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भारत में कोयला उत्पादन का आंकड़ा 100 करोड़ टन के पार, बिजली संकट से मिलेगी राहत!
भारत का 1 अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. यह न केवल ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, बल्कि देश की आर्थिक मजबूती का भी संकेत देता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत ने कोयला उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. देश ने 1 अरब टन कोयला उत्पादन का महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया. यह उपलब्धि वित्त वर्ष 2024-25 के समापन से कुछ दिन पहले हासिल हुई है. यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिससे बिजली संकट से राहत मिलने की उम्मीद है.
सरकार की रणनीति ने दिखाया असर
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, "हमने अत्याधुनिक तकनीकों और कुशल तरीकों के जरिये न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि सतत एवं जिम्मेदार खनन को भी सुनिश्चित किया है. यह उपलब्धि भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी और आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देगी."
इससे पहले केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2024 तक कोयला उत्पादन को 1 अरब टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बाद में इसे वित्त वर्ष 2025 तक बढ़ा दिया गया था. सरकार के नीतिगत सुधारों और रणनीतिक उपायों की बदौलत यह लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिया गया.
नीतिगत सुधारों की अहम भूमिका
कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह रिकॉर्ड उत्पादन सरकार की नीतिगत सुधारों की सफलता को दर्शाता है. इनमें मुख्य रूप से खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम में संशोधन और कोयला ब्लॉकों की वाणिज्यिक नीलामी जैसे फैसले शामिल हैं. इन सुधारों के कारण कोयला क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ी, जिससे घरेलू उत्पादन में तेजी आई और आयात पर निर्भरता घटी. बयान में यह भी बताया गया कि अप्रैल से दिसंबर 2024 के दौरान कोयला आयात में 8.4% की गिरावट आई, जिससे भारत को करीब 5.43 अरब डॉलर (लगभग 45,000 करोड़ रुपये) की विदेशी मुद्रा की बचत हुई.
कोविड के बाद उत्पादन में जबरदस्त उछाल
पिछले दो वर्षों में कोयला उत्पादन में जबरदस्त उछाल देखा गया है. कोविड-19 के दौरान मांग और आपूर्ति में भारी अंतर था, लेकिन सरकार और कोल इंडिया की योजनाओं के चलते उत्पादन में तेजी आई. सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड के साथ-साथ निजी स्वामित्व वाली खदानों ने भी रिकॉर्ड उत्पादन किया. कोल इंडिया ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "कोयला उत्पादन के मामले में 1 अरब टन के आंकड़े को पार करना वास्तव में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है."
बिजली संकट से मिलेगी राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिकॉर्ड उत्पादन से भारत की बिजली जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिलेगी. कोयले से उत्पादित बिजली अभी भी देश की कुल ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करती है. अधिक उत्पादन से थर्मल पावर प्लांट्स को पर्याप्त कोयला मिलेगा, जिससे बिजली संकट की समस्या कम होगी.
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