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क्या डिजिटल न्‍यूज पब्लिशर्स का मोबाइल ट्रैफिक कम हो रहा है ? जानिए क्‍या है हकीकत

इसके पीछे की प्रमुख वजहों में डेटा और समाचार की खपत में गिरावट सहित मोबाइल फोन की बिक्री और इंटरनेट की वृद्धि में गिरावट इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

भारत में भले ही अब तक एआई-सक्षम चैटबॉट मुख्यधारा में नहीं आए हैं लेकिन हालिया तौर पर सामने आए एक आंकड़े ने डिजिटल समाचार प्रकाशकों के लिए परेशानी पैदा कर दी है. आंकड़े बता रहे हैं कि डिजिटल समाचार प्रकाशकों ने कई कारणों से पिछले कुछ महीनों में अपने मोबाइल ट्रैफ़िक का 20-40 प्रतिशत खो दिया है, इसके पीछे की प्रमुख वजहों में मोबाइल फोन की बिक्री में कमी, डेटा और समाचार की खपत में कमी सहित कई अन्‍य कारण हैं.

क्‍या है मोबाइल ट्रैफिक गिरने की वजह 
इसके पीछे की कई वजहों में एक मोबाइल फोन की बिक्री में गिरावट, डेटा की खपत में गिरावट, इंटरनेट की सुस्त वृद्धि और समाचार की खपत में गिरावट को समाचार वेबसाइटों पर आने वाले रेफ़रल ट्रैफ़िक में कमी के प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा रहा है. हालात ये हैं कि कई बड़े प्रकाशकों ने पिछले कुछ महीनों में 20 साल से 40 साल का मोबाइल ट्रैफिक खो दिया है. गिरावट के कारण माना जा रहा है कि 2022 में स्मार्टफोन की बिक्री में 10 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है. इस इंडस्‍ट्री से जुड़े एक वरिष्‍ठ अधिकारी कहते हैं पिछले दो महीनों में गिरावट महत्वपूर्ण थी.

अभी तक प्री कोविड लेवल पर नहीं पहुंचे मीडिया हाउस 
एक क्षेत्रीय प्रकाशक ने दावा किया, वे इसके बारे में सार्वजनिक रूप से बात नहीं करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें निवेशकों को दिखाना है कि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म अच्छा कर रहे हैं. डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने कई अनुरोधों के बावजूद इस संबंध में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया. यह कई मीडिया घरानों, विशेष रूप से समाचार पत्रों के लिए एक दोहरे झटके के रूप में आया है, जो महामारी के दौरान विज्ञापन राजस्व का एक बड़ा हिस्सा खो चुके थे और अभी भी पूर्व-कोविड स्तर पर वापस नहीं आए हैं.

माइक्रोसॉफ्ट और गूगल द्वारा लॉन्च किए गए एआई-चैटबॉट्स के प्रवेश से खोज के माध्यम से उनके लिए डायवर्ट किए गए उनके रेफ़रल ट्रैफ़िक में और कमी आने की संभावना है, प्रकाशक के आधार पर, समाचार वेबसाइटों पर 70 से 90 प्रतिशत ट्रैफ़िक मोबाइल का होता है उद्योग के नेताओं का कहना है कि विज्ञापन राजस्व में उनकी हिस्सेदारी ज्यादातर उसी अनुपात में है, हालांकि डेस्कटॉप ट्रैफिक को थोड़ा अधिक राजस्व मिलता है. एक्‍सचेंज फॉर मीडिया इसे पहले ही रिपोर्ट कर चुका है.

एक सीनियर लीडर ने कहा, 'डेस्कटॉप का ऐड रेवेन्यू शेयर आमतौर पर मोबाइल फोन के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा होता है. इसलिए यदि किसी दिए गए प्रकाशक के लिए डेस्कटॉप पर 30 प्रतिशत ट्रैफ़िक है, तो उसके पास राजस्व का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा होगा. जबकि समाचार वेबसाइटों को उसके पाठकों से सीधा ट्रैफ़िक मिलता है, इसका अधिकांश हिस्सा Google खोज के माध्यम से आता है. वित्त वर्ष 22 में अकेले Google ने भारत में 25,000 करोड़ रुपये का विज्ञापन राजस्व अर्जित किया, जिसका एक हिस्सा डिजिटल प्रकाशकों के साथ साझा किया गया.

क्‍या महंगाई भी है इसकी एक वजह 
इंटरनेशनल डेटा कॉरपोरेशन (IDC) के वर्ल्डवाइड क्वार्टरली मोबाइल फोन ट्रैकर के अनुसार, 2022 में भारत का स्मार्टफोन बाजार 10% घटकर 144 मिलियन यूनिट रह गया. यह 2019 के बाद से सबसे कम आंकड़ा है, जिसमें 10% की गिरावट YoY (वर्ष-दर-वर्ष) है. पिछली तिमाही विशेष रूप से खराब थी जब शिपमेंट 27% घटकर 30 मिलियन यूनिट हो गया. घटती मांग के लिए मुद्रास्फीति के कारण मोबाइल फोन की कीमतों में भारी वृद्धि को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.

