होम / बिजनेस / दूरदर्शन से सैटेलाइट टीवी तक, मार्कंड अधिकारी ने ऐसे बदली भारतीय टेलीविजन की तस्वीर
दूरदर्शन से सैटेलाइट टीवी तक, मार्कंड अधिकारी ने ऐसे बदली भारतीय टेलीविजन की तस्वीर
70 साल के हुए मीडिया दिग्गज मार्कंड अधिकारी, चार दशकों के करियर में टीवी के प्रारूप, अर्थशास्त्र और कारोबार को दिया नया आकार
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारतीय टेलीविजन के विकास की कहानी कई मायनों में मार्कंड अधिकारी के सफर से भी जुड़ी हुई है. ऐसे दौर में जब भारत में टेलीविजन का मतलब मुख्य रूप से दूरदर्शन था, मार्कंड अधिकारी ने कार्यक्रमों के निर्माण, वित्तपोषण और दर्शकों तक उनकी पहुंच के नए तरीकों पर प्रयोग शुरू कर दिए थे.
26 अगस्त को 70 वर्ष के हुए मार्कंड अधिकारी ने चार दशक से अधिक लंबे अपने करियर में भारतीय टेलीविजन के कई महत्वपूर्ण बदलावों को करीब से देखा और उनमें योगदान दिया. दूरदर्शन के दौर से लेकर सैटेलाइट टेलीविजन, विशेष चैनलों और डिजिटल कंटेंट तक, उन्होंने मीडिया कारोबार में आने वाले बदलावों को मुख्यधारा में आने से पहले पहचानने की क्षमता दिखाई.
अपने दिवंगत भाई गौतम अधिकारी के साथ उन्होंने श्री अधिकारी ब्रदर्स की स्थापना की, जिसे बाद में एसएबी ग्रुप के नाम से जाना गया. परिवार द्वारा संचालित प्रोडक्शन कारोबार से शुरू हुआ यह समूह आगे चलकर टेलीविजन निर्माण, प्रसारण, फिल्मों, वितरण, डिजिटल कंटेंट, विजुअल इफेक्ट्स, प्रकाशन और समाचार एवं समसामयिक मामलों तक फैल गया.
इस विस्तार के केंद्र में दर्शकों की पसंद, कार्यक्रमों के प्रारूप और रचनात्मक कारोबार को टिकाऊ बनाने वाली व्यावसायिक व्यवस्था को समझने की उनकी क्षमता रही.
टेलीविजन के अर्थशास्त्र में बदलाव
मार्कंड अधिकारी के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक दूरदर्शन के दौर में देखने को मिला. 1980 के दशक में श्री अधिकारी ब्रदर्स उन शुरुआती स्वतंत्र प्रोडक्शन हाउस में शामिल था, जिसने सार्वजनिक प्रसारक के लिए व्यावसायिक कार्यक्रम और धारावाहिक तैयार किए.
मार्कंड अधिकारी को भारतीय टेलीविजन पर प्रायोजन आधारित कार्यक्रमों को शुरू करने और लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए जाना जाता है. उस समय टेलीविजन कार्यक्रमों के निर्माण और वित्तपोषण का मॉडल अभी विकसित हो रहा था. ऐसे में इस मॉडल ने विज्ञापनदाताओं को सीधे कार्यक्रम निर्माण की व्यवस्था से जोड़ दिया.
यह केवल विज्ञापन के क्षेत्र में बदलाव नहीं था. इससे स्वतंत्र रूप से बनाए जाने वाले टेलीविजन कंटेंट के लिए व्यावसायिक आधार तैयार हुआ और प्रोडक्शन हाउस के लिए कंटेंट के बौद्धिक संपदा अधिकारों को बनाए रखना संभव हुआ. आगे चलकर यह मॉडल भारतीय प्रसारण उद्योग के अर्थशास्त्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया.
