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भारत में पहली बार WCOG, 61 देशों के 3,000 विशेषज्ञ जुटे; एआई और मेडिकल टेक्नोलॉजी पर मंथन

WCOG के उद्घाटन पर जेपी नड्डा बोले- पाचन और लिवर संबंधी बीमारियों से निपटने के लिए इलाज के साथ रोकथाम और शुरुआती जांच पर जोर जरूरी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

भारत में पहली बार विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस (WCOG) का आयोजन किया जा रहा है. नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित चार दिवसीय कांग्रेस में 61 देशों के करीब 3,000 डॉक्टर और शोधकर्ता हिस्सा ले रहे हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बुधवार को कांग्रेस का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक सम्मेलन नहीं है, बल्कि दुनियाभर में बढ़ती पाचन तंत्र और लिवर से जुड़ी बीमारियों की चुनौती से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों का महत्वपूर्ण मंच है.

नड्डा ने कहा कि गैस्ट्रोएंटरोलॉजी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है. इसमें पाचन तंत्र, लिवर, अग्न्याशय और पित्त प्रणाली से जुड़ी बीमारियों का इलाज और अध्ययन किया जाता है. उन्होंने कहा कि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण और वायरल हेपेटाइटिस के साथ-साथ अग्न्याशय से जुड़ी बीमारियों, अग्नाशयशोथ और पेट-आंत के कैंसर का बोझ भी बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों में बदलाव, मोटापा और चयापचय संबंधी बीमारियां इस चुनौती को और बढ़ा रही हैं. हालांकि, बीमारी की पहचान और इलाज के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति हुई है. आधुनिक माइक्रोस्कोपी अब केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि कई चिकित्सीय प्रक्रियाओं और इम्यूनोथेरेपी में भी इसका इस्तेमाल हो रहा है. इमेजिंग, आणविक जांच और आधुनिक एंडोस्कोपी में प्रगति के साथ नई लक्षित और जैविक उपचार पद्धतियों से बीमारियों की शुरुआती पहचान और बेहतर इलाज की संभावनाएं बढ़ी हैं.

सिर्फ इलाज नहीं, रोकथाम पर भी ध्यान जरूरी

नड्डा ने कहा कि पाचन संबंधी बीमारियों के बढ़ते बोझ से केवल नई तकनीक और इलाज के जरिए नहीं निपटा जा सकता. इसके लिए बीमारी की रोकथाम, स्वस्थ खान-पान और जीवनशैली, शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर जांच पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी है.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के जरिए स्वास्थ्य व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं. अब स्वास्थ्य व्यवस्था केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बीमारी की रोकथाम, स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, इलाज, प्रशामक देखभाल, पुनर्वास और बुजुर्गों की बेहतर देखभाल को भी शामिल किया गया है.

सरकार प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर काम कर रही है. प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ उच्च गुणवत्ता वाली विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है.

1.86 लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि देशभर में 1.86 लाख स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया गया है. ये केंद्र बड़ी आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का पहला संपर्क बिंदु हैं. यहां प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य, आंखों की देखभाल, दंत चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल और प्रशामक देखभाल सहित 12 तरह की स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं.

उन्होंने टीकाकरण को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. गर्भावस्था से लेकर बच्चे के 16 वर्ष की आयु तक टीका-रोकथाम योग्य बीमारियों से सुरक्षा के लिए बच्चों को 11 टीकों की 27 खुराकें दी जाती हैं, जबकि गर्भवती महिलाओं को दो टीके लगाए जाते हैं. हर साल करीब 5 करोड़ गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पूरे समूह की डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निगरानी की जाती है.

करोड़ों लोगों की गैर-संचारी रोगों की जांच

नड्डा ने कहा कि गैर-संचारी रोगों की शुरुआती जांच भी सरकार की निवारक स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा है. स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के जरिए 30 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुंह के कैंसर, स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की जांच की जा रही है.

अब तक उच्च रक्तचाप के लिए 42 करोड़, मधुमेह के लिए 42 करोड़, मुंह के कैंसर के लिए 36 करोड़, स्तन कैंसर के लिए 17 करोड़ और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए 9 करोड़ जांच की जा चुकी हैं.

तेल की खपत 10 फीसदी घटाने की अपील

स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए सरकार भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के ईट राइट अभियान और खेलो इंडिया जैसी पहल चला रही है. इनका उद्देश्य लोगों को बेहतर खान-पान और सक्रिय जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है. नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोटापे की समस्या से निपटने के लिए लोगों से तेल की खपत में कम से कम 10 प्रतिशत कमी करने का भी आग्रह किया है.

स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव का स्तर 2015-16 में 79 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 90 प्रतिशत हो गया है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1990 से 2023 के बीच भारत में मातृ मृत्यु अनुपात में 86 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 48 प्रतिशत रही.

इसी तरह 1990 से 2024 के बीच भारत में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर इसमें 61 प्रतिशत गिरावट हुई. भारत में नवजात मृत्यु दर में भी इसी अवधि में 70 प्रतिशत की कमी आई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 54 प्रतिशत रही.

आयुष्मान भारत से 60 करोड़ से अधिक लोगों को कवर

नड्डा ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बीमारी गरीब, मध्यम वर्ग और समाज के कमजोर वर्गों के लिए आर्थिक संकट का कारण न बने. इसी उद्देश्य से सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू की गई थी.

इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर दिया जाता है. नड्डा के मुताबिक, योजना अब 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को कवर करती है और इसका लक्ष्य 70 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंचना है. यह भारत की आबादी का करीब 40 प्रतिशत है. इसके अलावा 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के करीब 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना इस योजना का लाभ दिया जा रहा है. अब तक योजना के तहत करीब 13 करोड़ उपचार उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जिन पर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का स्वास्थ्य खर्च हुआ है.

