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दिल्ली में 120 लोगों की हुई हृदय संबंधी जांच, विशेषज्ञों ने समय रहते जोखिम पहचानने पर दिया जोर
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर आयोजित इस कैंप में क्लीनिकल जांच, लैब टेस्ट और कार्डियक इमेजिंग को एक साथ शामिल किया गया. इसका उद्देश्य लोगों को हृदय रोग के जोखिम के बारे में जागरूक करना और गंभीर हृदय संबंधी घटना से पहले बीमारी की पहचान तथा रोकथाम पर जोर देना था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में 27 सितंबर को निःशुल्क प्रिवेंटिव कार्डियक हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया. इसमें करीब 120 लोगों ने हिस्सा लिया. कैंप में हृदय रोग से जुड़े जोखिम कारकों की शुरुआती पहचान के लिए ब्लड शुगर, HbA1c, लिपिड प्रोफाइल और ECG जैसी जांचें निःशुल्क की गईं. वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को परामर्श भी दिया.
हृदय रोग के जोखिम की शुरुआती पहचान पर जोर
अस्पताल के कार्डियोलॉजी और CT स्कैन विभाग की ओर से आयोजित इस कैंप का उद्देश्य हृदय रोग के जोखिम की समय रहते पहचान और रोकथाम के प्रति लोगों को जागरूक करना था. डॉक्टरों की सलाह के आधार पर कुछ मरीजों के लिए CT Coronary Calcium Scoring भी निःशुल्क किया गया. यह जांच कोरोनरी धमनियों में कैल्सीफाइड प्लाक के बोझ का आकलन करने में मदद करती है और उपयुक्त मरीजों में हृदय संबंधी जोखिम का आकलन करने के लिए उपयोग की जा सकती है.
क्लीनिकल जांच और स्क्रीनिंग के बाद चयनित मरीजों को CT Coronary Angiography की सुविधा 20 फीसदी रियायती दर पर भी उपलब्ध कराई गई. इस जांच के जरिए कोरोनरी धमनियों की विस्तृत और गैर-आक्रामक जांच की जा सकती है.
कैंप में वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कविता त्यागी, डॉ. मनीष शर्मा, डॉ. आशीष जैन और डॉ. सुशांत वट्टल के अलावा प्रिवेंटिव हेल्थ की निदेशक डॉ. सोनिया रावत और वरिष्ठ स्टाफ फिजिशियन डॉ. नूर फातिमा वारिस ने मरीजों की स्क्रीनिंग की.
'पहले हार्ट अटैक का इंतजार नहीं करना चाहिए'
धर्मवीरा हार्ट सेंटर के चेयरमैन और सर गंगाराम हॉस्पिटल ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. जे.पी.एस. सावनी ने कहा कि हृदय रोग के जोखिम कारकों की पहचान शुरुआती स्तर पर करके और समय रहते हस्तक्षेप करके हृदय संबंधी बीमारियों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी केवल लक्षणों पर ध्यान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के समग्र हृदय संबंधी जोखिम को समझने पर भी जोर देती है. उनके मुताबिक, इस तरह के कैंप लोगों तक रोकथाम का संदेश पहुंचाने और उन्हें अपने हृदय स्वास्थ्य के प्रति सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद करते हैं.
इलाज से पहले रोकथाम पर ध्यान जरूरी
AIIMS के प्रोफेसर एमेरिटस और कार्डियक साइंसेज के सलाहकार डॉ. एस.सी. मनचंदा ने इंटरैक्टिव सत्र के दौरान हृदय संबंधी जोखिम की शुरुआती पहचान के महत्व पर जोर दिया.
उन्होंने कहा कि हृदय रोग अचानक विकसित नहीं होता. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिस्लिपिडेमिया, मोटापा, धूम्रपान और अन्य जोखिम कारक कई वर्षों तक बिना स्पष्ट लक्षणों के मौजूद रह सकते हैं और बाद में गंभीर हृदय संबंधी घटना का कारण बन सकते हैं. उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप को बढ़ावा देने की जरूरत बताई.
विशेषज्ञों ने सवाल-जवाब सत्र में दी जानकारी
कैंप में प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी पर सवाल-जवाब सत्र भी आयोजित किया गया. इसमें डॉ. जे.पी.एस. सावनी, डॉ. एस.सी. मनचंदा, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के चेयरमैन और सर गंगाराम अस्पताल के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के मानद कोषाध्यक्ष डॉ. सौमित्र रावत, बायोकेमिस्ट्री विभाग की चेयरपर्सन डॉ. सीमा भार्गव और इमेजिंग विभाग के सलाहकार डॉ. टी.बी.एस. बक्सी ने हृदय स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की.
आधुनिक तकनीक से कोरोनरी बीमारी की शुरुआती पहचान
अस्पताल के CT विभाग के चेयरपर्सन डॉ. अनुराग यादव ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य क्लीनिकल जांच को आधुनिक कार्डियक इमेजिंग की क्षमताओं के साथ जोड़ना था. उन्होंने बताया कि CT Coronary Calcium Scoring कोरोनरी धमनियों में एथेरोस्क्लेरोटिक प्लाक के बोझ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है, जबकि CT Coronary Angiography उपयुक्त मरीजों में कोरोनरी धमनियों का विस्तृत और गैर-आक्रामक आकलन करने में मदद करती है.
डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल उचित मरीजों की पहचान करने के लिए किया जाना चाहिए, जिन्हें आगे की जांच और समय पर रोकथाम संबंधी हस्तक्षेप से लाभ मिल सकता है. इस पहल की परिकल्पना डॉ. अनुराग यादव ने डॉ. दीपक गुप्ता, डॉ. किशन रावत, डॉ. राजीव मल्होत्रा, डॉ. स्वप्निल शेठ, डॉ. तान्या चंद्रा, डॉ. प्रियंका गुप्ता और डॉ. ईशा पासरे के साथ की थी.
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर आयोजित इस कैंप में क्लीनिकल जांच, लैब टेस्ट और कार्डियक इमेजिंग को एक साथ शामिल किया गया. इसका उद्देश्य लोगों को हृदय रोग के जोखिम के बारे में जागरूक करना और गंभीर हृदय संबंधी घटना से पहले बीमारी की पहचान तथा रोकथाम पर जोर देना था.
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