सैटेलाइट टीवी के दौर को पहचाना
मार्कंड अधिकारी और उनके भाई ने यह भी जल्दी समझ लिया था कि टेलीविजन दर्शक आगे चलकर अधिक विविधता की मांग करेंगे. निजी सैटेलाइट प्रसारण के विस्तार के साथ श्री अधिकारी ब्रदर्स शुरुआती प्रोडक्शन हाउस में शामिल रहा, जिसने जी टीवी के लिए फिक्शन और मनोरंजन कार्यक्रम तैयार किए.
इन शुरुआती सफल कार्यक्रमों में ‘कमांडर’ शामिल था, जिसे दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता मिली. कंपनी ने ‘फिलिप्स टॉप 10’ भी बनाया, जिसमें संगीत की उलटी गिनती को कॉमेडी और प्रदर्शन के साथ जोड़ा गया था. इसकी अलग प्रस्तुति ने इसे पारंपरिक संगीत कार्यक्रमों से अलग पहचान दी.
यादगार टेलीविजन प्रारूपों का निर्माण
दूरदर्शन के डीडी मेट्रो के विस्तार ने भी श्री अधिकारी ब्रदर्स के लिए नए अवसर पैदा किए. कंपनी ने 1990 के दशक में भारतीय टेलीविजन के कई लोकप्रिय कार्यक्रमों का निर्माण किया. इनमें ‘श्रीमान श्रीमती’, ‘ऑल द बेस्ट’ और बाद में ‘हैलो इंस्पेक्टर’ जैसे कार्यक्रम शामिल रहे.
इनमें ‘श्रीमान श्रीमती’ उस दौर के सबसे यादगार हास्य धारावाहिकों में शामिल रहा. इसके किरदार और परिस्थितिजन्य हास्य ने लंबे समय तक दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाए रखी. इसने दिखाया कि मजबूत टेलीविजन बौद्धिक संपदा लंबे समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय रह सकती है.
श्री अधिकारी ब्रदर्स ने नियमित धारावाहिकों से आगे भी प्रयोग किए. करीब तीन दशक पहले कंपनी ने मधू और अयूब खान अभिनीत ‘चेहरा’ का निर्माण किया था. यह टेलीविजन के लिए तैयार की गई मूल फीचर फिल्म थी. यह प्रयोग बाद में टेलीविजन नेटवर्क और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर घर बैठे दर्शकों के लिए फिल्में तैयार करने की व्यापक प्रवृत्ति से पहले का कदम था.
विदेशों में भी बनाया कंटेंट
कंपनी का लक्ष्य केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं था. श्री अधिकारी ब्रदर्स शुरुआती भारतीय प्रोडक्शन हाउस में शामिल था, जिसने ब्रिटेन और अमेरिका में टीवी एशिया के लिए मूल फिक्शन कंटेंट तैयार किया. यह उस समय की बात है जब भारतीय प्रवासी दर्शकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंटेंट वितरण अभी सामान्य व्यावसायिक मॉडल नहीं बना था.
1995 में कंपनी ने एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट उपलब्धि हासिल की और भारत की पहली सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध टेलीविजन प्रोडक्शन कंपनी बनी. बीएसई और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग ने यह संकेत दिया कि टेलीविजन प्रोडक्शन को केवल रचनात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि विस्तार योग्य और निवेश योग्य कारोबार के रूप में भी देखा जा सकता है.
कॉमेडी के दम पर बनाया अलग चैनल
साल 2000 में एसएबी टीवी की शुरुआत के साथ समूह ने केवल कार्यक्रम बनाने और बेचने से आगे बढ़कर अपना टेलीविजन चैनल संचालित करने की दिशा में कदम बढ़ाया.
उस समय हिंदी सामान्य मनोरंजन टेलीविजन पर पारिवारिक धारावाहिकों और तेजी से लोकप्रिय हो रहे ‘सास-बहू’ प्रारूप का दबदबा था. इसके विपरीत एसएबी टीवी ने हास्य और हल्के-फुल्के मनोरंजन को अपनी पहचान बनाया.