उपासना जोशी, रिसर्च मैनेजर, क्लाइंट डिवाइसेस, आईडीसी इंडिया अपने एक स्‍टेटमेंट में कहती हैं कि एएसपी (औसत बिक्री मूल्य) ने 2022 में 18% की वृद्धि के साथ US $ 224 का रिकॉर्ड बनाया. एंट्री-लेवल सेगमेंट (उप-US $ 150) बाजार के 46% तक सिकुड़ गया, जो एक साल पहले 54% था. इस क्रिटिकल मास सेगमेंट में नए लॉन्च की कमी नए स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए एक बाधा थी, इस प्रकार समग्र बाजार के विकास को सीमित कर दिया, एक टीवी चैनल के कार्यकारी ने कहा, जबकि निम्न आय वर्ग मुद्रास्फीति और आर्थिक बाधाओं के कारण स्मार्टफोन खरीदने में सक्षम नहीं है, जिनके पास फोन हैं वे उस तरह से सामग्री का उपभोग नहीं कर रहे हैं जिस तरह से वे महामारी के दौरान करते थे क्योंकि व्यवसाय और स्कूल अब खुले हैं.

लगातार मोबाइल के घटते ग्राहक 
ऐसा प्रतीत होता है कि भारत में इंटरनेट का विकास भी रुक गया है जो दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाइल फोन बाजार का दावा करता है. अक्टूबर 2022 में, देश के दूरसंचार नियामक ट्राई ने 790 मिलियन वायरलेस ब्रॉडबैंड ग्राहकों की गिनती की थी. अगस्त 2021 में दर्ज किए गए ग्राहकों की तुलना में यह बमुश्किल एक मिलियन अधिक ग्राहक थे. 2016 और 2020 के बीच मोबाइल इंटरनेट ग्राहकों की वृद्धि अब 4% से कम हो गई है. इसका नतीजा यह हुआ कि ब्रॉडबैंड का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या पिछले दो वर्षों से समान स्तर पर बनी हुई है. कॉमस्कोर के आंकड़ों के मुताबिक, सोशल मीडिया, वीडियो या मनोरंजन के लिए इसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब 48.5 करोड़ हो गई है.

समाचारों की खपत प्रभावित हुई

 एक प्रमुख समाचार चैनल प्रमुख ने ई4एम को बताया कि न्यूज डोमेन खुद दबाव में है क्योंकि न्यूज कंजम्पशन धीरे-धीरे कम हो रहा है. भयानक अपराधों और घृणा के मामले वर्तमान प्रवचन पर हावी हैं. अधिकांश मोबाइल उपयोगकर्ता ऐसी सामग्री से तंग आ चुके हैं और समाचार वेबसाइटों पर सर्फिंग करना बंद कर दिया है, जिससे समाचार साइटों पर मोबाइल ट्रैफ़िक में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है,  एक अन्य चैनल के प्रमुख ने स्वीकार किया कि मनोरंजन और सोशल मीडिया की तुलना में समाचारों को अब कम प्राथमिकता दी जाती है. इसके अलावा, ओटीटी और गेमिंग ऐप की खपत में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है, जिसके परिणामस्वरूप अधिक दीवार वाली गार्डन सर्फिंग हुई है और इसलिए समाचार साइटों के वेब ट्रैफिक पर असर पड़ा है. एक प्रमुख मीडिया कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में गूगल सर्च की उपलब्धता ने प्रमुख अंग्रेजी और हिंदी समाचार आउटलेट्स के ट्रैफिक को भी प्रभावित किया है.

घाटे को कम करने के लिए क्षेत्रीय संस्‍करण 
उद्योग के एक नेता ने कहा कि क्षेत्रीय बाजारों में मोबाइल-फर्स्ट उपभोक्ताओं के बीच अपनी पहुंच का विस्तार करने के लिए, एचटी और इंडियन एक्सप्रेस जैसे प्रमुख प्रकाशकों ने अपनी समाचार वेबसाइटों के भाषा संस्करण लॉन्च करना शुरू कर दिया है. एचटी मीडिया ग्रुप ने 2022 में चार डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म- एचटी बांग्ला, एचटी मराठी, एचटी कन्नड़, एचटी तमिल और एचटी तेलुगु लॉन्च किए. इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप ने पिछले साल गुजराती, बांग्ला, मलयालम और तमिल में क्षेत्रीय भाषा की वेबसाइटें भी लॉन्च की है.
 


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