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फिजिकल गोल्ड को सिर्फ 2 घंटे में डीमैट में बदल सकेंगे निवेशक, 15 अक्टूबर से NSE शुरू करेगा नई सुविधा
एनएसई इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट को बढ़ावा देने के लिए 15 अक्टूबर से पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा. एक्सचेंज अगले एक साल में संग्रह केंद्रों का नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR) को आम निवेशकों के बीच लोकप्रिय बनाने की तैयारी कर रहा है. एक्सचेंज 15 अक्टूबर से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा, जिसके तहत निवेशक अधिकृत संग्रह केंद्रों पर फिजिकल सोना जमा कर उसे इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट में बदल सकेंगे. सोने की शुद्धता और वजन की जांच पूरी होने के बाद ईजीआर कुछ ही घंटों में निवेशक के डीमैट खाते में दिखाई देगी.
15 अक्टूबर से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
एनएसई की योजना शुरुआत में एक से दो सप्ताह तक पायलट प्रोजेक्ट चलाने की है. इसके बाद इसके दायरे को बढ़ाया जाएगा. एक्सचेंज के मुख्य कारोबार विकास अधिकारी श्रीराम कृष्णन के अनुसार, शुरुआती चरण में करीब 50 से 100 अतिरिक्त संग्रह केंद्रों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है.
एनएसई की योजना अगले एक साल में अधिकृत संग्रह केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाकर 1,000 से अधिक करने की है. आगे चलकर इनकी संख्या कुछ हजार तक पहुंचाने की संभावना भी जताई गई है. ये केंद्र देश के अलग-अलग शहरों में स्थापित किए जाएंगे.
फिजिकल सोने से ईजीआर बनने तक क्या होगा?
पायलट प्रोजेक्ट के तहत निवेशक अपना फिजिकल सोना अधिकृत संग्रह केंद्र पर जमा कर सकेंगे. केंद्र पर सोने के वजन और शुद्धता की जांच की जाएगी. प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके बराबर इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट तैयार की जाएगी, जो निवेशक के डीमैट खाते में दिखाई देगी.
इसके बाद निवेशक इन ईजीआर का एनएसई के ईजीआर सेगमेंट में कारोबार कर सकेंगे. यानी फिजिकल सोने को घर या लॉकर में रखने के बजाय निवेशक उसके स्वामित्व को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखकर एक्सचेंज पर खरीद-बिक्री कर सकेंगे.
छह मूल्यवर्ग में उपलब्ध कराने की तैयारी
ईजीआर को छोटे निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बनाने के लिए एनएसई छह मूल्यवर्ग पेश करने की योजना बना रहा है. इनमें 10 मिलीग्राम, 100 मिलीग्राम, 1 ग्राम, 10 ग्राम, 100 ग्राम और 1 किलोग्राम के ई-गोल्ड शामिल होंगे.
एक्सचेंज के मुताबिक, छोटे मूल्यवर्ग से खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है. साथ ही, इससे बाजार में ईजीआर की मांग और कारोबार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.
ऐप के जरिए भी खरीद-बिक्री की सुविधा
एनएसई 15 अक्टूबर से खुदरा ट्रेडरों और निवेशकों को अपने ऐप के जरिए भी ईजीआर खरीदने और बेचने की सुविधा देने की योजना बना रहा है. इससे ईजीआर बाजार तक छोटे निवेशकों की पहुंच बढ़ सकती है.
ईजीआर ऐसी डीमैट प्रतिभूतियां हैं, जो मान्यता प्राप्त डिपॉजिटरी या तिजोरियों में सुरक्षित रखे गए फिजिकल सोने के स्वामित्व को दर्शाती हैं. इन्हें इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखा जाता है और एक्सचेंज पर इनका कारोबार किया जा सकता है.
अब तक बेहद कम रहा है ईजीआर में कारोबार
एनएसई ने मई में ईजीआर सेगमेंट शुरू किया था, लेकिन शुरुआत के बाद से इसमें कारोबार सीमित रहा है. सितंबर में इस सेगमेंट में रोजाना कारोबार करीब 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये के बीच रहा. इस दौरान प्रतिदिन ट्रेड की संख्या भी करीब 50 रही.
कम कारोबार को देखते हुए एनएसई के सामने ईजीआर बाजार को दो तरफ से विकसित करने की चुनौती है. एक ओर एक्सचेंज को बुलियन विक्रेताओं के जरिए फिजिकल सोने को ईजीआर में बदलने की मात्रा बढ़ानी होगी, वहीं दूसरी ओर छोटे मूल्यवर्ग के जरिए खुदरा निवेशकों के बीच मांग पैदा करनी होगी.
रिफाइनर और तिजोरी प्रबंधकों के साथ करेगा समझौता
ईजीआर व्यवस्था को विस्तार देने के लिए एनएसई रिफाइनरों, गुणवत्ता परखने वाली एजेंसियों, तिजोरी प्रबंधकों और डिपॉजिटरी के साथ समझौते करेगा. इसका उद्देश्य फिजिकल गोल्ड के जमा होने से लेकर ईजीआर बनने और उसके डीमैट खाते में पहुंचने तक पूरी प्रक्रिया को सुचारू बनाना है.
एक्सचेंज के लिए यह भी जरूरी होगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पर्याप्त संग्रह केंद्र उपलब्ध हों, ताकि निवेशकों और बुलियन कारोबारियों के लिए फिजिकल गोल्ड को ईजीआर में बदलना आसान हो सके.
कर व्यवस्था में बदलाव से बढ़ सकती है मांग
उद्योग का मानना है कि ईजीआर को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए कर संबंधी मुद्दों का समाधान जरूरी होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, एक्सचेंजों को दोहरे कराधान से बचने के लिए जीएसटी से जुड़े मुद्दे को नियामकों के सामने उठाना चाहिए. जब तक इस संबंध में स्पष्टता नहीं आती, तब तक ईजीआर की मांग पर दबाव बना रह सकता है. ऐसे में एनएसई का नया पायलट प्रोजेक्ट यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि फिजिकल गोल्ड और एक्सचेंज आधारित इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड के बीच निवेशकों के लिए कितना व्यावहारिक जुड़ाव बन पाता है.
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