‘ऑफिस ऑफिस’ और ‘यस बॉस’ जैसे कार्यक्रमों ने चैनल को अलग पहचान दिलाई. कॉमेडी पर केंद्रित यह रणनीति इस सोच को दर्शाती थी कि नए चैनल के लिए बड़े खिलाड़ियों की नकल करना जरूरी नहीं है. वह किसी खास विधा और दर्शकों के भावनात्मक जुड़ाव वाले क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाकर भी मजबूत दर्शक आधार तैयार कर सकता है.
2005 में सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन ने एसएबी टीवी का अधिग्रहण कर लिया. इसके बावजूद कॉमेडी और पारिवारिक मनोरंजन के साथ चैनल की पहचान आज भी उस मूल रणनीति की सफलता को दर्शाती है.
विशेष दर्शकों के लिए चैनलों पर जोर
मार्कंड अधिकारी ने विशेष प्रसारण मॉडल पर भी प्रयोग जारी रखे. 2006 में शुरू हुआ जनमत एक इंटरैक्टिव और चर्चा आधारित समाचार एवं समसामयिक मामलों का चैनल था.
इसके बाद समूह ने क्षेत्रीय और लक्षित दर्शकों के लिए मी मराठी, मस्ती, दबंग, धमाल और दिल्लगी जैसे उपक्रमों के जरिए प्रसारण कारोबार का विस्तार किया.
इन सभी प्रयासों में एक समान रणनीति दिखाई देती है—ऐसे दर्शक वर्ग या विधा की पहचान करना, जिसकी जरूरत पर्याप्त रूप से पूरी नहीं हो रही थी और फिर उसके लिए स्पष्ट पहचान वाला मंच तैयार करना.
5,000 घंटे से अधिक का कंटेंट संग्रह
समय के साथ श्री अधिकारी ब्रदर्स ने 5,000 घंटे से अधिक का कंटेंट संग्रह तैयार किया. डिजिटल सिंडिकेशन और स्ट्रीमिंग के दौर में पुराने कंटेंट और अभिलेखागार की बढ़ती अहमियत को देखते हुए यह संग्रह सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ दीर्घकालिक व्यावसायिक संपत्ति भी है.
अगस्त 2024 में मार्कंड अधिकारी ने श्री अधिकारी ब्रदर्स टेलीविजन नेटवर्क के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के पद से हटकर चेयरमैन एमेरिटस की जिम्मेदारी संभाली. यह उनके लंबे करियर के बाद परिचालन जिम्मेदारी के औपचारिक हस्तांतरण का महत्वपूर्ण पड़ाव था.
कार्यक्रमों और चैनलों से कहीं बड़ी है विरासत
मार्कंड अधिकारी की विरासत केवल उनके बनाए कार्यक्रमों या लॉन्च किए गए चैनलों तक सीमित नहीं है. उनका योगदान उन कारोबारी मॉडलों में भी दिखाई देता है, जिन्हें उन्होंने आगे बढ़ाया. इनमें प्रायोजन आधारित कार्यक्रम, कंटेंट अधिकारों का स्वामित्व, विधा आधारित प्रसारण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंटेंट निर्माण और टेलीविजन प्रोडक्शन को एक संगठित कॉरपोरेट कारोबार के रूप में स्थापित करना शामिल है.
70 वर्ष की उम्र में मार्कंड अधिकारी उस पीढ़ी का हिस्सा हैं, जिसने केवल भारतीय टेलीविजन के विकास में भाग नहीं लिया, बल्कि उस उद्योग की कई बुनियादी संरचनाओं को आकार देने में भी भूमिका निभाई.
दूरदर्शन से सैटेलाइट प्रसारण और सामान्य मनोरंजन से विशेष चैनलों तक, उनके करियर की सबसे बड़ी खासियत नए अवसरों को दूसरों से पहले पहचानने की रही है.
तकनीक से लगातार बदलते मीडिया उद्योग में, जहां कहानियां आज भी कारोबार की बुनियाद हैं, बदलाव को समय से पहले पहचानने की यही क्षमता मार्कंड अधिकारी की सबसे स्थायी विरासत मानी जा सकती है.
टैग्स