जनऔषधि केंद्रों से दवाओं पर बचत

स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती बनाने के साथ सरकार दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की लागत कम करने पर भी काम कर रही है. नड्डा ने बताया कि प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 80 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं.

देशभर में 20,149 से अधिक जनऔषधि केंद्र काम कर रहे हैं. इस पहल के जरिए लोगों ने दवाओं पर होने वाले खर्च में सामूहिक रूप से करीब 45,000 करोड़ रुपये की बचत की है. उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का असर लोगों के अपनी जेब से किए जाने वाले स्वास्थ्य खर्च में भी दिखा है. कुल स्वास्थ्य खर्च में लोगों की जेब से होने वाले खर्च की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 43.4 प्रतिशत रह गई है.

एआई और आधुनिक तकनीक से बदल रहा इलाज

कांग्रेस में पाचन तंत्र और लिवर से जुड़ी बीमारियों की पहचान और इलाज में हो रही नई प्रगति पर भी चर्चा हो रही है. इसमें अग्न्याशय और पेट-आंत के कैंसर की शुरुआती पहचान, अग्नाशयशोथ, एमएएसएलडी, आईबीडी, सीलिएक रोग और लिवर फेलियर के नए उपचार शामिल हैं. एच. पाइलोरी संक्रमण को खत्म करने, बीमारी के जोखिम का सटीक आकलन, आधुनिक एंडोस्कोपी और आंत में मौजूद सूक्ष्मजीवों यानी माइक्रोबायोम को समझने पर भी विशेषज्ञ चर्चा कर रहे हैं.

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नई जांच तकनीक, जैव-चिकित्सा अनुसंधान और डेटा विज्ञान में हो रही प्रगति स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रही है. अब जरूरत इन तकनीकों को ऐसे चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित समाधानों में बदलने की है, जिन्हें बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके. इसके लिए डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण होगा.

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंडोस्कोपी, ईयूएस, अग्न्याशय की बीमारियों, आईबीडी और पाचन तंत्र की गति से जुड़ी समस्याओं के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रहा है. हालांकि, इसके इस्तेमाल के साथ तकनीक की चिकित्सकीय पुष्टि, सुरक्षा और नियमन से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हैं.

भारत का शोध वैश्विक स्वास्थ्य चर्चा में योगदान दे रहा

कांग्रेस में आईबीडी, कोलोरेक्टल कैंसर, एमएएसएलडी, लंबे समय से रहने वाली अग्न्याशय की बीमारी और मानव माइक्रोबायोम पर भारत में हो रहे शोध पर भी चर्चा हो रही है. इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के पाचन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को भी समझने पर जोर दिया जा रहा है.

डब्ल्यूसीओजी 2026 की संचालन समिति के सह-अध्यक्ष और इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार गर्ग तथा स्थानीय आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गोविंद मखारिया ने कहा कि पाचन स्वास्थ्य दुनियाभर के लिए चिंता का विषय है. इसमें संक्रमण, चयापचय और सूजन संबंधी बीमारियां, कैंसर और लंबे समय से रहने वाली पाचन संबंधी समस्याएं शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि भारत बड़ी और विविध रोगी आबादी, महत्वपूर्ण चिकित्सकीय अनुभव और लगातार बढ़ते शोध आधार के साथ इस वैश्विक चर्चा में योगदान दे रहा है. डब्ल्यूसीओजी 2026 विभिन्न देशों के अनुभव साझा करने और स्वास्थ्य प्रणालियों से सीखने का अवसर प्रदान कर रही है. इसका साझा उद्देश्य बीमारी की रोकथाम, शुरुआती पहचान और मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम हासिल करना है.

‘जीआई स्वास्थ्य के 10 सूत्र’ जारी

कांग्रेस के उद्घाटन दिवस पर “जीआई स्वास्थ्य के 10 सूत्र” भी जारी किए गए. ये भारतीय और अंतरराष्ट्रीय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विशेषज्ञों द्वारा तैयार साक्ष्य-आधारित सिफारिशें हैं. इनमें बीमारी की रोकथाम, जोखिम कारकों और लक्षणों की पहचान तथा समय पर चिकित्सकीय जांच पर जोर दिया गया है. विशेषज्ञों ने इन संदेशों को अलग-अलग देशों और समुदायों तक पहुंचाने की जरूरत बताई.

WCOG 2026 का आयोजन 3 अक्टूबर तक चलेगा. कांग्रेस की थीम “पाचन स्वास्थ्य में बदलाव, प्रकृति का संरक्षण” है. इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और वर्ल्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ऑर्गनाइजेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह कांग्रेस पाचन तंत्र और लिवर से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम, जांच और इलाज पर वैश्विक और भारतीय दृष्टिकोण को एक मंच पर ला रही है.

नड्डा ने कहा कि लगातार शोध और नवाचार की जरूरत बनी हुई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनियाभर से आए डॉक्टर और शोधकर्ता पाचन तंत्र के प्रमुख संक्रमणों को नियंत्रित करने तथा पाचन तंत्र और लिवर से जुड़ी बीमारियों के बदलते बोझ से निपटने के लिए नए और प्रभावी समाधान विकसित करेंगे.

उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन ज्ञान के आदान-प्रदान, विभिन्न स्वास्थ्य प्रणालियों से सीखने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग विकसित करने का अवसर देते हैं. साथ ही, युवा डॉक्टरों के लिए भी ये सम्मेलन भविष्य के शोध, चिकित्सा अभ्यास और नवाचार को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं.


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