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भारत के वैश्विक क्षमता केंद्र 2030 तक 100 अरब डॉलर का राजस्व उत्पन्न करेंगे: हरदीप सिंह पुरी
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत की वैश्विक भूमिका को ऊर्जा संक्रमण, स्टार्टअप्स और ग्रीन हाइड्रोजन से जोड़ा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारत के वैश्विक क्षमता केंद्र (GCCs) 2030 तक वार्षिक राजस्व में 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक उत्पन्न करने और 2.8 मिलियन पेशेवरों को रोजगार देने की राह पर हैं, यह बता केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान कही.
उन्होंने कहा केपीएमजी-एनरिच संवाद में बोलते हुए पुरी ने कहा कि जीसीसी भारत की वैश्विक ऊर्जा और प्रौद्योगिकी परिदृश्य में भूमिका के केंद्र में आ गए हैं. “2010 में हमारे पास 700 जीसीसी थे. आज हमारे पास 1,800 हैं. 2030 तक, हम 2,200 जीसीसी, 2.8 मिलियन नौकरियों और 100 अरब डॉलर से अधिक के राजस्व तक पहुंचने की उम्मीद करते हैं,”
मंत्री के अनुसार, फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से आधी पहले से ही भारत में जीसीसी चला रही हैं, जो 1.9 मिलियन पेशेवरों को रोजगार देती हैं और प्रति वर्ष 65 अरब अमेरिकी डॉलर का राजस्व उत्पन्न करती हैं. “ये केंद्र केवल भारत की सेवा नहीं कर रहे हैं. वे वैश्विक उद्यमों की सेवा कर रहे हैं. यह ऊर्जा उद्यम की पुनःकल्पना है,” उन्होंने जोड़ा.
पुरी ने स्टार्टअप्स को संवाद का 'सबसे मूल्यवान' तत्व बताते हुए फ्रंटियर क्षेत्रों में उनके काम को दस्तावेजीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा “स्टार्टअप्स ने जो हासिल किया है उसे एक जगह पर संकलित करने की आवश्यकता है न केवल एआई या मशीन लर्निंग में बल्कि पूरे क्षेत्र में.”
स्वच्छ ऊर्जा में प्रगति
पुरी ने जैव ईंधन पर भारत के रिकॉर्ड को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा “2014 में हमारे पास 1.4 प्रतिशत बायो-फ्यूल ब्लेंडिंग थी. हमारा लक्ष्य नवंबर 2022 तक 10 प्रतिशत था. हमने इसे पांच महीने पहले ही हासिल कर लिया. हमारा वर्तमान लक्ष्य 20 प्रतिशत है. लक्ष्य तिथि 2030 थी. हमने इसे छह साल पहले ही पूरा कर लिया,”
ग्रीन हाइड्रोजन पर उन्होंने लागत में तेज गिरावट का उल्लेख किया. उन्होंने कहा “जब मैंने शुरू किया, तो मुझे बताया गया कि कीमत लगभग 5.5 डॉलर प्रति किलो होनी चाहिए. IOCL ने एक निविदा जारी की… 4 डॉलर से कम. एनटीपीसी ने दूसरी निविदा जारी की. लगभग 3.50 डॉलर या उससे कम. मुझे पूरा विश्वास है… एक बार यह 2.5 डॉलर प्रति किलो तक आ जाएगा… आप एक बड़ा बदलाव देखेंगे.”
मंत्री ने दोहराया कि जबकि भारत स्वच्छ ऊर्जा पहलों को चला रहा है, आपूर्ति सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है. “मेरे प्रधानमंत्री को सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होता है कि मौसम की स्थिति चाहे जैसी भी हो, देश के किसी भी हिस्से में ऊर्जा की कोई कमी न हो,” पुरी ने कहा.
उन्होंने दूसरी पीढ़ी के एथेनॉल, संपीड़ित बायोगैस और बांस-आधारित एथेनॉल रिफाइनरियों, साथ ही भारत की परिष्करण और पेट्रोकेमिकल्स क्षमता में हो रही प्रगति की ओर इशारा किया.
पुरी ने कहा कि भारत पहले ही अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा कर चुका है और वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को आकार देना जारी रखेगा. 2030 तक, जिसे हम अपनी दृष्टि कह रहे हैं, हम एक पूर्ण रूपांतरण देखेंगे जिसमें भारत केंद्र में होगा, और जीसीसी उस ऊर्जा उद्यम की व्यापक पुनःकल्पना के केंद्र में होगा. भारत एकमात्र G20 देश है जिसने अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा किया है. हम न केवल बदलाव की गति के साथ चल रहे हैं. हम उसे आकार देने में मदद कर रहे हैं.
नवनीत सिंह, BW रिपोर्टर्स
(लेखक BW बिजनेसवर्ल्ड में जूनियर संवाददाता हैं)
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