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भारत में तेजी से बढ़ रहा डेटा सेंटर बाजार, 2030 तक 101 मिलियन वर्ग फुट होगा फुटप्रिंट: रिपोर्ट
भारत में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है. Anarock Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में डेटा सेंटर का कुल फुटप्रिंट 2030 तक 101 मिलियन वर्ग फुट से अधिक पहुंच सकता है. वहीं, अगले चरण के विस्तार के लिए 300 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आई हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
भारत का डेटा सेंटर उद्योग अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनता जा रहा है. देश में डेटा की खपत और उत्पादन बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. Anarock Capital की रिपोर्ट ‘डेटा सेंटर: द ब्लूप्रिंट ऑफ द डिजिटल फोर्ट्रेस इन इंडिया’ के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर का कुल फुटप्रिंट 2030 तक 101 मिलियन वर्ग फुट से अधिक हो सकता है. 2007 में यह महज 0.6 मिलियन वर्ग फुट था, जो H1 2026 तक बढ़कर करीब 27 मिलियन वर्ग फुट हो गया है. आगामी आपूर्ति और विस्तार को 300 अरब डॉलर से अधिक की निवेश प्रतिबद्धताओं से समर्थन मिलने की उम्मीद है.
H1 2026 तक डेटा सेंटर क्षमता 1.8 गीगावाट से अधिक
रिपोर्ट के मुताबिक, H1 2026 तक भारत में डेटा सेंटर की आईटी क्षमता 1.8 गीगावाट से अधिक हो चुकी है. अगले चार वर्षों में विकासाधीन परियोजनाओं के कारण यह क्षमता 6.7 गीगावाट से अधिक हो सकती है, यानी मौजूदा स्तर के मुकाबले करीब तीन गुना वृद्धि की संभावना है.
Anarock Capital के सीईओ शोभित अग्रवाल के अनुसार, 101 मिलियन वर्ग फुट का अनुमानित डेटा सेंटर फुटप्रिंट रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े अवसर को दर्शाता है. डेटा सेंटर सामान्य कार्यालय या औद्योगिक परियोजनाओं से अलग होते हैं, क्योंकि इनके लिए बड़े भूखंड, पर्याप्त बिजली क्षमता, आधुनिक कूलिंग सिस्टम, मजबूत कनेक्टिविटी और उच्च स्तर की परिचालन क्षमता जरूरी होती है.
उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर का विस्तार केवल अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र की मांग नहीं पैदा करेगा, बल्कि यह रियल एस्टेट, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर के संगम पर स्थित एक विशेष एसेट क्लास के रूप में विकसित होगा. इसके साथ रणनीतिक स्थानों पर जमीन, बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग एवं निर्माण सेवाओं, फाइबर कनेक्टिविटी और विशेष कूलिंग समाधानों की मांग भी बढ़ेगी.
मुंबई-एमएमआर सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब
भारत में मुंबई-एमएमआर डेटा सेंटर का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. क्षेत्र में 54 परिचालन डेटा सेंटर हैं, जिनकी आईटी क्षमता 812 मेगावाट है. इसके बाद चेन्नई का स्थान है, जहां 25 डेटा सेंटर और 298 मेगावाट की क्षमता है.
दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु में 18-18 परिचालन डेटा सेंटर हैं. इनकी आईटी क्षमता क्रमशः 179 मेगावाट और 137 मेगावाट है. वहीं, हैदराबाद में 12 डेटा सेंटर हैं, जिनकी आईटी क्षमता 178 मेगावाट है.
इन डेटा सेंटर क्लस्टर्स के विकास में जमीन और बिजली की उपलब्धता, नेटवर्क कनेक्टिविटी, नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच और प्रमुख मांग केंद्रों से नजदीकी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इससे स्थापित डेटा सेंटर हब के अलावा अन्य शहरों में भी रियल एस्टेट विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं.
एआई बढ़ाएगा डेटा सेंटर की मांग
रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को डेटा सेंटर की मौजूदा और भविष्य की मांग के प्रमुख कारकों में से एक बताया गया है. एआई मॉडल को पारंपरिक डिजिटल एप्लीकेशन की तुलना में कहीं अधिक कंप्यूटिंग पावर, स्टोरेज क्षमता और ऊर्जा की जरूरत होती है. ऐसे में एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर की डिजाइन और इंजीनियरिंग जरूरतें भी बदलेंगी.
पावर, जमीन और कनेक्टिविटी सबसे बड़ी जरूरत
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में डेटा सेंटर उद्योग के अगले चरण की वृद्धि मुख्य रूप से बिजली, जमीन और कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगी. विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, उपयुक्त जमीन, तेज कनेक्टिविटी और नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता यह तय करेगी कि भविष्य में डेटा सेंटर क्षमता कहां विकसित की जाएगी.
इस विस्तार का असर केवल डेटा सेंटर उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा. रिपोर्ट के अनुसार, इससे भारत के प्रमुख डिजिटल बाजारों में जमीन के इस्तेमाल के तरीके, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और पूरे कमर्शियल रियल एस्टेट परिदृश्य में भी बदलाव आने की संभावना है.
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