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जून में भारत के सेवा क्षेत्र की रफ्तार धीमी, 17 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा PMI

सेवा क्षेत्र के साथ-साथ जून में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि भी धीमी रही. इसके चलते HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स मई के 59.3 से घटकर जून में 57.7 पर आ गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

भारत के सेवा क्षेत्र (Services Sector) की विकास रफ्तार जून 2026 में कुछ धीमी पड़ गई है. HSBC इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) मई के 58.8 से घटकर जून में 57.4 पर आ गया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे निचला स्तर है. हालांकि यह आंकड़ा अब भी 50 से ऊपर है, जो सेवा क्षेत्र में विस्तार जारी रहने का संकेत देता है. लेकिन घरेलू मांग में नरमी के कारण कारोबारी गतिविधियों की गति कम हुई है.

घरेलू मांग में कमजोरी का असर

HSBC की ताजा सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, जून में नए कारोबार की वृद्धि नवंबर 2023 के बाद सबसे धीमी रही. इसकी मुख्य वजह देश के भीतर उपभोक्ता और कारोबारी खर्च में आई कमी रही. दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले ऑर्डर मजबूत बने रहे, जिससे घरेलू मांग की कमजोरी का कुछ हद तक असर कम हुआ.

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों की रफ्तार घटी

सेवा क्षेत्र के साथ-साथ जून में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि भी धीमी रही. इसके चलते HSBC इंडिया कंपोजिट PMI आउटपुट इंडेक्स मई के 59.3 से घटकर जून में 57.7 पर आ गया. इससे संकेत मिलता है कि निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां अभी भी विस्तार कर रही हैं, लेकिन उनकी गति पहले की तुलना में कम हो गई है.

रोजगार बढ़ा, लेकिन भर्ती की रफ्तार घटी

रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों ने जून में नई भर्तियां जारी रखीं, लेकिन भर्ती की गति पहले के मुकाबले धीमी रही. कारोबारियों ने भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपनाते हुए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में संयम दिखाया.

साथ ही कंपनियों की इनपुट लागत में वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण कई सेवा प्रदाताओं ने अपनी सेवाओं के दाम बढ़ाए. हालांकि आउटपुट कीमतों में बढ़ोतरी का स्तर पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहा.

HSBC की मुख्य अर्थशास्त्री ने क्या कहा

HSBC इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि जून के PMI आंकड़े बताते हैं कि घरेलू मांग में कमजोरी का असर सेवा क्षेत्र की गतिविधियों पर पड़ा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार समर्थन दे रही है. उन्होंने कहा कि नए कारोबार की धीमी वृद्धि का असर रोजगार सृजन पर भी देखने को मिला.

आगे भी विकास जारी रहने की उम्मीद

धीमी रफ्तार के बावजूद कंपनियों का कारोबारी भरोसा सकारात्मक बना हुआ है. व्यवसायों को उम्मीद है कि नए ग्राहकों, बेहतर मार्केटिंग रणनीतियों और अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों के चलते आने वाले एक वर्ष में मांग मजबूत होगी.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का सेवा क्षेत्र अभी भी विकास की राह पर है, लेकिन हाल के महीनों में तेज वृद्धि के बाद अब इसकी गति सामान्य होती दिखाई दे रही है.

घरेलू खपत पर रहेगी नजर

जून के PMI आंकड़े संकेत देते हैं कि आने वाले महीनों में घरेलू खपत भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक होगी. फिलहाल मजबूत निर्यात मांग ने सेवा क्षेत्र को सहारा दिया है, लेकिन दीर्घकालिक गति बनाए रखने के लिए घरेलू खर्च में स्थायी सुधार आवश्यक होगा.


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