पेशकश शामिल थी. आईपीओ का मूल्य दायरा 152-160 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था. यह आईपीओ 19 अगस्त को अभिदान के लिए खुला और 21 अगस्त को बंद हुआ. बोली प्रक्रिया के अंत तक इसे 31.33 गुना अभिदान मिला.

इस पदार्पण का महत्व केवल निर्गम के आकार से कहीं अधिक है. जहां कई म्यूचुअल फंड से जुड़ी और पारंपरिक वित्तीय सेवा कंपनियां भारत के शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हो चुकी हैं, वहीं यह लिस्टिंग देश के वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन उद्योग में सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली एक नई खिड़की खोलती है.

गाजा कैपिटल ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर अपनी ऐतिहासिक लिस्टिंग दर्ज की

आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज में कॉरपोरेट फाइनेंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख पिनाक भट्टाचार्य ने कहा, “कई म्यूचुअल फंड सूचीबद्ध हैं, लेकिन यह स्पष्ट रूप से अपनी तरह की पहली सूचीबद्ध कंपनी है. यह पूरी तरह से घरेलू कंपनी है. टीम ने बड़े स्तर पर लाभप्रदता विकसित की है और कंपनी में शासन तथा बोर्ड की कार्यप्रणालियों का स्तर इसे अलग पहचान देता है.”

एआईएफ नियमों से 13.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा पारिस्थितिकी तंत्र

गाजा कैपिटल की लिस्टिंग भारत के वैकल्पिक निवेश परिदृश्य में आए बदलाव की पृष्ठभूमि में हुई है. सेबी ने 2012 में वैकल्पिक निवेश कोष विनियम पेश किए थे, जिसके तहत निजी इक्विटी, वेंचर कैपिटल और अन्य निजी तौर पर जुटाए गए निवेश माध्यमों को एक निर्धारित नियामकीय ढांचे के तहत लाया गया.

इसके बाद से इस उद्योग का तेजी से विस्तार हुआ है. भारत के एआईएफ उद्योग में प्रतिबद्धताएं 13.5 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई हैं. इससे वैकल्पिक निवेश भारतीय वित्तीय क्षेत्र के अपेक्षाकृत छोटे खंड से बढ़कर पूंजी के एक महत्वपूर्ण स्रोत में बदल गया है.

गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट के गैर-कार्यकारी चेयरमैन और सेबी के पूर्व चेयरमैन यू.के. सिन्हा ने कहा, “गाजा दो दशक से अधिक समय से चुपचाप काम कर रहा है. मेरे लिए यह व्यक्तिगत रूप से संतोषजनक है क्योंकि 2012 में, जब मैं सेबी में काम कर रहा था, तब हमने एआईएफ विनियम तैयार किए थे. इससे पहले वैकल्पिक निवेशों से जुड़े नियम स्पष्ट नहीं थे. आज प्रतिबद्धताओं की राशि 13.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है. यह कोई सामान्य लिस्टिंग नहीं है. वित्तीय कंपनियों की लिस्टिंग के मामले में भारत अब विकसित दुनिया के साथ कदम मिला चुका है. आज यह पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के विकास का परिणाम है.”

इस तरह यह लिस्टिंग दो यात्राओं के मिलन को दर्शाती है—एक ओर घरेलू निजी इक्विटी फर्म के रूप में गाजा कैपिटल का एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी में बदलना और दूसरी ओर वैकल्पिक निवेश का भारत की वित्तीय व्यवस्था के एक स्थापित हिस्से के रूप में उभरना.

आईपीओ को मिली मजबूत मांग ने इस प्रस्ताव में निवेशकों की रुचि को भी रेखांकित किया. 550 करोड़ रुपये के इस निर्गम के लिए पेश किए गए शेयरों की तुलना में कई गुना अधिक बोलियां मिलीं और यह 31 गुना से अधिक अभिदान के साथ बंद हुआ.

‘सबसे अच्छी निजी इक्विटी फर्म भारतीय होगी’

गाजा कैपिटल के लिए शेयर बाजार में पदार्पण भारत की उद्यमशील अर्थव्यवस्था के अगले चरण पर भी एक दांव है. खासतौर पर उन कारोबारों के साथ घरेलू पूंजी को जोड़ने का अवसर, जिन्हें विस्तार के लिए वित्त की जरूरत है.

गाजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोपाल जैन ने कहा, “भारत में पूंजी के बिना प्रतिभा है और प्रतिभा के बिना पूंजी है. हमने पिछले 22 वर्षों में पहली समस्या पर काम किया है. अब हम दूसरी समस्या पर काम कर रहे हैं. हमने भारत को एक उद्यमशील अर्थव्यवस्था बनते देखा है. हमारी लिस्टिंग पूंजी तक पहुंच की कमी को दूर करती है.”

भारत के निजी इक्विटी पारिस्थितिकी तंत्र के परिपक्व होने के साथ कंपनी का स्वतंत्र और घरेलू होने पर जोर और महत्वपूर्ण हो जाता है. वैश्विक निजी इक्विटी कंपनियों ने ऐतिहासिक रूप से देश के संस्थागत वैकल्पिक निवेश परिदृश्य में बड़ी भूमिका निभाई है, जबकि भारतीय प्रबंधकों ने धीरे-धीरे बड़े पूंजीगत कोष और निवेश का ट्रैक रिकॉर्ड तैयार किया है.

जैन ने कहा, “हम स्वतंत्र हैं, हम घरेलू हैं. हमारे पास विदेशी उद्योग का हिस्सा बनने के कई अवसर थे. आज से 20 साल बाद सबसे अच्छी निजी इक्विटी फर्म एक भारतीय फर्म होगी.”

यह लिस्टिंग गाजा को खुद भी कारोबारों में निवेश करने वाली कंपनी से बदलकर ऐसा कारोबार बनाती है, जिसमें शेयर बाजार के निवेशक हिस्सेदारी ले सकते हैं. इससे उस उद्योग तक पहुंच व्यापक होती है, जो पारंपरिक रूप से मुख्य रूप से संस्थागत और संपन्न निवेशकों के लिए उपलब्ध रहा है.

दो दशक से अधिक समय पहले मामूली पूंजी से शुरुआत करने वाली कंपनी के लिए यह अवसर प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा. जैन ने कहा, “हमने 1 लाख रुपये से शुरुआत की थी. आईपीओ के बाद हमारी कीमत 1 लाख करोड़ रुपये होगी.”

आखिरकार यह पदार्पण दलाल स्ट्रीट पर एक और आईपीओ आने से कहीं अधिक है. इसने पहली बार एक घरेलू वैकल्पिक परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी को भारत के सार्वजनिक बाजार में जगह दी है और इस तरह ऐसी कंपनी, जिसका कारोबार दूसरी कंपनियों में निवेश करने पर आधारित है, खुद सूचीबद्ध कंपनियों की दुनिया का हिस्सा बन गई है.

उर्वी श्रीवास्तव, BW रिपोर्टर्स

(उर्वी श्रीवास्तव बीडब्ल्यू बिजनेसवर्ल्ड में सहायक संपादक हैं, जहां वह शेयर बाजार, सार्वजनिक बाजार, ऊर्जा, सौर ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी खबरें लिखती हैं. उनका काम भारत के आर्थिक और औद्योगिक बदलाव को आगे बढ़ाने वाली गतिविधियों पर केंद्रित है. वह पूंजी प्रवाह, नीतिगत बदलाव और टिकाऊ विकास से जुड़े रुझानों पर नजर रखती हैं.)
 


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