होम / बिजनेस / रबी फसलों पर सरकार का बड़ा फैसला, गेहूं समेत 6 फसलों का MSP बढ़ा
रबी फसलों पर सरकार का बड़ा फैसला, गेहूं समेत 6 फसलों का MSP बढ़ा
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, छह प्रमुख रबी फसलों की सरकारी खरीद और किसानों को किए गए MSP भुगतान में भी पिछले वर्षों में बढ़ोतरी हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं समेत छह प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है. सरकार के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है. छह फसलों में गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम शामिल हैं. कुसुम के MSP में सबसे ज्यादा ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है.
किस फसल का MSP कितना बढ़ा?
सरकार ने रबी सीजन 2027-28 के लिए सभी छह अनिवार्य रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी की है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बढ़ोतरी इस प्रकार है:
1. कुसुम: ₹675 प्रति क्विंटल
2. रेपसीड-सरसों: ₹413 प्रति क्विंटल
3. मसूर: ₹390 प्रति क्विंटल
4. जौ: ₹136 प्रति क्विंटल
5. चना: ₹83 प्रति क्विंटल
6. गेहूं: ₹25 प्रति क्विंटल
कुसुम में ₹675 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी इस फैसले में सबसे अधिक है.
MSP बढ़ाने के पीछे क्या है सरकार का तर्क?
सरकार के अनुसार, MSP तय करने की नीति 2018-19 के केंद्रीय बजट में घोषित उस सिद्धांत के अनुरूप है, जिसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर रखने का प्रावधान किया गया है. CACP की सिफारिशों के आधार पर सरकार हर साल 22 अनिवार्य कृषि फसलों के MSP तय करती है, जिनमें छह रबी फसलें शामिल हैं.
सरकार का कहना है कि रबी फसलों के MSP में बढ़ोतरी से किसानों को लाभकारी मूल्य मिलने के साथ फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा. खास तौर पर दाल और तिलहन वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना इस नीति का एक प्रमुख उद्देश्य है.
दाल और तिलहन की खेती पर जोर
गेहूं जैसी प्रमुख खाद्यान्न फसल के साथ सरकार मसूर, चना और रेपसीड-सरसों जैसी दाल एवं तिलहन फसलों को भी बढ़ावा दे रही है. MSP में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी के जरिए किसानों को इन फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की नीति पर जोर दिया गया है. सरकार के मुताबिक, MSP में बढ़ोतरी का उद्देश्य सिर्फ कीमत बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को अलग-अलग फसलों के बीच बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना भी है.
पिछले वर्षों में भी बढ़ा है रबी फसलों का MSP
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2026-27 के बीच छह प्रमुख रबी फसलों के MSP में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. 2014-15 में गेहूं का MSP ₹1,400 प्रति क्विंटल था, जो 2026-27 के लिए बढ़कर ₹2,585 हो चुका था. इसी अवधि में मसूर का MSP ₹3,075 से बढ़कर ₹7,000 और रेपसीड-सरसों का MSP ₹3,100 से बढ़कर ₹6,200 प्रति क्विंटल हुआ.
सरकारी खरीद और MSP भुगतान भी बढ़ा
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, छह प्रमुख रबी फसलों की सरकारी खरीद और किसानों को किए गए MSP भुगतान में भी पिछले वर्षों में बढ़ोतरी हुई है. RMS 2025-26 के दौरान इन छह फसलों की कुल खरीद करीब 310 लाख मीट्रिक टन रही और इनकी MSP खरीद का मूल्य करीब ₹79,267 करोड़ रहा.
सरकार के अनुसार, MSP पर सरकारी खरीद किसानों को तब बाजार मूल्य से सुरक्षा देने का एक माध्यम है, जब संबंधित कृषि उपज के बाजार भाव MSP से नीचे चले जाएं. हालांकि, कुल उत्पादन का केवल बाजार योग्य हिस्सा ही सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीद के लिए उपलब्ध होता है.
कुल मिलाकर, रबी सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों के MSP में बढ़ोतरी से सरकार ने किसानों को उत्पादन लागत के मुकाबले बेहतर मूल्य उपलब्ध कराने और दाल-तिलहन समेत विभिन्न फसलों की खेती को बढ़ावा देने की अपनी नीति को आगे बढ़ाया है.
टैग्स