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ट्रेड टेंशन के बीच अमेरिकी कंपनियों को भारत में निवेश का न्योता, पीयूष गोयल ने मैन्युफैक्चरिंग-टेक पर दिया जोर
गोयल ने अमेरिकी कंपनियों के साथ बातचीत में भारत में उच्च-मूल्य वाली क्षमताओं के निर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाने से जुड़े अवसरों को भी रेखांकित किया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका की प्रमुख विनिर्माण और प्रौद्योगिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें भारत में निवेश और कारोबार का विस्तार करने का न्योता दिया है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और शुल्क से जुड़े मुद्दों के बीच हुई इस बैठक में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और सप्लाई चेन के क्षेत्र में कारोबारी अवसरों पर जोर रहा.
अमेरिकी कंपनियों से भारत में निवेश बढ़ाने की अपील
गोयल ने अमेरिका में नेशनल एसोसिएशन ऑफ मैन्युफैक्चरर्स (NAM) की ओर से आयोजित कारोबारी गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया. बैठक में अमेरिकी कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में हो रहे बदलाव और दोनों देशों के बीच कारोबारी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई.
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, गोयल ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में अपने परिचालन, विनिर्माण क्षमता और निवेश का विस्तार करने के लिए आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार कंपनियों के लिए देश में कारोबार बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने के लिए आवश्यक सहयोग देने के लिए तैयार है.
मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी में बड़े अवसर
बैठक के दौरान भारत में विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों को प्रमुखता से रखा गया. इसके साथ ही वैश्विक कंपनियों के लिए भारत को एक महत्वपूर्ण उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला केंद्र के तौर पर विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई.
मंत्रालय के मुताबिक, भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंध अब केवल वस्तुओं के पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं. दोनों देशों के बीच निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और लचीली सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बढ़ रही हैं.
सप्लाई चेन में भारत की भूमिका बढ़ाने पर फोकस
वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को अधिक विविध और लचीला बनाने पर जोर दे रही हैं. ऐसे में भारत विनिर्माण और सप्लाई चेन के लिए एक प्रमुख विकल्प के तौर पर खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है.
गोयल ने अमेरिकी कंपनियों के साथ बातचीत में भारत में उच्च-मूल्य वाली क्षमताओं के निर्माण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाने से जुड़े अवसरों को भी रेखांकित किया.
अमेरिकी कंपनियों ने भी साझा किए कारोबारी अनुभव
बैठक में शामिल अमेरिकी कंपनियों के अधिकारियों ने भारत में उभरते कारोबारी अवसरों को लेकर अपने विचार साझा किए. चर्चा में भारत में कारोबार के विस्तार, निवेश और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दे शामिल रहे.
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तथा शुल्क से जुड़े मुद्दों को लेकर बातचीत जारी है. ऐसे में निवेश और विनिर्माण पर जोर दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में व्यापार के साथ-साथ निवेश को भी महत्वपूर्ण आधार बनाने की कोशिश को दर्शाता है.
रूस से ऊर्जा खरीद पर अतिरिक्त शुल्क का मुद्दा
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के बीच शुल्क का मुद्दा भी अहम बना हुआ है. अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर भारत पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाने के लिए अधिकृत करने वाला कानून पारित किया है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन की ओर से अभी शुल्क की अंतिम दर और इसके दायरे को लेकर अंतिम फैसला घोषित नहीं किया गया है.
ऐसे कारोबारी माहौल में गोयल की अमेरिकी कंपनियों के साथ बैठक का फोकस निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और दीर्घकालिक कारोबारी सहयोग पर रहा.
जी-20 बैठक के लिए अमेरिका में हैं गोयल
गोयल जी-20 देशों के वाणिज्य मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका की एक सप्ताह की यात्रा पर हैं. जी-20 वाणिज्य मंत्रियों की बैठक बुधवार और गुरुवार को मिल्वॉकी में आयोजित की जा रही है.
अमेरिकी कंपनियों के साथ उनकी बैठक को भारत में विदेशी निवेश आकर्षित करने और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में निवेश तथा विनिर्माण के महत्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कारोबारी पहल के तौर पर देखा जा रहा है.
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