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वाटिका ग्रुप के खिलाफ ED का बड़ा एक्शन, ₹260 करोड़ के प्लॉट मामले में CMD अनिल भल्ला समेत दो गिरफ्तार
ईडी की जांच में 22 ऐसी ग्रुप कंपनियों का भी पता चलने की बात कही गई है, जिनमें कोई कर्मचारी नहीं था और न ही कोई स्वतंत्र कारोबारी गतिविधि दिखाई दी. एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों का इस्तेमाल जमीन से जुड़े लेनदेन, कॉरपोरेट गारंटी और जमीन गिरवी रखने जैसे कामों के लिए किया जाता था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
वाटिका ग्रुप के ₹260 करोड़ के प्लॉट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने वाटिका लिमिटेड के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को गिरफ्तार किया है. दोनों को 29 सितंबर को गुरुग्राम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 3 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया. यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में दर्ज कई FIR से जुड़ा है.
2010 से 2012 के बीच लिए गए थे करीब ₹260 करोड़
ईडी के मुताबिक, मामला वाटिका ग्रुप के गुरुग्राम स्थित वाटिका इंडिया नेक्स्ट और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है. 2010 से 2012 के बीच सात अलग-अलग खरीदार संस्थाओं ने सेक्टर 84, 85 और सेक्टर 88A में रेजिडेंशियल प्लॉट बुक किए थे. खरीदारों ने इन प्लॉट्स की पूरी कीमत, करीब ₹260 करोड़, एडवांस में चुका दी थी. इसके बाद 2014-15 में एग्रीमेंट भी किए गए.
जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में प्रोजेक्ट का लेआउट बदला गया और पहले से आवंटित प्लॉट्स के नंबर और लोकेशन में बदलाव कर उन्हें दूसरे खरीदारों को बेच दिया गया. ईडी के अनुसार, करीब 14 साल बीतने के बाद भी वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 में लगभग ₹90 करोड़ मूल्य के प्लॉट की डिलीवरी नहीं हुई, जबकि वाटिका इंडिया नेक्स्ट में करीब ₹140.73 करोड़ मूल्य के प्लॉट की डिलीवरी लंबित है.
22 ग्रुप कंपनियों के जरिए पैसों के ट्रांसफर का आरोप
ईडी की जांच में 22 ऐसी ग्रुप कंपनियों का भी पता चलने की बात कही गई है, जिनमें कोई कर्मचारी नहीं था और न ही कोई स्वतंत्र कारोबारी गतिविधि दिखाई दी. एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों का इस्तेमाल जमीन से जुड़े लेनदेन, कॉरपोरेट गारंटी और जमीन गिरवी रखने जैसे कामों के लिए किया जाता था.
जांच एजेंसी का आरोप है कि खरीदारों से मिले पैसे को संबंधित प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय ऐसी दूसरी ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर किया गया, जिनका संबंधित प्रोजेक्ट से सीधा संबंध नहीं था. ईडी ने इससे पहले भी वाटिका ग्रुप और उसके प्रमोटरों के खिलाफ कार्रवाई की है. नवंबर 2025 में एजेंसी ने करीब ₹108 करोड़ मूल्य की एक कमर्शियल जमीन को अस्थायी रूप से अटैच किया था. इससे पहले करीब ₹68.59 करोड़ की संपत्तियां भी अटैच की गई थीं.
स्केलर वेंचर्स से जुड़े लेनदेन की भी जांच
जांच के दौरान 2024 के एक अन्य लेनदेन की भी जांच की गई. ईडी के मुताबिक, स्केलर वेंचर्स ने सेल एग्रीमेंट और बाय-बैक एग्रीमेंट के तहत वाटिका को ₹473.18 करोड़ दिए थे. एजेंसी का आरोप है कि 165 प्लॉट में से 15 प्लॉट वापस खरीदे गए, जबकि शेष 150 में से 14 प्लॉट स्केलर वेंचर्स की जानकारी के बिना तीसरे पक्ष को करीब ₹13.62 करोड़ में बेच दिए गए. ईडी ने अब तक की जांच में अपराध से संबंधित रकम को ₹154.36 करोड़ आंका है.
तलाशी में कार, सोना और ज्वेलरी जब्त
ईडी ने अगस्त 2026 में वाटिका लिमिटिड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर्स से जुड़े दिल्ली-NCR के सात ठिकानों पर तलाशी ली थी. इस कार्रवाई में करीब ₹33 करोड़ की संपत्तियां जब्त या फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई थी, जिसमें लग्जरी वाहन, ज्वेलरी, बैंक खाते और अन्य वित्तीय संपत्तियां शामिल थीं.
एजेंसी की पिछली कार्रवाई में 1.3 किलोग्राम से अधिक सोना और हीरे की ज्वेलरी भी जब्त किए जाने की बात कही गई थी. इसके अलावा करीब ₹3.04 करोड़ के बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज किया गया था.
मामले की जांच अभी जारी है और ईडी की रिमांड के दौरान दोनों आरोपियों से कथित लेनदेन और ग्रुप कंपनियों के बीच फंड ट्रांसफर को लेकर पूछताछ की जा रही है. गौरतलब है कि ईडी ने 2025 में अदालत के समक्ष वाटिका लिमिटिड, अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और अन्य के खिलाफ PMLA के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की थी.
टैग्स ₹260 crore plot case