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दूसरी तिमाही में 7.3% रह सकती है भारत की विकास दर, पहली तिमाही से धीमी होगी रफ्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूंजीगत और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े सामान का उत्पादन निवेश गतिविधियों में मजबूती के संकेत दे रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 48 minutes ago
वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है. वित्त मंत्रालय की सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, जुलाई-सितंबर तिमाही में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, लेकिन पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत की तेज वृद्धि के मुकाबले रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है. वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और व्यापार मार्गों से जुड़े जोखिमों के बीच घरेलू मांग और निवेश अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं.
पहली तिमाही में 7.8% रही थी GDP ग्रोथ
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी. यह मौजूदा श्रृंखला में पहली तिमाही की सबसे अधिक वृद्धि दर थी. अब दूसरी तिमाही के लिए 7.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां जारी रहीं, हालांकि वृद्धि की गति में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं. ई-वे बिल जारी होने और विनिर्माण क्षेत्र के खरीद प्रबंधक सूचकांक (PMI) की वृद्धि दर में कमी आई है. वहीं, अगस्त में नई मांग और रोजगार में मजबूती के चलते सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार देखा गया.
GST कलेक्शन और बैंक क्रेडिट से मिल रहा सहारा
मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, दूसरी तिमाही की शुरुआत में आर्थिक गतिविधियों को कई उच्च आवृत्ति वाले संकेतकों से समर्थन मिला है. इनमें निर्यात और GST संग्रह प्रमुख हैं. बिजली और ईंधन की खपत में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, जबकि बैंक ऋण की वृद्धि मजबूत बनी हुई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूंजीगत और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े सामान का उत्पादन निवेश गतिविधियों में मजबूती के संकेत दे रहा है. इसके अलावा ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में वाहन बिक्री की गति अच्छी बनी हुई है. इससे घरेलू खपत का आधार व्यापक रहने का संकेत मिलता है.
बेहतर मॉनसून से ग्रामीण मांग को समर्थन
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मॉनसून की स्थिति शुरुआती अनुमान से बेहतर रही है. कई प्रमुख फसलों की खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर के आसपास रही है. इससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग की संभावनाओं को समर्थन मिलने की उम्मीद है. हालांकि, आगे रबी फसल के प्रदर्शन पर नजर रखना जरूरी होगा.
वैश्विक जोखिम अब भी चुनौती
घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेतकों के बावजूद वैश्विक स्तर पर कई जोखिम बने हुए हैं. पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार और व्यापार मार्ग प्रभावित हुए हैं. इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में रणनीतिक बदलाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन बाहरी जोखिमों के बीच आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने के लिए वृहद आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देना और अर्थव्यवस्था की बुनियाद को और मजबूत करना जरूरी होगा.
भारत की साख में सुधार
रिपोर्ट में भारत की क्रेडिट रेटिंग में हालिया सुधार को भी अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद का संकेत बताया गया है. जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने सितंबर 2026 में भारत की रेटिंग को ‘BBB प्लस’ से बढ़ाकर ‘A माइनस’ कर दिया था.
इस तरह दूसरी तिमाही में GDP वृद्धि पहली तिमाही के मुकाबले कुछ धीमी रहने का अनुमान है, लेकिन घरेलू मांग, निवेश, बैंक क्रेडिट, सरकारी राजस्व और बेहतर मॉनसून जैसे कारक अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे हैं.
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