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होर्मुज संकट के बीच भारत का मास्टरप्लान, खाड़ी से घटा गैस आयात तो अमेरिका से बढ़ाई खरीद
जलडमरूमध्य में संकट से खाड़ी देशों से गैस सप्लाई प्रभावित, अगस्त में अमेरिका से 0.62 मिलियन टन LPG और 0.75 मिलियन टन LNG का आयात
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 hours ago
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारत ने अपनी गैस सप्लाई रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने अमेरिका से LPG और LNG का आयात बढ़ा दिया है. केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत ने अमेरिका से करीब 0.62 मिलियन टन LPG आयात की, जबकि LNG के मामले में भी अमेरिका से करीब 0.75 मिलियन टन की खरीद हुई. वहीं, कच्चे तेल के मोर्चे पर रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है.
अमेरिका बना LPG का बड़ा सप्लायर
अमेरिका से भारत की LPG खरीद में हाल के महीनों में तेजी आई है. अगस्त में अमेरिका से करीब 0.62 मिलियन टन LPG आयात की गई, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 0.89 मिलियन टन था. केपलर के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में अमेरिका से हुई LPG खरीद भारत के कुल LPG आयात का 73 फीसदी से अधिक रही. इसके उलट खाड़ी देशों से LPG की सप्लाई में बड़ी गिरावट आई है. अगस्त में UAE से भारत को सिर्फ करीब 1.40 लाख टन LPG मिली. कतर से करीब 60 हजार टन की सप्लाई हुई, जबकि सऊदी अरब से जुलाई और अगस्त में कोई सप्लाई नहीं हुई.
LNG सप्लाई में भी बदला समीकरण
LNG के मामले में भी भारत ने अमेरिका की ओर रुख बढ़ाया है. कतर से LNG की सप्लाई अप्रैल में शून्य हो गई थी, जबकि अगस्त में भारत ने अमेरिका से करीब 0.75 मिलियन टन LNG खरीदी. इससे साफ है कि पश्चिम एशिया में सप्लाई बाधित होने की स्थिति में भारत वैकल्पिक स्रोतों से अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की कोशिश कर रहा है.
अमेरिका से गैस मंगाना पड़ रहा महंगा
खाड़ी देशों की तुलना में अमेरिका से लंबी दूरी से गैस आयात करने का असर लागत पर भी पड़ रहा है. विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबी दूरी की समुद्री सप्लाई में मालभाड़ा और बीमा लागत अधिक होती है. इसके अलावा वैश्विक बाजार में गैस की सप्लाई सीमित होने से कीमतों पर भी दबाव बढ़ा है.
ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई चेन में यह बदलाव तुरंत नहीं होता, क्योंकि ऊर्जा व्यापार में पहले से किए गए दीर्घकालिक अनुबंध भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
कच्चे तेल के लिए रूस पर भरोसा कायम
LPG और LNG के लिए अमेरिका पर निर्भरता बढ़ाने के बावजूद कच्चे तेल के मामले में भारत की रूस पर निर्भरता बनी हुई है. अगस्त में भारत ने रूस से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया. यह मात्रा दूसरे सबसे बड़े सप्लायर UAE से करीब तीन गुना अधिक रही.
जानकारों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में रूसी कच्चे तेल को पूरी तरह दूसरे स्रोतों से बदलना भारत के लिए तकनीकी और आर्थिक रूप से मुश्किल है. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर पाइपलाइन और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के कारण UAE से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई भी काफी हद तक स्थिर बनी हुई है.
वेनेजुएला से भी बढ़ा कच्चे तेल का आयात
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सप्लाई स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है. इसी रणनीति के तहत वेनेजुएला भी एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है. अगस्त में भारत ने वेनेजुएला से करीब 3.83 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया.
वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयोगी माना जाता है. हालांकि, अमेरिकी रिफाइनरियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण इसकी उपलब्धता सीमित रहने की आशंका है.
एक देश या क्षेत्र पर निर्भरता घटाने की कोशिश
पश्चिम एशिया के संकट ने भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में सप्लाई स्रोतों का विविधीकरण तेज करने के लिए मजबूर किया है. LPG और LNG के लिए अमेरिका, कच्चे तेल के लिए रूस और UAE तथा अतिरिक्त विकल्प के तौर पर वेनेजुएला से आयात बढ़ाकर भारत एक व्यापक ऊर्जा सप्लाई नेटवर्क तैयार कर रहा है. इससे किसी एक क्षेत्र में भू-राजनीतिक संकट या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
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